हरियाणा कैबिनेट ने कर्मचारियों के ऋण पोर्टफोलियो को PNB से वापस लेकर 1 जून 2026 से सीधे सरकारी लोन देने का फैसला किया।
हरियाणा सरकार ने अपने कर्मचारियों को राहत देते हुए बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल बैठक में कर्मचारियों के ऋण पोर्टफोलियो को पंजाब नेशनल बैंक (PNB) से वापस राज्य सरकार के पास लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है।
पुराने सिस्टम की होगी वापसी
सरकार अब 4 नवंबर 2016 से पहले लागू प्रणाली को फिर से लागू करेगी, जिसमें:
- कर्मचारियों को सीधे राज्य सरकार द्वारा ऋण/अग्रिम दिए जाएंगे
- लोन पर साधारण ब्याज दर (GPF या निर्धारित दर) लागू होगी
- ऋण खातों का संचालन प्रधान महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी), हरियाणा करेगा
क्यों लिया गया यह फैसला?
सरकार के अनुसार, PNB के माध्यम से चल रही वर्तमान प्रणाली में
- संचालन संबंधी कठिनाइयां
- प्रक्रिया में जटिलताएं
देखने को मिल रही थीं।
इसी कारण कर्मचारियों के हित में पुराने, सरल और पारदर्शी सिस्टम को फिर से लागू करने का निर्णय लिया गया।
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1 जून 2026 से लागू होगी नई व्यवस्था
कैबिनेट के फैसले के अनुसार:
- 1 जून 2026 से राज्य सरकार सीधे लोन देना शुरू करेगी
- वित्त वर्ष 2026-27 में इसके लिए ₹375.52 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है
PNB के जरिए लोन बंद होंगे
- 1 जून 2026 से PNB के माध्यम से नए ऋण देना बंद कर दिया जाएगा
- 31 मई 2026 तक लिए गए पुराने लोन का भुगतान कर्मचारी PNB को करते रहेंगे
ऋण खातों का ट्रांसफर कैसे होगा?
पुनर्समायोजन प्रक्रिया के तहत:
- कर्मचारियों के PNB में बकाया ऋण का भुगतान सरकार करेगी
- इसके बाद सभी ऋण खाते प्रधान महालेखाकार (A&E), हरियाणा को ट्रांसफर कर दिए जाएंगे
कर्मचारियों को क्या मिलेगा फायदा?
इस फैसले से:
- लोन प्रक्रिया होगी सरल
- ब्याज दर कम और पारदर्शी होगी
- सरकारी नियंत्रण से बेहतर सुविधा मिलेगी
सरकार का उद्देश्य
सरकार का मानना है कि इस कदम से:
- कर्मचारियों को वित्तीय सहायता आसानी से मिलेगी
- सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी
- प्रशासनिक प्रक्रिया तेज होगी
हरियाणा सरकार का यह निर्णय कर्मचारियों के लिए सरल, सस्ता और पारदर्शी ऋण सिस्टम सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

