आगर मालवा के किसान सुंदरलाल शर्मा मिश्रित और जैविक खेती से 2 बीघा जमीन पर सालाना करीब 2 लाख रुपये कमा रहे हैं। जानें उनकी खेती का सफल मॉडल।
मध्य प्रदेश के आगर मालवा जिले के प्रगतिशील किसान सुंदरलाल शर्मा ने प्राकृतिक और जैविक खेती को अपनाकर कम जमीन में बेहतर आमदनी हासिल करने का उदाहरण पेश किया है। वे मिश्रित खेती और बहुफसली पद्धति के जरिए एक ही खेत में कई प्रकार की फसलें उगा रहे हैं। उनकी इस पहल से न केवल खेती में विविधता बढ़ी है, बल्कि दूसरे किसानों के लिए भी कम लागत में अधिक आय अर्जित करने की संभावनाएं सामने आई हैं।
सुंदरलाल शर्मा ने अपनी जमीन पर मौसंबी, पपीता, गेंदा, चिया सीड्स, मोरिंगा, हल्दी, कपास, अरहर और विभिन्न दलहनी फसलों को एक साथ उगाने की पद्धति अपनाई है। वैज्ञानिक कृषि तकनीकों और प्राकृतिक खेती के समन्वय से वे उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग कर रहे हैं।
एक खेत में कई फसलें उगाकर बढ़ाई आमदनी
किसान सुंदरलाल शर्मा ने लगभग एक एकड़ भूमि में मिश्रित एवं बहुफसली खेती का मॉडल विकसित किया है। इसमें फलदार पौधों के साथ फूलों, औषधीय उपयोग वाली फसलों और दलहनी फसलों को भी जगह दी गई है।
इस पद्धति का प्रमुख लाभ यह है कि किसान एक ही फसल पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग फसलों से आय प्राप्त करने के अवसर बना सकते हैं। इससे बाजार में किसी एक फसल की कीमत कम होने पर दूसरी फसलों से आमदनी मिलने की संभावना रहती है।
दलहनी फसलों को खेती में शामिल करने से मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में भी मदद मिल सकती है। फसल चक्र और उचित प्रबंधन के साथ मिश्रित खेती अपनाने से भूमि एवं अन्य कृषि संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होता है।
also read: पांढुर्णा मंडी में नई मूंगफली की पहली ढेरी 11,111 रुपये प्रति क्विंटल में बिकी…
ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग से पानी की बचत
सुंदरलाल शर्मा को आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए उद्यानिकी विभाग से मार्गदर्शन और सरकारी सहायता मिली है। विभाग की ओर से उन्हें ड्रिप सिंचाई प्रणाली और मल्चिंग के लिए 50 प्रतिशत अनुदान प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त सब्जी सहायता प्रणाली योजना के अंतर्गत 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता भी मिली।
ड्रिप सिंचाई के माध्यम से पौधों की जड़ों तक जरूरत के अनुसार पानी पहुंचाया जा सकता है। वहीं, मल्चिंग से मिट्टी में नमी बनाए रखने और खरपतवार को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
इन तकनीकों को अपनाने से सुंदरलाल शर्मा को पानी का बेहतर उपयोग करने और फसल उत्पादन में सुधार लाने में सहायता मिली है।
2 बीघा जमीन से सालाना 2 लाख रुपये तक की आय
मिश्रित खेती के जरिए सुंदरलाल शर्मा लगभग 2 बीघा भूमि से सालाना करीब 2 लाख रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं। उनका खेती का मॉडल दिखाता है कि सीमित कृषि भूमि होने पर भी फसलों का सही चयन, वैज्ञानिक तकनीकों और बेहतर प्रबंधन के माध्यम से आमदनी बढ़ाने के अवसर तलाशे जा सकते हैं।
हालांकि, खेती से होने वाली वास्तविक कमाई फसल की उपज, बाजार भाव, उत्पादन लागत और स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करती है। इसलिए दूसरे किसानों के लिए इस मॉडल को अपनाने से पहले अपनी जमीन, पानी की उपलब्धता और बाजार की मांग का आकलन करना जरूरी है।
बलराम कृषि महोत्सव में मुख्यमंत्री ने की सराहना
आगर मालवा की नवीन कृषि उपज मंडी में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसान सुंदरलाल शर्मा से बातचीत की। मुख्यमंत्री ने उनसे प्राकृतिक और जैविक खेती के तरीकों के बारे में जानकारी ली तथा उनके प्रयासों की सराहना की।
सुंदरलाल शर्मा का उदाहरण कृषि में विविधीकरण, जल संरक्षण और आधुनिक तकनीकों के महत्व को सामने लाता है। उनकी पहल से यह संदेश मिलता है कि किसान स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप अलग-अलग फसलों को अपनाकर खेती को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

