दिल्ली हाईकोर्ट ने फ्लाइट विवाद मामले में बिना सत्यापन आरोप शेयर करने पर ऋचा चड्ढा को फटकार लगाई और डिजिटल मीडिया ट्रायल पर चिंता जताई।
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए अभिनेत्री ऋचा चड्ढा को बिना सत्यापन के गंभीर आरोपों को सोशल मीडिया पर साझा करने के लिए फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की पोस्ट सार्वजनिक शर्मिंदगी और डिजिटल भीड़तंत्र (विजिलेंटिज्म) को बढ़ावा देती हैं।
यह मामला 11 मार्च की एक फ्लाइट घटना से जुड़ा है, जिसमें एक पत्रकार ने सह-यात्री पर अनुचित व्यवहार का आरोप लगाया था। फ्लाइट के उतरते ही पत्रकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आरोप साझा करते हुए संबंधित व्यक्ति की पहचान और तस्वीर भी सार्वजनिक कर दी, जिसके बाद यह मामला तेजी से वायरल हो गया।
इस दौरान ऋचा चड्ढा ने भी इस पोस्ट को “Make him famous” टिप्पणी के साथ शेयर किया, जिसे बाद में आरोपी व्यक्ति द्वारा दायर मानहानि मामले में शामिल किया गया। आरोपी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वह पूरी यात्रा के दौरान अपनी सीट पर ही था और लैंडिंग से पहले सो गया था।
20 मार्च को सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति विकास महाजन ने कहा कि एक सार्वजनिक हस्ती के रूप में किसी भी आरोप को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करना कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि बिना पुष्टि के आरोपों का समर्थन “डिजिटल ट्रायल” और “सार्वजनिक शर्मिंदगी” को बढ़ावा देता है।
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अदालत ने यह भी कहा कि इस तरह के आरोप किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को गंभीर और अपूरणीय नुकसान पहुंचा सकते हैं। साथ ही, कोर्ट ने पत्रकार द्वारा FIR दर्ज करने से पहले आरोप सार्वजनिक करने पर भी चिंता जताई और इसे निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन बताया।
मामले में NDTV और ABP News जैसे मीडिया संस्थानों की रिपोर्टिंग पर भी सवाल उठाए गए। कोर्ट ने कहा कि बिना स्वतंत्र सत्यापन के आरोप प्रकाशित करना जांच प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है और यह ‘निर्दोषता की धारणा’ के सिद्धांत के खिलाफ है।
अदालत ने सभी संबंधित पक्षों को निर्देश दिया है कि वे कथित मानहानिकारक सामग्री को हटाएं और अगली सुनवाई तक इस तरह के आरोपों को दोबारा प्रकाशित करने से बचें।
यह मामला सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव, जिम्मेदारी और डिजिटल युग में न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर उभरा है।

