AAP नेता संजीव झा ने भाजपा पर महिला सशक्तिकरण के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाया, कहा—जमीनी काम की कमी।
दिल्ली की राजनीति में महिला सशक्तिकरण और सुरक्षा का मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और विधायक Sanjeev Jha ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि पार्टी महिला सशक्तिकरण जैसे संवेदनशील विषय का इस्तेमाल केवल चुनावी लाभ के लिए कर रही है। उनके इस बयान के बाद राजधानी में राजनीतिक माहौल और गरमा गया है।
संजीव झा ने अपने बयान में कहा कि भाजपा की कथनी और करनी में बड़ा अंतर है। उन्होंने आरोप लगाया कि जहां एक ओर भाजपा महिला अधिकारों की बात करती है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा वास्तव में इस मुद्दे को लेकर गंभीर होती, तो वह नीति निर्माण में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विपक्ष के साथ सार्थक संवाद करती।
उन्होंने आगे कहा कि आज भी दिल्ली की सड़कों पर महिलाएं पूरी तरह सुरक्षित महसूस नहीं करतीं, जो यह दर्शाता है कि महिला सशक्तिकरण के दावे केवल कागजों और भाषणों तक सीमित हैं। संजीव झा ने विशेष रूप से गरीब और पूर्वांचली समुदाय की महिलाओं की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि इन वर्गों की समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है।
also read : नजफगढ़ फायरिंग मामला: Kuldeep Kumar का भाजपा पर हमला, 1 करोड़ मुआवजा और नौकरी की मांग
AAP नेता ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह केवल अपनी छवि सुधारने के लिए बड़े-बड़े कार्यक्रम और घोषणाएं करती है, जबकि वास्तविकता में महिलाओं के जीवन में कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि जनता अब पहले से अधिक जागरूक हो चुकी है और वह समझती है कि कौन वास्तव में उनके हित में काम कर रहा है और कौन केवल दिखावे की राजनीति कर रहा है।
इस मुद्दे को लेकर आम आदमी पार्टी के अन्य नेताओं ने भी भाजपा की नीतियों की आलोचना की है और कहा है कि महिला सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। पार्टी का कहना है कि सरकार को चाहिए कि वह केवल घोषणाओं तक सीमित न रहकर जमीनी स्तर पर महिलाओं की सुरक्षा, शिक्षा और रोजगार के लिए ठोस कदम उठाए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला सशक्तिकरण का मुद्दा आने वाले चुनावों में एक प्रमुख विषय बन सकता है, क्योंकि यह सीधे तौर पर समाज के बड़े वर्ग को प्रभावित करता है। ऐसे में विभिन्न राजनीतिक दल इस मुद्दे को लेकर अपनी-अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं।
फिलहाल, संजीव झा के इस बयान ने दिल्ली की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है, जिसमें यह सवाल उठ रहा है कि क्या महिला सशक्तिकरण वास्तव में प्राथमिकता है या फिर यह केवल चुनावी रणनीति का हिस्सा बनकर रह गया है।

