हरियाणा कैबिनेट ने औद्योगिक लाइसेंसिंग नीति 2015 में संशोधन को मंजूरी दी, जिससे EDC में राहत और Ease of Doing Business को बढ़ावा मिलेगा।
हरियाणा सरकार ने औद्योगिक विकास को गति देने और निवेशकों को राहत देने के उद्देश्य से औद्योगिक लाइसेंसिंग नीति-2015 में अहम संशोधनों को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को स्वीकृति मिली।
निवेशकों को राहत, नियम होंगे सरल
सरकार के इस फैसले का मुख्य उद्देश्य:
- रेगुलेटरी नियमों को सरल बनाना
- डेवलपर्स पर आर्थिक बोझ कम करना
- राज्य में नियोजित औद्योगिक विकास को बढ़ावा देना
यह संशोधन उद्योग जगत की लंबे समय से चली आ रही मांगों को ध्यान में रखते हुए किया गया है, जिसमें NAREDCO जैसे हितधारकों के सुझाव भी शामिल हैं।
EDC में बड़ी राहत का फैसला
कैबिनेट का सबसे अहम निर्णय बाह्य विकास शुल्क (EDC) से जुड़ा है।
- यदि किसी इंडस्ट्रियल लाइसेंस वाली जमीन को बाद में शहरी सीमा में शामिल किया जाता है
- और उस पर पहले से कंप्लीशन या पार्ट कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी हो चुका है
👉 तो ऐसे मामलों में कोई अतिरिक्त EDC नहीं लिया जाएगा
हालांकि:
- अधूरे हिस्से पर मौजूदा नियमों के अनुसार EDC लागू रहेगा
- अतिरिक्त इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग पर केवल वास्तविक लागत ही ली जाएगी
also read : रिठाला–नरेला–कुंडली मेट्रो कॉरिडोर को हरियाणा कैबिनेट की मंजूरी, 2.7 किमी विस्तार से NCR कनेक्टिविटी होगी मजबूत
भूमि उपयोग में बड़ा बदलाव
नई नीति के तहत:
- ट्रांसपोर्ट और कम्युनिकेशन जोन में इंडस्ट्रियल गतिविधियों को अनुमति
- इंडस्ट्रियल लाइसेंसिंग को CLU (Change of Land Use) पॉलिसी 2021 से जोड़ा गया
👉 अब ऐसे क्षेत्रों में 25% तक औद्योगिक कॉलोनियों के विकास की अनुमति दी जाएगी
इससे:
- जमीन का बेहतर उपयोग
- कॉम्पैक्ट और योजनाबद्ध विकास को बढ़ावा
तेजी से बढ़ते शहरों को मिलेगा फायदा
यह संशोधन अब:
- हाइपर पोटेंशियल और हाई पोटेंशियल शहरों पर भी लागू होगा
- पहले ये क्षेत्र इस नीति के दायरे से बाहर थे
👉 इससे तेजी से विकसित हो रहे शहरी क्षेत्रों में नए औद्योगिक अवसर पैदा होंगे
Ease of Doing Business को मिलेगा बूस्ट
सरकार का मानना है कि इन बदलावों से:
- निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा
- इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट्स में तेजी आएगी
- हरियाणा में कारोबार करना और आसान होगा
उद्योग और रोजगार पर असर
इस फैसले के बाद:
- नए उद्योग स्थापित होने की गति बढ़ेगी
- रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी
- राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी
हरियाणा सरकार का यह कदम औद्योगिक विकास, निवेश आकर्षण और Ease of Doing Business को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा सुधार माना जा रहा है।
