फरीदाबाद के बिजली बिलिंग मामले में हरियाणा राइट टू सर्विस आयोग ने उपभोक्ता को 5,000 रुपये मुआवजा देने के निर्देश दिए।
हरियाणा राइट टू सर्विस कमीशन ने फरीदाबाद के एक बिजली बिलिंग विवाद में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए उपभोक्ता करण सिंह खत्री को 5,000 रुपये मुआवजा देने के निर्देश जारी किए हैं। यह राशि संबंधित विभागीय अधिकारियों से वसूल की जाएगी।
औसत बिलिंग से बढ़ा विवाद
प्राप्त जानकारी के अनुसार, उपभोक्ता ने 1 अगस्त 2024 को अस्थायी बिजली कनेक्शन लिया था। इस दौरान उन्हें हर महीने लगभग 2,500 रुपये के औसत बिल जारी किए गए, जिनका उन्होंने नियमित भुगतान किया।
हालांकि, 19 जनवरी 2026 को विभाग की ओर से 1 अगस्त 2024 से 15 जनवरी 2026 तक की अवधि का एकमुश्त 15,833 रुपये का बिल जारी किया गया, जिससे विवाद खड़ा हो गया।
आयोग तक पहुंचा मामला
उपभोक्ता ने 21 जनवरी 2026 को इस मामले में शिकायत दर्ज करवाई और नियमानुसार प्रथम व द्वितीय अपील की प्रक्रिया अपनाई। मामले की सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि उपभोक्ता ने पूरी बकाया राशि का भुगतान कर दिया था।
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आयोग की अहम टिप्पणी
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि उपभोक्ता द्वारा वास्तविक बिजली खपत का भुगतान करना आवश्यक है, लेकिन लंबे समय तक औसत बिलिंग के बाद एकमुश्त बड़ी राशि थोपना उपभोक्ता के लिए असुविधाजनक होता है।
आयोग ने यह भी निर्देश दिए कि भविष्य में ऐसे मामलों में विभाग को उपभोक्ताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए किस्तों में भुगतान जैसी व्यवस्था पर विचार करना चाहिए।
5,000 रुपये मुआवजा देने के आदेश
हरियाणा राइट टू सर्विस एक्ट, 2014 की धारा 17(1)(ह) के तहत आयोग ने अधिकतम अनुमन्य 5,000 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है।
साथ ही संबंधित अधिकारी को 13 अप्रैल 2026 तक इस आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
उपभोक्ता हित में अहम फैसला
यह फैसला उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा और पारदर्शी बिलिंग व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे भविष्य में ऐसे मामलों में विभागों को अधिक जिम्मेदारी से कार्य करने की सीख मिलेगी।

