ताइवान का मार्केट कैपिटलाइजेशन भारत से आगे निकला। हरपाल सिंह चीमा ने आर्थिक प्रबंधन, महंगाई और निवेशक विश्वास को लेकर सरकार पर सवाल उठाए।
वैश्विक शेयर बाजारों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहां ताइवान का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन भारत से आगे निकल गया है। यह बदलाव वैश्विक निवेश प्रवाह और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक परिस्थितियों में हो रहे परिवर्तनों को दर्शाता है।
करीब 2.5 करोड़ की आबादी वाला ताइवान अब बाजार मूल्य के मामले में भारत से आगे बताया जा रहा है, जबकि भारत की जनसंख्या 130 करोड़ से अधिक है। इस घटनाक्रम ने वैश्विक वित्तीय विश्लेषकों और निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया है।
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भारत की आर्थिक रैंकिंग को लेकर बहस तेज
इस विकास के साथ ही भारत की वैश्विक आर्थिक स्थिति को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत पहले दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था माना जाता था, लेकिन अब कुछ आकलनों में यह छठे स्थान पर बताया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव वैश्विक बाजार स्थितियों, विदेशी निवेश में उतार-चढ़ाव और आर्थिक अनिश्चितताओं का परिणाम हो सकता है।
Taiwan’s market capitalisation has now crossed that of India. A country of barely 2.5 crore people has overtaken a nation of 130 crore people. India, once the world’s 4th largest economy by GDP size, has now slipped to 6th position.
But instead of answering tough questions on…
— Adv Harpal Singh Cheema (@HarpalCheemaMLA) May 26, 2026
आर्थिक दबाव और निवेशक भरोसे में गिरावट की आशंका
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, महंगाई, बढ़ता राजकोषीय दबाव और आर्थिक सुस्ती जैसी चुनौतियां निवेशकों के विश्वास को प्रभावित कर रही हैं। इसके कारण विदेशी निवेश प्रवाह में अस्थिरता देखी जा रही है।
हालांकि भारत की घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है, लेकिन अल्पकालिक बाजार उतार-चढ़ाव ने आर्थिक गति को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
हरपाल सिंह चीमा ने सरकार पर साधा निशाना
पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, देश में बढ़ती महंगाई, आर्थिक धीमापन और निवेशक विश्वास में गिरावट को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आर्थिक चुनौतियों पर स्पष्ट और पारदर्शी चर्चा करने के बजाय सकारात्मक आंकड़ों को प्राथमिकता दे रही है।
चीमा का कहना है कि इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है, जो लगातार बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की लागत से प्रभावित हो रही है।
सरकार का दावा: भारत की ग्रोथ मजबूत
सरकारी पक्ष का कहना है कि भारत अभी भी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। सरकार के अनुसार, मजबूत घरेलू मांग, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और आर्थिक सुधार देश की दीर्घकालिक विकास क्षमता को मजबूत कर रहे हैं।

