ऊना के जोल क्षेत्र में आलू की फसल पर सुंडी का प्रकोप बढ़ा। जमीन के अंदर से पौधों को नुकसान पहुंचने पर किसानों की चिंता बढ़ी, जानें कृषि विभाग की सलाह।
हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में आलू की फसल पर सुंडी के हमले से किसानों की चिंता बढ़ गई है। जोल उपतहसील के चकसराय और आसपास के गांवों में खेतों के भीतर आलू के पौधे अचानक सूखने लगे हैं। पौधों की जांच करने पर मिट्टी के अंदर मौजूद सुंडी तने के पास से उन्हें काटती हुई मिली। कृषि विभाग ने प्रभावित किसानों को फसल की स्थिति के अनुसार उचित उपचार करने और दवाओं के इस्तेमाल से पहले विशेषज्ञों की सलाह लेने को कहा है।
ऊना में आलू की फसल को नुकसान, खेतों में सूख रहे पौधे
ऊना जिले के जोल क्षेत्र में आलू की खेती करने वाले किसानों को इस सीजन में नई परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। चकसराय और आसपास के गांवों में गुरुवार सुबह कई किसानों ने खेतों में आलू के पौधों को सूखा हुआ देखा। शुरुआत में पौधों के सूखने की वजह स्पष्ट नहीं थी, लेकिन जब किसानों ने पौधों को उखाड़कर जांच की, तो मिट्टी के भीतर सुंडी की मौजूदगी सामने आई।
यह कीट पौधों के तने के निचले हिस्से को काटकर नुकसान पहुंचा रहा है। इसके कारण खेत में ऊपर से सामान्य दिखने वाले पौधे भी अचानक सूख सकते हैं। इस समस्या ने आलू उत्पादकों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि शुरुआती अवस्था में नुकसान का पता लगाना आसान नहीं होता।
मिट्टी के भीतर छिपा कीट बढ़ा रहा किसानों की मुश्किलें
आलू की फसल में जमीन के अंदर सक्रिय कीटों की पहचान अक्सर तब होती है, जब पौधों में सूखने के लक्षण दिखाई देने लगते हैं। तने और जड़ के आसपास नुकसान होने से पौधे की बढ़वार प्रभावित हो सकती है और गंभीर स्थिति में फसल की पैदावार पर भी असर पड़ सकता है।
किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती समय रहते प्रभावित पौधों की पहचान करना है। खेत में सूखे पौधे दिखाई देने पर उनके आसपास की मिट्टी और स्वस्थ नजर आ रहे पौधों की भी जांच करना जरूरी है, ताकि कीट के प्रकोप की वास्तविक स्थिति का पता लगाया जा सके।
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कृषि विभाग ने दवाओं के इस्तेमाल पर दी सलाह
ऊना के कृषि विकास अधिकारी पवन कुमार के अनुसार, विभाग की ओर से प्रभावित खेतों के लिए एम-45, कार्बेन्डाजिम और क्लोरोपायरीफॉस जैसी दवाओं के इस्तेमाल की सलाह दी गई है। हालांकि, इन उत्पादों का उपयोग फसल में समस्या की सही पहचान, स्वीकृत उपयोग और निर्धारित मात्रा के अनुसार ही किया जाना चाहिए।
किसानों को सलाह दी गई है कि वे किसी भी दवा का छिड़काव करने से पहले नजदीकी कृषि विभाग कार्यालय से संपर्क करें। मिट्टी के अंदर रहने वाले कीटों पर नियंत्रण के लिए केवल सामान्य छिड़काव पर्याप्त हो, यह जरूरी नहीं है। इसलिए कीट की सही पहचान और उपयुक्त उपचार का चुनाव महत्वपूर्ण है।
बारिश के कारण पहले ही प्रभावित हुई थी आलू की बिजाई
बैरियां गांव के किसान प्रेम चंद के मुताबिक, इस बार बिजाई के समय बारिश होने से कुछ खेतों में आलू के पौधों का अंकुरण और शुरुआती बढ़वार प्रभावित हुई थी। अब फसल निकलने के बाद सुंडी के हमले ने किसानों की परेशानियां और बढ़ा दी हैं।
किसानों को चिंता है कि यदि समय रहते प्रकोप पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में फसल को और नुकसान हो सकता है। मौसम में बदलाव की आशंका भी उनकी चिंता बढ़ा रही है।
इसी गांव के किसान मुनीश कुमार ने बताया कि पौधों के सूखने की वजह सामने आने के बाद किसान कृषि विभाग से संपर्क कर रहे हैं। किसान विभागीय सलाह के आधार पर उपचार करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि कीट का असर शुरुआती चरण में ही रोका जा सके।
आलू की पैदावार पर पड़ सकता है असर
ऊना जिले में आलू की खेती कई किसानों की आय का महत्वपूर्ण स्रोत है। ऐसे में बिजाई के समय बारिश और अब कीटों के प्रकोप ने इस सीजन की खेती को चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
आलू की फसल की बढ़वार के दौरान पौधों के तने और जड़ों को नुकसान पहुंचने से उनकी सामान्य वृद्धि प्रभावित हो सकती है। यदि बड़ी संख्या में पौधे सूखते हैं, तो उत्पादन में कमी आने की आशंका रहती है। हालांकि, वास्तविक नुकसान का आकलन प्रभावित क्षेत्र, कीट की संख्या और फसल की स्थिति के आधार पर ही किया जा सकता है।
किसानों को खेतों की नियमित निगरानी करने की सलाह
कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार, किसानों को खेतों का नियमित निरीक्षण करना चाहिए। जहां पौधे अचानक सूख रहे हों, वहां पौधों के निचले हिस्से और आसपास की मिट्टी की जांच करना उपयोगी हो सकता है।
किसानों को इन बातों का ध्यान रखना चाहिए:
- सूखे और मुरझाए पौधों की जांच कर नुकसान की वजह पहचानें।
- प्रभावित पौधों के आसपास के क्षेत्र की भी निगरानी करें।
- कीट की पहचान के बिना मनमाने ढंग से कीटनाशकों का इस्तेमाल न करें।
- कृषि विभाग से दवा की सही मात्रा, उपयोग विधि और सुरक्षा संबंधी निर्देश प्राप्त करें।
- दवाओं के लेबल पर दिए गए निर्देशों और फसल संबंधी स्वीकृत उपयोग का पालन करें।
समय पर नियंत्रण से फसल को बचाने की उम्मीद
ऊना के आलू किसानों के लिए फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण कदम कीट के प्रकोप की समय पर पहचान और उचित उपचार है। प्रभावित खेतों की निगरानी, कृषि विशेषज्ञों की सलाह और सही नियंत्रण उपायों से आगे होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है।
जोल क्षेत्र के किसानों को उम्मीद है कि समय रहते समस्या पर काबू पा लिया जाएगा, जिससे आलू की आने वाली उपज पर इसका प्रभाव सीमित रखा जा सकेगा।

