युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को एबी डिविलियर्स ने टेस्ट क्रिकेट में खुद को साबित करने की चुनौती दी है, जिस पर उनके कोच ने बड़ा बयान देते हुए सफलता के दो अहम मंत्र बताए हैं।
भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी इन दिनों लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। बेहद कम उम्र में अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी और आत्मविश्वास से क्रिकेट जगत का ध्यान खींचने वाले वैभव को लेकर अब दक्षिण अफ्रीका के दिग्गज बल्लेबाज एबी डिविलियर्स का बड़ा बयान सामने आया है। डिविलियर्स ने वैभव की प्रतिभा की जमकर तारीफ की, लेकिन साथ ही उन्हें टेस्ट क्रिकेट में खुद को साबित करने की चुनौती भी दे डाली। अब इस बयान पर वैभव के कोच मनीष ओझा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि उनका शिष्य इस चुनौती पर पूरी तरह खरा उतर सकता है।
एबी डिविलियर्स ने क्यों दी चुनौती?
क्रिकेट जगत में मिस्टर 360 डिग्री के नाम से मशहूर एबी डिविलियर्स ने एक बातचीत के दौरान कहा कि वैभव सूर्यवंशी की मौजूदा बल्लेबाजी शानदार है और इतनी कम उम्र में उनका आत्मविश्वास प्रभावित करता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि किसी खिलाड़ी की असली परीक्षा टेस्ट क्रिकेट में होती है। छोटा प्रारूप खिलाड़ियों को तेजी से रन बनाने का मौका देता है, लेकिन लंबे प्रारूप में धैर्य, तकनीक, मानसिक मजबूती और फिटनेस की असली परीक्षा होती है।
डिविलियर्स ने कहा कि वह वैभव को लाल गेंद क्रिकेट में खेलते देखने के लिए उत्साहित हैं क्योंकि वहीं पता चलेगा कि खिलाड़ी कितना परिपक्व और तकनीकी रूप से मजबूत है।
कोच ने जताया पूरा भरोसा
वैभव सूर्यवंशी के कोच मनीष ओझा ने एबी डिविलियर्स के बयान का स्वागत करते हुए कहा कि यह वैभव के लिए बड़ी प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि लोग केवल उनकी आक्रामक बल्लेबाजी देखते हैं, लेकिन घरेलू क्रिकेट में वैभव ने लंबे प्रारूप में भी कई महत्वपूर्ण पारियां खेली हैं। उनके पास तकनीक भी है और मानसिक मजबूती भी।
कोच के अनुसार वैभव केवल बड़े शॉट खेलने वाले बल्लेबाज नहीं हैं, बल्कि परिस्थिति के अनुसार बल्लेबाजी करना भी जानते हैं। उन्होंने कहा कि टेस्ट क्रिकेट में सफल होने के लिए वैभव को दो अहम बातों पर लगातार मेहनत करनी होगी।
कोच ने बताए सफलता के दो गुरुमंत्र
मनीष ओझा ने कहा कि वैभव को सबसे पहले गेंद छोड़ने की कला पर और ज्यादा काम करना होगा। टेस्ट क्रिकेट में हर गेंद पर शॉट खेलना जरूरी नहीं होता। सही गेंद का इंतजार करना और धैर्य बनाए रखना सबसे बड़ी कला होती है। उन्होंने कहा कि वैभव में यह क्षमता पहले से मौजूद है, लेकिन इसे और मजबूत बनाने की जरूरत है।
दूसरा अहम मंत्र फिटनेस को लेकर दिया गया। कोच ने कहा कि लंबे प्रारूप में शरीर और दिमाग दोनों की परीक्षा होती है। लगातार कई घंटों तक बल्लेबाजी करने के लिए बेहतरीन फिटनेस बेहद जरूरी है। यदि वैभव अपनी फिटनेस को और बेहतर बनाए रखते हैं, तो वह आने वाले समय में भारतीय क्रिकेट का बड़ा नाम बन सकते हैं।
also read : रणवीर सिंह की ‘धुरंधर 2’ अब घर बैठे देख सकेंगे दर्शक, डिजिटल प्रदर्शन से पहले 1800 करोड़ क्लब के करीब पहुंची फिल्म
घरेलू क्रिकेट में पहले ही दिखा चुके हैं दम
वैभव सूर्यवंशी ने घरेलू स्तर पर लाल गेंद क्रिकेट में भी शानदार प्रदर्शन किया है। उन्होंने कई मौकों पर लंबी पारियां खेलकर यह साबित किया है कि वह केवल छोटे प्रारूप के बल्लेबाज नहीं हैं। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी तकनीक और शॉट चयन उन्हें भविष्य में तीनों प्रारूपों का सफल खिलाड़ी बना सकता है।
उनकी बल्लेबाजी में आक्रामकता के साथ-साथ संयम भी दिखाई देता है, जो किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यही कारण है कि क्रिकेट जगत के बड़े नाम अब वैभव को भारतीय क्रिकेट का भविष्य मानने लगे हैं।
युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन रहे वैभव
कम उम्र में मिली सफलता के बावजूद वैभव सूर्यवंशी का व्यवहार और मेहनत उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाती है। क्रिकेट विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वह इसी तरह अनुशासन और मेहनत बनाए रखते हैं, तो आने वाले वर्षों में भारतीय टीम के लिए अहम भूमिका निभा सकते हैं।
एबी डिविलियर्स जैसे महान बल्लेबाज का बयान यह भी दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट जगत की नजर अब भारतीय युवा प्रतिभाओं पर लगातार बनी हुई है। वैभव के लिए यह समय सीखने, खुद को निखारने और बड़े मंच पर अपनी पहचान मजबूत करने का है।
आने वाले समय पर टिकी नजरें
क्रिकेट प्रशंसकों को अब वैभव सूर्यवंशी के टेस्ट क्रिकेट सफर का इंतजार रहेगा। जिस तरह उन्होंने छोटे प्रारूप में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है, उसी तरह लंबे प्रारूप में भी उनसे बड़ी उम्मीदें लगाई जा रही हैं। यदि वह अपने कोच के बताए दोनों मंत्रों पर काम करते हैं, तो वह एबी डिविलियर्स की चुनौती को ही नहीं, बल्कि दुनिया के बड़े गेंदबाजों को भी जवाब देने में सफल हो सकते हैं।

