केरल के जोसेफ केएस ने बैंक से रिटायरमेंट के बाद पथरीली जमीन पर ड्रैगन फ्रूट उगाया। आज 10 एकड़ में खेती और 50 लाख रुपये का सालाना कारोबार है।
केरल के एक किसान ने अपनी पथरीली जमीन को कमाई का बड़ा जरिया बना दिया है। बैंक की नौकरी से रिटायर होने के बाद जोसेफ केएस ने पारंपरिक रबर की खेती छोड़कर ड्रैगन फ्रूट उगाना शुरू किया। आधे एकड़ में 200 पौधों से शुरू हुआ उनका सफर आज 10 एकड़ तक पहुंच चुका है। अब उनके खेत में करीब 20,000 पौधे हैं और सालाना कारोबार लगभग 50 लाख रुपये तक पहुंच गया है।
रिटायरमेंट के बाद खेती में आजमाया नया प्रयोग
केरल के रन्नी क्षेत्र के अथिक्कायम गांव के रहने वाले जोसेफ केएस पहले बैंक में काम करते थे। वर्ष 2016 में सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने अपनी कृषि भूमि पर कुछ अलग करने का फैसला किया। उनकी जमीन पथरीली थी और रबर की खेती से अपेक्षित मुनाफा नहीं मिल रहा था।
ऐसे में उन्होंने खेती का तरीका बदलने का निर्णय लिया और ड्रैगन फ्रूट के पौधे लगाने शुरू किए। शुरुआत में उन्होंने आधे एकड़ जमीन पर केवल 200 पौधे लगाए। पहले साल इस खेती से लगभग 50,000 रुपये की कमाई हुई।
हालांकि, जोसेफ ने शुरुआती कम आमदनी से निराश होने के बजाय अपने अनुभव से सीखना जारी रखा। धीरे-धीरे उन्होंने पौधों की संख्या बढ़ाई और खेती का विस्तार किया। आज उनका ड्रैगन फ्रूट फार्म लगभग 10 एकड़ में फैला हुआ है।
200 पौधों से 20 हजार पौधों तक पहुंचा सफर
जोसेफ के खेत में अब करीब 5,000 कंक्रीट के खंभे लगाए गए हैं, जिनके सहारे लगभग 20,000 ड्रैगन फ्रूट के पौधे विकसित हो रहे हैं। इस तरह उन्होंने सीमित स्तर पर शुरू किए गए प्रयोग को बड़े कृषि व्यवसाय में बदल दिया।
ड्रैगन फ्रूट की खेती चुनने के पीछे उनकी जमीन की प्रकृति भी एक अहम कारण थी। पथरीली भूमि पर रबर की खेती से बेहतर परिणाम नहीं मिलने के कारण उन्होंने ऐसी फसल की तलाश की, जिसे अपेक्षाकृत कम उपजाऊ जमीन पर भी उगाया जा सके।
ड्रैगन फ्रूट कैक्टस परिवार का फलदार पौधा है। इसकी शाखाओं को बढ़ने के लिए मजबूत सहारे की जरूरत होती है। उचित जल निकासी, सही देखभाल और अनुकूल मौसम मिलने पर इसकी खेती कई तरह की जमीनों में की जा सकती है।
40 टन उत्पादन से 50 लाख रुपये तक पहुंचा कारोबार
जोसेफ के मुताबिक, पिछले साल उनके खेत में लगभग 40 टन ड्रैगन फ्रूट का उत्पादन हुआ। तैयार फल 125 से 130 रुपये प्रति किलो के भाव पर बेचे गए। इस उत्पादन और बिक्री के आधार पर उनका सालाना कारोबार करीब 50 लाख रुपये तक पहुंच गया।
उनका कहना है कि खेत के कई पौधे अभी पूरी तरह उत्पादन देने की अवस्था में नहीं पहुंचे हैं। ऐसे में आने वाले वर्षों में उत्पादन बढ़ने की संभावना है। जोसेफ को उम्मीद है कि अनुकूल परिस्थितियों में उनका फार्म भविष्य में सालाना करीब 100 टन फल उत्पादन के लक्ष्य तक पहुंच सकता है।
हालांकि, वास्तविक उत्पादन पौधों की उम्र, मौसम, खेती के प्रबंधन और बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
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स्थानीय बाजार से खाड़ी देशों तक पहुंच रहे फल
जोसेफ के खेत में तैयार होने वाले ड्रैगन फ्रूट की बिक्री मुख्य रूप से केरल के थोक व्यापारियों के माध्यम से होती है। इसके बाद निर्यातक इस फल को खाड़ी देशों के बाजारों तक पहुंचाते हैं।
इस बाजार व्यवस्था से उनके उत्पाद को स्थानीय बिक्री के अलावा अंतरराष्ट्रीय मांग से जुड़ने का अवसर भी मिलता है। अच्छी गुणवत्ता बनाए रखना इस कारोबार का महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि फल की बाहरी स्थिति और ताजगी उसके बाजार मूल्य को प्रभावित करती है।
फल तोड़ने के बाद उसकी छंटाई, ग्रेडिंग और पैकिंग पर विशेष ध्यान दिया जाता है। ड्रैगन फ्रूट का छिलका आसानी से चोटिल हो सकता है, इसलिए उसे सावधानी से संभालना जरूरी होता है। सही पैकिंग से लंबी दूरी के परिवहन के दौरान फल की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिलती है।
12 लोगों को मिला रोजगार
ड्रैगन फ्रूट की खेती के विस्तार के साथ जोसेफ के फार्म पर रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। वर्तमान में उनके यहां लगभग 12 लोग नियमित रूप से काम करते हैं।
इन कर्मचारियों की जिम्मेदारियों में पौधों की देखभाल, फल की तुड़ाई, छंटाई और पैकिंग जैसे काम शामिल हैं। इस तरह उनका कृषि व्यवसाय केवल उनकी अपनी आमदनी तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार का माध्यम भी बना है।
साफ-सफाई और उचित देखभाल से रखते हैं पौधों को स्वस्थ
जोसेफ खेती में साफ-सफाई और पौधों के आसपास उचित वातावरण बनाए रखने पर जोर देते हैं। उनका मानना है कि खेत की नियमित निगरानी और स्वच्छता से कीटों तथा रोगों से जुड़ी समस्याओं को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
पौधों के बीच हवा और रोशनी का पर्याप्त प्रवाह बनाए रखना भी उनकी खेती की देखभाल का हिस्सा है। इसके साथ ही, पौधों की स्थिति पर नजर रखना और जरूरत के अनुसार उचित कृषि उपाय अपनाना जरूरी होता है।
शुरुआती दौर में उन्हें ड्रैगन फ्रूट की खेती से जुड़ी कई तकनीकी बातें खुद अनुभव से सीखनी पड़ीं। उस समय उनके आसपास इस फल की खेती करने वाले किसान कम थे, इसलिए पौधों की देखभाल, खाद और पानी के प्रबंधन को समझने में समय लगा।
लगातार अनुभव हासिल करने के साथ उन्होंने खेती की तकनीकों में सुधार किया और अपने फार्म का विस्तार किया।
पथरीली जमीन पर भी संभव है ड्रैगन फ्रूट की खेती
ड्रैगन फ्रूट की खेती में पौधों को मजबूत खंभों का सहारा दिया जाता है। इसकी लंबी शाखाएं इन खंभों पर फैलती हैं और उचित प्रबंधन के साथ एक सहारे पर कई शाखाएं विकसित की जा सकती हैं।
यह फसल अपेक्षाकृत कम पानी में भी उगाई जा सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इसे सिंचाई की जरूरत नहीं होती। पौधों की अच्छी वृद्धि और फल उत्पादन के लिए संतुलित सिंचाई, जल निकासी और मिट्टी की स्थिति का ध्यान रखना जरूरी है।
जोसेफ की सफलता दिखाती है कि खेती में फसल का चयन जमीन की प्रकृति, बाजार की मांग और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर किया जाए, तो सीमित संभावनाओं वाली भूमि भी लाभदायक व्यवसाय का आधार बन सकती है।
बैंक की नौकरी से सफल किसान बनने तक की प्रेरक कहानी
जोसेफ केएस की यात्रा उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जो पारंपरिक खेती से कम मुनाफा मिलने के कारण नए विकल्प तलाश रहे हैं। उन्होंने अपनी पथरीली जमीन को समस्या मानने के बजाय उपलब्ध संसाधनों के अनुसार फसल का चुनाव किया।
आधे एकड़ से शुरू हुआ उनका प्रयास अब 10 एकड़ के फार्म और लगभग 50 लाख रुपये के सालाना कारोबार तक पहुंच चुका है। आने वाले समय में उत्पादन बढ़ाने की उनकी योजना इस व्यवसाय की आगे बढ़ने की संभावनाओं को दर्शाती है।
उनकी कहानी का मुख्य संदेश यही है कि खेती में सफलता के लिए सही फसल का चुनाव, लगातार सीखने की इच्छा, गुणवत्ता पर ध्यान और बाजार की समझ महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

