मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने ईडी छापों और केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पंजाब न कभी झुका है और न कभी झुकेगा।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने एक बार फिर केंद्र सरकार और भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि पंजाब को डराने और दबाने की हर कोशिश नाकाम साबित होगी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पंजाब गुरुओं, शहीदों और संतों की धरती है, जिसने इतिहास में कभी जुल्म के आगे सिर नहीं झुकाया और भविष्य में भी किसी दबाव के सामने नहीं झुकेगा।
मुख्यमंत्री ने ईडी द्वारा कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा के घर की गई छापेमारी को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताते हुए आरोप लगाया कि केंद्र सरकार केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं को दबाने और गैर-भाजपा शासित राज्यों को अस्थिर करने के लिए कर रही है। उन्होंने कहा कि पिछले एक वर्ष में तीसरी बार और एक महीने में दूसरी बार संजीव अरोड़ा के ठिकानों पर ईडी की कार्रवाई हुई, लेकिन एजेंसियों को कुछ भी नहीं मिला।
प्रेस वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने सवाल उठाया कि आखिर ईडी, सीबीआई और आयकर विभाग की कार्रवाई मुख्य रूप से उन्हीं राज्यों में क्यों हो रही है जहां भाजपा की सरकार नहीं है। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि भाजपा केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक हथियार के रूप में कर रही है। उन्होंने कहा कि देश में ऐसी स्थिति बना दी गई है जहां विपक्षी नेताओं को या तो भाजपा में शामिल होने के लिए मजबूर किया जाता है या फिर उनके खिलाफ जांच एजेंसियों का इस्तेमाल किया जाता है।
भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब के लोग इन हथकंडों को अच्छी तरह समझते हैं और किसी भी कीमत पर डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि पंजाब ने हमेशा अन्याय और दमन का मुकाबला किया है और यह परंपरा आज भी कायम है।
मुख्यमंत्री ने इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि पंजाब ने औरंगजेब जैसे शासकों के अत्याचारों का डटकर मुकाबला किया था और अब भी किसी तानाशाही सोच के सामने झुकने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि पंजाब की मिट्टी में भाईचारा, प्रेम और आपसी सम्मान की भावना बसती है और यहां नफरत की राजनीति कभी सफल नहीं हो सकती।
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मुख्यमंत्री ने भाजपा और ईडी के बीच “अनैतिक गठजोड़” का आरोप लगाते हुए कहा कि इसका पतन पंजाब से शुरू होगा। उन्होंने दावा किया कि भाजपा लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर अपने राजनीतिक हित साधना चाहती है, लेकिन पंजाब के लोग इस राजनीति को स्वीकार नहीं करेंगे।
संजीव अरोड़ा के मामले का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बार-बार की जा रही छापेमारी केवल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए है। उन्होंने कहा कि यदि वास्तव में भ्रष्टाचार या काले धन की जांच करनी होती तो कार्रवाई निष्पक्ष तरीके से सभी राज्यों में होती।
मुख्यमंत्री ने राज्यसभा सदस्य अशोक मित्तल का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि पहले उनके संस्थानों पर कार्रवाई की गई, लेकिन भाजपा में शामिल होने के बाद सब कुछ शांत हो गया और उन्हें सुरक्षा भी प्रदान कर दी गई। उन्होंने कहा कि इससे स्पष्ट हो जाता है कि एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक मकसद के लिए किया जा रहा है।
भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब ने तीन कृषि कानूनों के खिलाफ ऐतिहासिक आंदोलन चलाकर केंद्र सरकार को झुकने पर मजबूर किया था और अब उसी का बदला लेने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब को बदनाम करने और विकास की रफ्तार रोकने के लिए राज्य के साथ लगातार भेदभाव किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने पंजाब के कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर राज्य के साथ अन्याय किया है। उन्होंने चंडीगढ़, भाखड़ा, नदियों के पानी और पंजाब विश्वविद्यालय जैसे मुद्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि पंजाब के अधिकारों की लगातार अनदेखी की जा रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र द्वारा पंजाब के हजारों करोड़ रुपए के फंड रोके गए हैं, जिससे राज्य के विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश की खाद्य सुरक्षा और सीमा सुरक्षा में सबसे बड़ा योगदान देने वाले पंजाब को ही राजनीतिक रूप से निशाना बनाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब देश का पेट भरता है और यहां के जवान देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं। इसके बावजूद पंजाब को संदेह और भेदभाव की नजर से देखना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
सांप्रदायिक सद्भावना को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब की पहचान हमेशा भाईचारे और एकता की रही है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यहां हिंदू और सिखों को बांटने की कोशिश कभी सफल नहीं होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब की मिट्टी में हर फसल उग सकती है, लेकिन नफरत का बीज कभी नहीं पनप सकता।
बेअदबी विरोधी कानून पर बोलते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब सरकार धार्मिक ग्रंथों की मर्यादा और सम्मान की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि हाल ही में लागू किया गया सख्त कानून जनता की लंबे समय से चली आ रही मांग का परिणाम है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कानून को दुनिया भर की संगतों का समर्थन मिला है और केवल कुछ राजनीतिक हितों से प्रेरित लोग ही इसका विरोध कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कानून पूरी संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लागू किया गया है और इसे वापस लेने का कोई सवाल नहीं उठता।
उन्होंने यह भी कहा कि बेअदबी की घटनाओं ने पंजाब के लोगों को गहरा दुख पहुंचाया था और अब सरकार ने सख्त कानून बनाकर यह सुनिश्चित किया है कि भविष्य में कोई भी ऐसी हरकत करने की हिम्मत न कर सके।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने अपनी “शुक्राना यात्रा” का जिक्र करते हुए कहा कि पंजाब के लोगों से उन्हें भारी समर्थन और प्यार मिल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी जनसमर्थन से ध्यान हटाने के लिए ईडी की छापेमारी और विवाद खड़े किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि भाजपा की राजनीति डर और दबाव पर आधारित है, लेकिन पंजाब के लोग हमेशा सच और न्याय के साथ खड़े रहेंगे। मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि उनकी सरकार ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ जनता की सेवा करती रहेगी और किसी भी दबाव या धमकी के आगे झुकने वाली नहीं है।

