खंडवा कृषि विभाग ने किसानों से नरवाई न जलाने की अपील की है। सुपर सीडर, मल्चर, बेलर और SMS से फसल अवशेषों का प्रबंधन करें।
मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में कम बारिश के कारण जल संकट की स्थिति को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे खरीफ फसल की कटाई के बाद खेतों में बची नरवाई यानी फसल अवशेषों को न जलाएं। इसके बजाय सुपर सीडर, मल्चर, बेलर और स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम (SMS) जैसे आधुनिक कृषि उपकरणों का उपयोग करें।
कृषि विभाग के अनुसार, खरीफ फसलों की कटाई के बाद अब गेहूं और चना जैसी रबी फसलों की बुवाई का समय नजदीक आ रहा है। इस दौरान खेतों को जल्दी साफ करने के लिए नरवाई जलाने की घटनाएं बढ़ने की आशंका रहती है। इससे मिट्टी की गुणवत्ता, पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
नरवाई जलाने से मिट्टी और पर्यावरण को नुकसान
कृषि विभाग ने बताया कि खेतों में फसल अवशेष जलाने से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होती है। आग के कारण मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्म जीव नष्ट हो सकते हैं और मिट्टी की नमी को भी नुकसान पहुंचता है। इसके अलावा, धुएं से वायु प्रदूषण बढ़ता है, जिसका असर जनस्वास्थ्य पर पड़ सकता है।
विभाग ने किसानों को आगाह किया है कि नरवाई जलाना हानिकारक होने के साथ दंडनीय भी है। ऐसे में किसानों को फसल अवशेषों को नष्ट करने के बजाय उनका उचित प्रबंधन करना चाहिए, ताकि मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहे और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके।
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सुपर सीडर और मल्चर से करें नरवाई का प्रबंधन
किसानों को जागरूक करने के लिए कृषि विभाग ने चार विशेष जागरूकता पोस्टर तैयार किए हैं। इनके जरिए फसल अवशेषों के सुरक्षित और उपयोगी प्रबंधन के तरीकों की जानकारी दी जा रही है।
पोस्टरों में मुख्य रूप से इन संदेशों पर जोर दिया गया है:
- जल संकट में सुपर सीडर: नमी का रक्षक, समृद्धि का आधार।
- नरवाई में आग न लगाएं: मल्चर अपनाकर फसल अवशेषों का प्रबंधन करें।
- नरवाई नहीं, संसाधन है: बेलर की मदद से पराली का उचित प्रबंधन करें।
- कंबाइन हार्वेस्टर के साथ SMS अपनाएं: स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम की मदद से फसल अवशेषों को खेत में बेहतर तरीके से संभालें।
इन संदेशों के माध्यम से किसानों को पारंपरिक तरीके से नरवाई जलाने के बजाय आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
कम पानी में खेती के लिए उपयोगी हैं आधुनिक कृषि यंत्र
खंडवा के सहायक कृषि यंत्री के अनुसार, सुपर सीडर, मल्चर, बेलर और एसएमएस युक्त कंबाइन हार्वेस्टर का उपयोग फसल अवशेषों के प्रबंधन में मददगार हो सकता है। इन तकनीकों से खेतों में बची नरवाई का बेहतर उपयोग किया जा सकता है और मिट्टी की नमी को संरक्षित रखने में सहायता मिल सकती है।
सुपर सीडर की मदद से फसल अवशेषों वाले खेत में बुवाई की जा सकती है, जबकि मल्चर अवशेषों को छोटे टुकड़ों में काटने में मदद करता है। बेलर के जरिए पराली को इकट्ठा कर गांठों में बदला जा सकता है। वहीं, एसएमएस युक्त कंबाइन हार्वेस्टर फसल कटाई के दौरान अवशेषों को बेहतर ढंग से फैलाने में सहायक होता है।
कृषि विभाग की किसानों से अपील
कृषि विभाग ने किसानों से आग्रह किया है कि वे नरवाई जलाने से बचें और फसल अवशेषों को कृषि संसाधन के रूप में इस्तेमाल करें। इससे मिट्टी की उर्वरता और नमी बनाए रखने में मदद मिल सकती है। साथ ही, वायु प्रदूषण को कम करने और पर्यावरण की सुरक्षा में भी योगदान मिलेगा।
कम वर्षा और जल संकट की परिस्थितियों में फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन अपनाना खेती को अधिक टिकाऊ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

