Mindful Eating: ध्यानपूर्ण भोजन एक स्वस्थ जीवनशैली है और सिर्फ एक आदत नहीं है। हमारा शरीर स्वस्थ रहेगा और हमारा मन शांत रहेगा अगर हम रोजाना खाने को थोड़ा समय और ध्यान देकर खाएं।
Mindful Eating: आजकल लोग खाना सिर्फ भूख भरने के लिए खाते हैं, न कि खुद को खुश करने के लिए। वास्तव में, उनके पास परिवार के साथ बैठकर खाना खाने के लिए पर्याप्त समय नहीं है। यह सिर्फ एक नियम बन गया है। पुराने लोगों को कभी देखा है या अपनी दादी-नानी से कभी सुना है कि वे पहले क िस तरह से खाते थे? अगर नहीं, तो हम आपको बता देंगे कि पहले लोग पीढ़े पर बैठकर खाना खाते थे या जमीन पर चटाई बिछाते थे। साथ-साथ खाने से रिश्ते मजबूत होते और सेहत को कई लाभ मिलते थे।
डॉ. करुणा चतुर्वेदी ने बताया कि जमीन पर बैठने से शरीर की मुद्रा सुधरती है। खाना डाइजेस्ट करना आसान है। इससे घुटनों का बल भी बढ़ता है। उन् होंने कहा कि सब लोग एकत्रित होकर आपस में बातचीत करते थे और हंसी-मजाक करते थे। इससे भावनात्मक सम्बन्ध गहरा हुआ। यह परंपरा न केवल शरीर को स्वस्थ रखने के लिए काम करती थी, बल्कि रिश्तों को भी मजबूत बनाती थी। आज लोग जल्दी खाते हैं। जब हम खाना खाते हैं तो टीवी या मोबाइल देखते हुए बातें करना, ये आदतें हमारे शरीर और मन पर बुरा असर डालती हैं। ऐसे में सजगता से खाना खाने की आदत हमारे लिए लाभदायक हो सकती है। आइए जानते हैं खाना खाते समय क्या ध्यान रखना चाहिए:
क्या Mindful Eating है?
माइंडफुल ईटिंग का अर्थ है हर भोजन को ध्यान से और खुशी से खाना। जब आप खाने का स्वाद, स्वाद, रंग और बनावट महसूस करते हैं, तो इसे माइंडफुल ईटिंग कहते हैं। यह सिर्फ भूख भरने के लिए नहीं है; खाने की पूरी प्रक्रिया का आनंद लेना है।
बैठकर शांतिपूर्वक खाना
घर में आपने अपनी दादी-नानी से सुना होगा कि खाना हमेशा बैठकर शांति से खाना चाहिए। चलते-चलते या खड़े-खड़े खाने से न तो हम खाना पचाते हैं, न ही उसका स्वाद लेते हैं। इससे हमें कई बीमारियां होती हैं।
हर निवाला चबाकर खाएं।
पुराने लोगों ने हर एक निवाले को कम से कम तीस दो बार चबाकर खाया था। इससे खाना डाइजेस्ट किया जा सकता है। शरीर भी अच्छी तरह से पोषित होता है।
स्क्रीन से बचें
टीवी, मोबाइल या लैपटॉप पर फिल्म देखकर खाने से मन भटकने लगता है। इससे हम न तो खाने की मात्रा को समझ पाते हैं और न ही इसे पूरा कर पाते हैं। ओवरईटिंग भी होती है।
कृतज्ञता के साथ भोजन करना
आज भी लोग भोजन करने से पहले भगवान को पूजते हैं। इससे हम खाने के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का भाव पैदा होता है। ये शारीरिक रूप से भी बहुत लाभदायक है।
पीढ़े पर बैठकर भोजन करें
दादी-नानी का समाज पीढ़े पर बैठकर खाना खाते थे। इससे पेट बाहर नहीं निकलता था और वजन भी नियंत्रित था।
माइंडफुल ईटिंग के लाभ
- वजन नियंत्रण में मदद करता है।
- डाइजेशन बेहतर होता है।
- कम तनाव।
- खाने का अनुभव और स्वाद बेहतर होता है।
- खाने की कम बर्बादी होती है।
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