Vaishakh Amavasya: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अमावस्या के दिन पितृलोक के द्वार खुलते हैं, जिससे पितर अपनी संतानों से तर्पण, श्राद्ध और दीपावली की आशा करते हैं। इस बार वैशाख अमावस्या 27 अप्रैल को मनाई जाएगी।
Vaishakh Amavasya: वैशाख अमावस्या हिन्दू पंचांग की एक विशेष तिथि है, जिसमें श्रद्धा, दीपदान और तर्पण का विशेष महत्व होता है ताकि दिवंगत पितरों की आत्मा शांति पाए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अमावस्या के दिन पितृलोक के द्वार खुलते हैं, जिससे पितर अपनी संतानों से तर्पण, श्राद्ध और दीपावली की आशा करते हैं। वैशाख अमावस्या इस बार 27 अप्रैल को मनाई जाएगी।
ज्योतिषीय दृष्टिकोण से, अमावस्या तिथि को पितृ शक्ति का अधिक प्रभाव होता है क्योंकि चंद्र का प्रभाव कम होता है। पितरों का एक दिन, मनुष्य का एक मास के समान है। यही कारण है कि प्रत्येक महीने की अमावस्या उनके लिए महत्वपूर्ण होती है, विशेष रूप से वैशाख की अमावस्या, जो गर्मी और जल तत्व की तृप्ति को दर्शाती है। आइए जानते हैं कि कैसे दीया, मंत्र और नियम जलाएं।
2025 वैशाख अमावस्या का मुहूर्त
- वैशाख अमावस्या आरंभ: 27 अप्रैल, रविवार, प्रात: 4:49
- वैशाख अमावस्या तिथि समाप्त: 28 अप्रैल, सोमवार, देर रात्रि 01:00 बजे
- ब्रह्म मुहूर्त: 27 अप्रैल, प्रात: 04:17 से प्रात:05:00 बजे तक
- सर्वार्थ सिद्धि योग:27 अप्रैल, प्रात:05:44 से 28 अप्रैल देर रात्रि 12:38 तक
कैसे दीपक जलाएं?
- सूर्योदय होने पर घर की दक्षिण दिशा में एक शुद्ध स्थान पर सफेद कपड़ा बिछाकर मिट्टी, पीतल या तांबे का दीपक रखें।
- पितृ दोष शांति देता है, इसलिए दीपक में तिल का तेल डालें।
- दक्षिण की ओर मुख करके एक रुई की बाती दीपक में जलाएं।
- पितरों के नाम का उच्चारण करते हुए दीपक के पास प्रणाम करें।
पितरों के लिए दीया जलाने के लाभ
- जब पितर अमावस्या की रात पृथ्वी पर लौटते हैं, तो वे अपने रास्ते में दीपक जलाकर खुश होकर आशीर्वाद देते हैं, जिससे परिवार सुधरता है।
- पितरों के लिए इस दिन दीपक जलाने से घर में शांति बनी रहती है और पितर प्रसन्न होकर सुख और सुख का आशीर्वाद देते हैं।
- पितरों के लिए दीपक जलाने से पितृ दोष शांत होता है, जिससे जीवन में आने वाली बाधाओं और परेशानियों को दूर किया जा सकता है।
पितरों को मंत्र जाप करें
पितृ तर्पण मंत्र
ॐ नमः पितृभ्यः स्वधा नमः ||
यह मंत्र पितरों के प्रति सम्मान और श्रद्धा व्यक्त करता है। इसके जाप से पितरों को तृप्ति मिलती है।
पितृ दोष शांति मंत्र
ॐ पितृदेभ्यः स्वाहा ||
इस मंत्र के जाप से पितृ दोष शांत होता है और पितरों का आशीर्वाद मिलता है।
सम्पूर्ण पितृ तर्पण मंत्र
ॐ अकाशात् पतितं तर्पयामि, पृथिव्यां तर्पयामि, आकाशच देव्यां तर्पयामि।
यह मंत्र सभी पितरों को सभी आकाशीय, पृथ्वी और पृथ्वी देवताओं को अर्पित करता है जिससे सभी पितर खुश हैं।
इन मंत्रों का जाप करते समय पूरे मन से पितरों का सम्मान करें और दीपक के सामने इनका जाप करें। इस क्रिया से सुख, समृद्धि और पितृ दोष से छुटकारा मिलता है।
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