छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के किसान मुकंदर सिंह ने डेढ़ एकड़ में अदरक और मेड़ों पर अरहर की खेती अपनाई। जानें कृषक उन्नति योजना और कमाई बढ़ाने का तरीका।
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के एक किसान ने पारंपरिक धान की खेती से आगे बढ़कर फसल विविधीकरण की मिसाल पेश की है। दरिमा गांव के किसान मुकंदर सिंह ने करीब डेढ़ एकड़ जमीन पर अदरक की खेती की है। साथ ही, खेतों की मेड़ों पर अरहर लगाकर उपलब्ध जमीन का बेहतर इस्तेमाल करने की पहल की है। इस प्रयोग से उन्हें दो फसलों से उत्पादन मिलने और आमदनी के अतिरिक्त अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
छत्तीसगढ़ में किसानों की आय बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए वैकल्पिक फसलों को अपनाने पर जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित कर रही है। इसी दिशा में सरगुजा जिले के मुकंदर सिंह ने कृषि विभाग की सलाह से अपनी खेती के तरीके में बदलाव किया है।
धान छोड़कर अदरक की खेती करने का लिया फैसला
अम्बिकापुर विकासखंड के दरिमा गांव निवासी मुकंदर सिंह, पिता बरातु सिंह, पहले अपने खेत में धान की खेती करते थे। इस खरीफ सीजन में उन्होंने कुछ अलग करने का निर्णय लिया। दरिमा समिति में कृषि विभाग के अधिकारियों से चर्चा के दौरान उन्हें फसल विविधीकरण के फायदे और धान के स्थान पर दूसरी फसलें उगाने की संभावनाओं के बारे में जानकारी मिली।
अधिकारियों ने उन्हें दलहन, तिलहन और अन्य वैकल्पिक फसलों की खेती के बारे में बताया। इसके अलावा, कृषक उन्नति योजना के तहत निर्धारित शर्तों के अनुसार मिलने वाली प्रोत्साहन राशि की जानकारी भी दी गई।
कृषि विभाग से मिली सलाह के बाद मुकंदर सिंह ने पिछले साल धान की खेती वाली जमीन पर इस बार अदरक लगाने का फैसला किया। उन्होंने खाली पड़ी मेड़ों का उपयोग भी किया और वहां अरहर के बीज बोए। इस तरह उन्होंने एक ही खेत में मुख्य फसल के साथ अतिरिक्त फसल उगाने की दिशा में कदम बढ़ाया।
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अदरक के साथ अरहर की खेती, दोनों फसलों की बढ़वार अच्छी
मुकंदर सिंह ने लगभग डेढ़ एकड़ कृषि भूमि पर अदरक की फसल लगाई है। इसके साथ ही कृषि विभाग से मिले अरहर के बीजों को खेत की मेड़ों पर बोया है। इस तरीके से उन्होंने खेत के उन हिस्सों का भी उपयोग किया, जो सामान्य तौर पर मुख्य फसल की खेती में इस्तेमाल नहीं होते।
किसान के मुताबिक, फिलहाल अदरक और अरहर दोनों फसलों की स्थिति अच्छी है। फसलों की बेहतर बढ़वार देखकर उन्हें इस सीजन में अच्छी पैदावार की उम्मीद है।
पहले जिस खेत से उन्हें केवल धान की उपज मिलती थी, अब वहां अदरक के साथ अरहर का उत्पादन मिलने की संभावना है। इससे परिवार की आमदनी बढ़ाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, वास्तविक कमाई दोनों फसलों की पैदावार, बाजार में मिलने वाले भाव और खेती की लागत पर निर्भर करेगी।
कृषक उन्नति योजना के तहत प्रति एकड़ 15 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि
मुकंदर सिंह के अनुसार, कृषि विभाग के अधिकारियों ने उन्हें जानकारी दी थी कि कृषक उन्नति योजना के तहत निर्धारित वैकल्पिक फसलों की खेती करने पर पात्र किसानों को प्रति एकड़ 15,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि मिल सकती है।
योजना से जुड़ी इस जानकारी ने उन्हें पारंपरिक धान की खेती के बजाय दूसरी फसल अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। उनका मानना है कि खेती में नए प्रयोग करते समय किसानों के सामने उत्पादन, लागत और संभावित मुनाफे को लेकर कई सवाल होते हैं। ऐसी स्थिति में सरकारी योजनाओं की जानकारी और कृषि विशेषज्ञों का मार्गदर्शन किसानों का भरोसा बढ़ा सकता है।
किसान को उम्मीद है कि योजना के निर्धारित नियमों और पात्रता के अनुरूप उन्हें भी इसका लाभ मिलेगा। प्रोत्साहन राशि की वास्तविक उपलब्धता संबंधित सरकारी प्रावधानों और पात्रता पर निर्भर करेगी।
किसान मुकंदर सिंह ने बताया खेती में बदलाव का अनुभव
मुकंदर सिंह ने बताया कि पिछले वर्ष उन्होंने अपने खेत में धान लगाया था, लेकिन इस बार कृषि विभाग की सलाह पर करीब डेढ़ एकड़ में अदरक की खेती की है। खेत की मेड़ों पर अरहर भी लगाई गई है और इसके लिए कृषि विभाग से बीज मिले हैं।
उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में दोनों फसलें अच्छी स्थिति में हैं और वे अपने इस प्रयोग से उत्साहित हैं। धान के स्थान पर वैकल्पिक फसल अपनाने तथा योजना के तहत प्रोत्साहन राशि की जानकारी मिलने से उन्हें खेती में बदलाव करने का हौसला मिला।
मुकंदर सिंह ने किसानों के हित में चलाई जा रही योजनाओं के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार भी व्यक्त किया।
फसल विविधीकरण से खेती को अधिक लाभकारी बनाने की कोशिश
फसल विविधीकरण किसानों को एक ही फसल पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग फसलों के विकल्प अपनाने का अवसर देता है। दलहन, तिलहन और अन्य वैकल्पिक फसलों की खेती से कृषि भूमि का बेहतर उपयोग करने और आमदनी के नए स्रोत विकसित करने की संभावनाएं बन सकती हैं।
खेतों की मेड़ों पर अरहर जैसी फसल उगाने से उपलब्ध जगह का अतिरिक्त उपयोग भी किया जा सकता है। हालांकि, किसानों को किसी भी नई फसल की बुआई से पहले अपने क्षेत्र की जलवायु, मिट्टी, पानी की उपलब्धता, उत्पादन लागत और बाजार की मांग का आकलन करना चाहिए।
सरगुजा जिले के मुकंदर सिंह का प्रयोग बताता है कि कृषि विभाग की सलाह और योजनाओं की जानकारी किसानों को खेती के नए विकल्प तलाशने के लिए प्रेरित कर सकती है। अब उनकी नजर अदरक और अरहर की पैदावार पर है। यदि उत्पादन और बाजार से अनुकूल परिणाम मिलते हैं, तो यह प्रयोग उनके लिए अतिरिक्त कमाई का जरिया बन सकता है और दूसरे किसानों को भी फसल विविधीकरण अपनाने की प्रेरणा दे सकता है।

