हरियाणा सरकार ने रबी 2026-27 के लिए 470 करोड़ में जूट बैग खरीद मंजूर की, 80 करोड़ बचत के साथ गेहूं भंडारण व्यवस्था मजबूत होगी।
हरियाणा सरकार ने रबी सीजन 2026-27 की तैयारियों को तेज करते हुए अनाज भंडारण को मजबूत बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई हाई पावर्ड परचेज कमेटी की बैठक में जूट और अन्य बैगों की खरीद को मंजूरी दी गई, जिससे राज्य में गेहूं भंडारण व्यवस्था और सुदृढ़ होगी।
470 करोड़ में खरीद, 80 करोड़ की बचत
बैठक में कुल 550 करोड़ रुपये के प्रस्तावों पर चर्चा हुई, लेकिन प्रभावी नेगोसिएशन के जरिए सरकार ने करीब 80 करोड़ रुपये की बचत करते हुए 470 करोड़ रुपये में खरीद को अंतिम मंजूरी दी।
यह निर्णय सरकार की वित्तीय पारदर्शिता और संसाधनों के बेहतर उपयोग को दर्शाता है।
गेहूं भंडारण होगा सुरक्षित
इस खरीद के तहत:
- जूट बैग और अन्य स्टोरेज बैग खरीदे जाएंगे
- किसानों से खरीदे गए गेहूं का सुरक्षित भंडारण सुनिश्चित होगा
- मंडियों में आने वाली फसल के प्रबंधन में कोई बाधा नहीं आएगी
कई विभागों को मिलेगा लाभ
यह खरीद प्रक्रिया निम्न संस्थाओं की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए की जा रही है:
- खाद्य एवं आपूर्ति विभाग
- हैफेड (HAFED)
- हरियाणा राज्य भंडारण निगम
इन संस्थाओं के जरिए पूरे राज्य में भंडारण और वितरण व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।
also read : गुरु के चरणों में ही असली संपत्ति: नायब सिंह सैनी का नानकसर साहिब में संदेश, संत-महापुरुष योजनाओं पर जोर
पारदर्शी और समयबद्ध प्रक्रिया पर जोर
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि:
- खरीद प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो
- समय सीमा का सख्ती से पालन किया जाए
- गुणवत्ता मानकों में कोई समझौता न हो
किसानों के हित में बड़ा कदम
मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और फसल के सुरक्षित भंडारण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि रबी सीजन की सभी तैयारियां समय रहते पूरी की जाएं, ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
बैठक में मौजूद रहे मंत्री और अधिकारी
इस महत्वपूर्ण बैठक में:
- शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल
- कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा
- मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण गुप्ता
सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
निष्कर्ष
हरियाणा सरकार का यह निर्णय न केवल भंडारण क्षमता को बढ़ाएगा, बल्कि किसानों को बेहतर सुविधा देकर कृषि व्यवस्था को अधिक संगठित और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

