Telegram CEO पावेल डुरोव ने WhatsApp की सुरक्षा और एन्क्रिप्शन दावों पर सवाल उठाते हुए इसे ‘कस्टमर फ्रॉड’ बताया।
दुनियाभर में सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप्स में से एक WhatsApp एक बार फिर अपनी सुरक्षा और प्राइवेसी को लेकर विवादों में घिर गया है। इस बार Telegram के संस्थापक और CEO पावेल डुरोव ने व्हाट्सएप के एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन (E2E) दावों पर सवाल उठाते हुए इसे ‘कस्टमर फ्रॉड’ तक करार दिया है।
डुरोव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि व्हाट्सएप का यह दावा कि यूजर्स के मैसेज पूरी तरह सुरक्षित हैं, पूरी सच्चाई नहीं दर्शाता। उन्होंने आरोप लगाया कि व्हाट्सएप के कई मैसेज क्लाउड बैकअप के जरिए Apple और Google के सर्वर्स पर स्टोर होते हैं, जहां वे एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड नहीं होते। उनका कहना है कि यह स्थिति यूजर्स की प्राइवेसी के लिए जोखिम पैदा कर सकती है।
डुरोव के अनुसार, व्हाट्सएप में बैकअप एन्क्रिप्शन डिफॉल्ट रूप से सक्रिय नहीं होता और अधिकांश यूजर्स इसे सक्षम भी नहीं करते। ऐसे में अगर यूजर ने अपने बैकअप को सुरक्षित नहीं किया है, तो उसकी निजी बातचीत तक तीसरे पक्ष की पहुंच संभव हो सकती है। उन्होंने यह भी दावा किया कि भले ही एक यूजर बैकअप एन्क्रिप्शन को सक्रिय कर दे, लेकिन अगर सामने वाले व्यक्ति ने ऐसा नहीं किया है, तो बातचीत पूरी तरह सुरक्षित नहीं मानी जा सकती।
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इसके अलावा, टेलीग्राम CEO ने व्हाट्सएप द्वारा मेटाडेटा संग्रह पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह ऐप यूजर्स के बारे में यह जानकारी एकत्र करता है कि वे किससे बात करते हैं और कितनी बार संवाद करते हैं, जो प्राइवेसी के नजरिए से एक संवेदनशील मुद्दा है।
क्लाउड स्टोरेज को लेकर भी उन्होंने गंभीर आरोप लगाए और कहा कि क्लाउड सेवा प्रदाता हर साल कई बार यूजर डेटा थर्ड पार्टी के साथ साझा करते हैं। हालांकि, उन्होंने इन दावों के लिए कोई विशिष्ट उदाहरण या डेटा स्रोत सार्वजनिक नहीं किया। इसके विपरीत, उन्होंने टेलीग्राम के मॉडल का जिक्र करते हुए कहा कि उनके प्लेटफॉर्म ने अब तक यूजर मैसेज कंटेंट को साझा नहीं किया है।
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर मैसेजिंग ऐप्स की सुरक्षा और प्राइवेसी को लेकर बहस छेड़ दी है। जहां व्हाट्सएप अपने एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन को मजबूत सुरक्षा का आधार मानता है, वहीं टेलीग्राम खुद को अधिक प्राइवेसी-फोकस्ड प्लेटफॉर्म के रूप में पेश कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यूजर्स को किसी भी मैसेजिंग ऐप का इस्तेमाल करते समय उसकी प्राइवेसी सेटिंग्स को समझना और सही तरीके से उपयोग करना बेहद जरूरी है। इस तरह के विवाद यह संकेत देते हैं कि डिजिटल दुनिया में डेटा सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा बन चुका है और आने वाले समय में इस पर और सख्त नियमों की आवश्यकता हो सकती है।

