Vaishakh Purnima 2025: हिंदू पंचांग के अनुसार, 11 मई को शाम 06 बजकर 55 मिनट पर वैशाख पूर्णिमा होगी। वहीं, 12 मई को शाम 7 बजकर 22 मिनट पर इसका समापन होगा।
Vaishakh Purnima 2025: स्कन्द पुराण में कहा गया है कि वैशाख मास सब मासों से अच्छा है क्योंकि ब्रह्मा ने इसे सर्वश्रेष्ठ बताया है। इस माह में हजारों लोग पवित्र तीर्थों पर स्नान करके, दान करके और पुण्य काम करके मोक्ष की ओर बढ़ते हैं। “बुद्ध पूर्णिमा” या “पीपल पूर्णिमा” वैशाख शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा हैं। पुराणों में महात्मा बुद्ध को भगवान विष्णु का नौवां अवतार बताया गया है, इसलिए यह दिन भगवान बुद्ध को भी समर्पित है।
पूर्णिमा कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार, 11 मई को शाम 06 बजकर 55 मिनट पर वैशाख पूर्णिमा होगी। वहीं, 12 मई को शाम 7 बजकर 22 मिनट पर इसका समापन होगा। हिंदू धर्म में उदया तिथि बहुत महत्वपूर्ण है। इसलिए 12 मई को वैशाख पूर्णिमा होगी। वैशाख पूर्णिमा पर शाम 05 बजकर 59 मिनट पर चंद्रोदय होगा। आप अब अर्घ्य दे सकते हैं।
पुष्करणी तिथियों से मिलने वाले लाभ
वैशाख शुक्ल त्रयोदशी से पूर्णिमा तक के दिनों को पुष्करणी तिथियाँ कहा जाता है। आजकल स्नान और दान का विशेष महत्व बताया जाता है। शास्त्रों के अनुसार एकादशी को अमृत प्रकट हुआ, द्वादशी को भगवान विष्णु ने उसकी रक्षा की, त्रयोदशी को देवताओं ने सुधा ली, चतुर्दशी को दैत्यों का संहार हुआ और पूर्णिमा को देवताओं को उनका साम्राज्य मिला। इसलिए यह तिथियाँ पापों को दूर करने और सुख-समृद्धि देने वाली मानी गई हैं।
धर्मराज को प्रसन्न करने का दिन
वैशाख पूर्णिमा के दिन, मृत्यु के देवता धर्मराज की कृपा पाने के लिए व्रत रखना और दान करना चाहिए। इस दिन जल से भरा कलश, छाता, जूते, पंखा, सत्तू और पकवान आदि देना बहुत शुभ माना जाता है। धर्मराज की कृपा से व्यक्ति को अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता और दान गोदान के समान फल देता है। नारद पुराण कहता है कि इस दिन जितना अधिक दान किया जाए, उतने ही अधिक शुभ फल मिलेंगे।
बुद्ध के चार आर्य सिद्धांत
बुद्ध पूर्णिमा पर भगवान बुद्ध के जीवन की तीन प्रमुख घटनाओं का स्मरण किया जाता है: जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण। उन्हें चार आर्य सत्य बताए गए: पहला है दुःख, दूसरा है दुःख का कारण, तीसरा है दुःख से मुक्ति का अवसर और चौथा है दुःख से मुक्ति का रास्ता। उन्होंने सम्यक दृष्टि, संकल्प, वाक, कर्म, आजीव, प्रयास, स्मृति और समाधि को दुःख से छुटकारा पाने का उपाय बताया। उनका दावा था कि मांसाहार ही नहीं, बल्कि क्रोध, द्वेष, छल-कपट, ईर्ष्या और निंदा भी मनुष्य को अपवित्र बनाता है।
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