धान में बालियां निकलने पर सिंचाई, खाद और कीट नियंत्रण का ध्यान रखें। जानें कृषि वैज्ञानिक की सलाह और बोरान छिड़काव से जुड़ी जरूरी बातें।
धान की खेती में बालियां निकलने और फूल आने का चरण पैदावार तय करने में अहम भूमिका निभाता है। इस दौरान पानी की कमी, पोषक तत्वों का असंतुलन और कीटों का हमला फसल को नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे में किसानों को सिंचाई, पोषण और कीट नियंत्रण पर विशेष ध्यान देना चाहिए। गोंडा के कृषि वैज्ञानिक डॉ. हरिपाल सिंह ने धान की इस महत्वपूर्ण अवस्था में फसल की देखभाल से जुड़ी जरूरी सलाह दी है।
धान में बालियां निकलने पर करें ये 3 काम
धान की फसल में अच्छी पैदावार के लिए बालियां निकलने और फूल आने के समय उचित प्रबंधन जरूरी है। किसानों को मुख्य रूप से इन तीन बातों पर ध्यान देना चाहिए।
1. खेत में बनाए रखें पर्याप्त नमी
धान में बालियां निकलने और फूल आने के दौरान खेत की मिट्टी में पर्याप्त नमी रहना जरूरी है। पानी की कमी होने पर पौधों के विकास और दानों के बनने की प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है।
दीनदयाल शोध संस्थान कृषि विज्ञान केंद्र, गोपालग्राम के कृषि वैज्ञानिक डॉ. हरिपाल सिंह के अनुसार, किसानों को इस अवस्था में खेत को पूरी तरह सूखने नहीं देना चाहिए। हालांकि, लंबे समय तक जरूरत से ज्यादा पानी जमा रहने से भी बचना चाहिए। खेत की मिट्टी और फसल की स्थिति को देखते हुए सिंचाई का प्रबंधन करना बेहतर रहता है।
काला नमक और सांभा मंसूरी जैसी पछेती धान की किस्मों में बालियां निकलने के समय विशेष निगरानी की जरूरत होती है।
2. फसल की जरूरत के अनुसार दें पोषक तत्व
बालियां निकलने और फूल आने के समय धान की फसल को पोषक तत्वों की जरूरत होती है। इस दौरान नाइट्रोजन की उपलब्धता पौधों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कृषि वैज्ञानिक के मुताबिक, पछेती धान की फसल में जरूरत के अनुसार यूरिया का इस्तेमाल किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि लगभग एक बीघा खेत में 5 से 6 किलोग्राम नाइट्रोजन की जरूरत हो सकती है। हालांकि, उर्वरक की वास्तविक मात्रा मिट्टी की उर्वरता, फसल की अवस्था और पहले दिए गए खाद की मात्रा के आधार पर तय करनी चाहिए।
किसान खेत में अच्छी तरह सड़ी गोबर की खाद और अन्य उपयुक्त जैविक सामग्री का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। नीम की खली का उपयोग भी स्थानीय कृषि सलाह और खेती की जरूरत के अनुसार किया जा सकता है।
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3. कीटों की निगरानी करें और जरूरत पर ही करें नियंत्रण
धान में बालियां निकलने के समय कीटों का प्रकोप फसल की गुणवत्ता और उत्पादन को प्रभावित कर सकता है। इस दौरान गंधी कीट पर विशेष नजर रखने की सलाह दी जाती है।
किसानों को नियमित रूप से खेत का निरीक्षण करना चाहिए। यदि पौधों या बालियों पर कीट दिखाई दें अथवा नुकसान के लक्षण मिलें, तो कृषि विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।
बिना सही पहचान के कीटनाशक का इस्तेमाल करने या उसकी मात्रा बढ़ाने से बचें। जरूरत पड़ने पर स्थानीय कृषि विभाग की सलाह के अनुसार ही उपयुक्त कीटनाशक और उसकी निर्धारित मात्रा का उपयोग करें।
धान में बोरान का छिड़काव कब करें?
कृषि वैज्ञानिक डॉ. हरिपाल सिंह के अनुसार, धान में बालियां निकलने की शुरुआत के समय बोरान का छिड़काव करने से बालियों के विकास और दानों की गुणवत्ता में मदद मिल सकती है। खासकर काला नमक धान की खेती करने वाले किसानों को इस अवस्था में फसल की पोषण संबंधी जरूरतों पर ध्यान देना चाहिए।
बताई गई सलाह के अनुसार, 15 लीटर पानी में करीब 35 ग्राम बोरान मिलाकर छिड़काव करने की जानकारी दी गई है। हालांकि, बोरान की सही मात्रा उसके फॉर्मूलेशन, उत्पाद की सांद्रता और फसल की वास्तविक जरूरत पर निर्भर करती है। इसलिए छिड़काव से पहले उत्पाद के लेबल और कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार मात्रा की पुष्टि जरूर करें। जरूरत से ज्यादा बोरान देने से फसल को नुकसान भी हो सकता है।
दानों की अच्छी भराई के लिए इन बातों का रखें ध्यान
धान की बालियां निकलने के बाद फसल की नियमित देखभाल करना जरूरी है। किसान खेत में नमी की स्थिति देखते रहें, पोषक तत्वों का संतुलित इस्तेमाल करें और कीटों की मौजूदगी पर नजर रखें।
खाद या सूक्ष्म पोषक तत्वों का उपयोग बिना जरूरत नहीं करना चाहिए। मिट्टी की जांच और फसल की अवस्था के आधार पर पोषण प्रबंधन करने से अनावश्यक खर्च से बचने में मदद मिल सकती है।
किसानों के लिए सलाह: धान की फसल में बालियां निकलने का समय बेहद संवेदनशील होता है। सही सिंचाई, संतुलित पोषण और समय पर कीट नियंत्रण से दानों के विकास में मदद मिल सकती है। बेहतर परिणाम के लिए अपने क्षेत्र की परिस्थितियों के अनुसार कृषि विशेषज्ञ की सलाह अपनाएं।

