रतलाम में कम बारिश के कारण कृषि विभाग ने सरसों, चना, मसूर और अलसी की बुवाई की सलाह दी। जानें गेहूं की किस्में और पानी बचाने के उपाय।
मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में इस वर्ष औसत से कम बारिश होने के कारण जल संकट की स्थिति बन रही है। इसे देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को रबी सीजन में कम पानी की आवश्यकता वाली फसलों की बुवाई करने की सलाह दी है। विभाग के अनुसार, सीमित जल संसाधनों को ध्यान में रखते हुए फसलों का चयन करना जरूरी है, ताकि उपलब्ध नमी और पानी का बेहतर उपयोग किया जा सके।
किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के उप संचालक भगवान सिंह अर्गल ने बताया कि जिले में इस साल सामान्य वर्षा 918 मिलीमीटर के मुकाबले केवल 591 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। कम बारिश के चलते तालाबों और बैराजों में जलभराव भी 50 प्रतिशत से नीचे रहा है। ऐसी स्थिति में आगामी फसलों की सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
सोयाबीन कटाई के बाद जल्दी करें रबी फसलों की बुवाई
कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि सोयाबीन की कटाई पूरी होने के बाद खेतों में मौजूद नमी का अधिकतम उपयोग करें। इसके लिए खेत तैयार करके जल्द से जल्द सरसों, चना, मसूर और अलसी जैसी कम पानी में उगाई जाने वाली रबी फसलों की बुवाई की जा सकती है।
इन फसलों का चयन स्थानीय परिस्थितियों और मिट्टी में उपलब्ध नमी के आधार पर करना चाहिए। इससे सीमित जल संसाधनों पर निर्भरता कम करने और रबी सीजन में खेती को बेहतर ढंग से संचालित करने में मदद मिल सकती है।
पर्याप्त पानी होने पर ही गेहूं की बुवाई करें
कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसान अपने खेतों में गेहूं की बुवाई तभी करें, जब उनके पास सिंचाई के लिए पर्याप्त जल स्रोत उपलब्ध हो। कम बारिश की स्थिति में बिना पानी की उपलब्धता का आकलन किए बड़े क्षेत्र में गेहूं की खेती करना जोखिम भरा हो सकता है।
यदि किसान गेहूं की बुवाई करने की योजना बना रहे हैं, तो उन्हें कम पानी की आवश्यकता वाली उपयुक्त किस्मों का चयन करने की सलाह दी गई है।
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गेहूं की इन किस्मों को अपनाने की सलाह
जल संकट को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को गेहूं की निम्नलिखित किस्मों पर विचार करने की सलाह दी है:
हर्षिता
- GW-513
- HI-1655
- HI-1605
- HI-1544
किसानों को अपने क्षेत्र की कृषि-जलवायु परिस्थितियों, मिट्टी और सिंचाई की उपलब्धता के अनुसार किस्म का चयन करना चाहिए। बीज खरीदते समय प्रमाणित बीज और स्थानीय कृषि विशेषज्ञों की सलाह को प्राथमिकता देना भी उपयोगी रहेगा।
ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई से बचाएं पानी
रतलाम जिले में कम बारिश के कारण कृषि विभाग ने पारंपरिक फ्लड सिंचाई के बजाय ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी जल-कुशल सिंचाई प्रणालियों को अपनाने पर जोर दिया है।
ड्रिप सिंचाई से पौधों की जड़ों तक नियंत्रित मात्रा में पानी पहुंचाया जा सकता है, जबकि स्प्रिंकलर प्रणाली से खेत में पानी का अपेक्षाकृत समान वितरण संभव होता है। इन तकनीकों का उचित इस्तेमाल पानी की बचत करने और उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करने में मदद कर सकता है।
किसानों के लिए जरूरी सलाह
रतलाम जिले में इस साल कम वर्षा को देखते हुए किसानों के लिए रबी फसलों की योजना बनाते समय पानी की उपलब्धता का आकलन करना जरूरी है। सरसों, चना, मसूर और अलसी जैसी फसलों का चयन, खेतों की नमी का उपयोग, गेहूं की उपयुक्त किस्मों का चुनाव और आधुनिक सिंचाई तकनीकों को अपनाना इस सीजन में महत्वपूर्ण हो सकता है।
कृषि विभाग की सलाह का उद्देश्य कम पानी में खेती को बेहतर ढंग से संचालित करना और किसानों को संभावित सिंचाई संकट से निपटने में मदद करना है।

