कुरुक्षेत्र। पवित्र ब्रह्मसरोवर परिसर आज भव्यता और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बना रहा, जब अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के अंतर्गत आयोजित विराट संत सम्मेलन में अनेक संत-महात्माओं, विद्वानों और विशिष्ट अतिथियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में सहभागिता को उपस्थित जनसमूह ने सौभाग्य बताया।
सम्मेलन में जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज, गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज, पूज्य शंकराचार्य जी, तथा उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी सहित कई प्रतिष्ठित संतों और विचारकों की उपस्थिति ने वातावरण को दिव्य बना दिया।
संतों ने अपने उद्बोधनों में गीता के सार्वकालिक संदेश—कर्म, धर्म, सत्य और कर्तव्य—पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता जीवन का अनुपम मार्गदर्शक है, जो मानवता को कर्तव्यनिष्ठा, धैर्य और सदाचार का पथ दिखाती है।
वक्ताओं ने कुरुक्षेत्र को वह तपोभूमि बताया, जहां स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का अमर संदेश दिया, जो आज भी विश्वभर में लोगों का मार्गदर्शन कर रहा है। सम्मेलन के दौरान यह भी उल्लेख किया गया कि गीता महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि संस्कृति, दर्शन और मानव मूल्यों को आगे बढ़ाने का वैश्विक मंच है।
कार्यक्रम में उपस्थित संतों के सान्निध्य से श्रद्धालु और आगंतुक गहराई से प्रभावित दिखे। उन्होंने इसे आध्यात्मिक ऊर्जा और प्रेरणा से भर देने वाला अनुभव बताया।
अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में यह संत सम्मेलन हर वर्ष विशेष आकर्षण का केंद्र रहता है और इस बार भी आस्था, ज्ञान और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला।
आज कुरूक्षेत्र स्थित पवित्र ब्रह्मसरोवर पर अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के अंतर्गत आयोजित विराट संत सम्मेलन में सहभागी होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। संत-महात्माओं के दिव्य सान्निध्य ने मन को नई प्रेरणा एवं ऊर्जा प्रदान की।
कार्यक्रम में जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद… pic.twitter.com/345vJZTyxt
— Manohar Lal (@mlkhattar) November 29, 2025

