राज्य में गिरते लिंगानुपात और अवैध लिंग जांच पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग ने अपनी कार्रवाई को और सख्त करने के संकेत दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक (डीजी) डॉ. कुलदीप सिंह ने स्पेशल टास्क फोर्स की साप्ताहिक समीक्षा बैठक के दौरान सभी जिला सिविल सर्जनों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे कम लिंगानुपात वाले गांवों पर विशेष फोकस करें और वहां नियमित निगरानी सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि इस दिशा में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक में डॉ. कुलदीप सिंह ने कहा कि लिंगानुपात में सुधार सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए जमीनी स्तर पर ठोस और परिणामोन्मुखी कार्रवाई की आवश्यकता है। उन्होंने सिविल सर्जनों को निर्देश दिए कि जिन गांवों और क्षेत्रों में लिंगानुपात चिंताजनक स्तर पर है, वहां विशेष अभियान चलाकर स्वास्थ्य रिकॉर्ड, जन्म पंजीकरण और संदिग्ध गतिविधियों की गहन जांच की जाए।
डीजी ने स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति या संस्था द्वारा लिंग जांच कराए जाने की सूचना मिलती है, तो उसकी जानकारी तुरंत संबंधित विभाग और स्पेशल टास्क फोर्स को दी जाए। उन्होंने कहा कि सूचना तंत्र को मजबूत करना बेहद जरूरी है, ताकि अवैध लिंग जांच के मामलों पर समय रहते कार्रवाई की जा सके। इसके लिए स्थानीय स्तर पर आशा कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य कर्मियों की सक्रिय भूमिका सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।
बैठक में अवैध गर्भपात (एमटीपी) किट की बिक्री को लेकर भी गंभीर चिंता जताई गई। डॉ. कुलदीप सिंह ने कहा कि मेडिकल स्टोरों और अन्य माध्यमों से हो रही अवैध एमटीपी किट की बिक्री लिंग चयन और अवैध गर्भपात को बढ़ावा देती है। उन्होंने जिला अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे मेडिकल स्टोरों और संदिग्ध स्थानों पर नियमित निरीक्षण किया जाए और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
महानिदेशक ने यह भी कहा कि पीसीपीएनडीटी एक्ट और एमटीपी एक्ट का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। किसी भी अल्ट्रासाउंड सेंटर या मेडिकल संस्थान द्वारा नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल छापेमारी ही नहीं, बल्कि मामलों को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाना भी जरूरी है, ताकि दोषियों को सजा मिल सके और समाज में कड़ा संदेश जाए।
समीक्षा बैठक में यह भी चर्चा हुई कि जागरूकता अभियानों को और प्रभावी बनाया जाए। डॉ. कुलदीप सिंह ने कहा कि समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करना उतना ही जरूरी है जितना कि कानूनी कार्रवाई। इसके लिए स्कूलों, पंचायतों और सामुदायिक मंचों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जाए।
अंत में डीजी ने सभी जिला सिविल सर्जनों से कहा कि वे नियमित रूप से प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करें और किसी भी चुनौती या समस्या को तुरंत उच्च स्तर पर साझा करें। उन्होंने भरोसा जताया कि सख्त निगरानी, प्रभावी कार्रवाई और जन-जागरूकता के संयुक्त प्रयासों से राज्य में लिंगानुपात में सुधार लाया जा सकेगा।

