पंजाब सरकार का 5 साल में 85% सोलर पावर लक्ष्य, ₹5000 करोड़ निवेश और BESS से हरित ऊर्जा को बढ़ावा।
पंजाब सरकार ने हरित ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ा और महत्वाकांक्षी कदम उठाते हुए अगले पांच वर्षों में राज्य की 85% बिजली सोलर पावर से उत्पन्न करने का लक्ष्य तय किया है। मुख्यमंत्री Bhagwant Mann के नेतृत्व में यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, बल्कि राज्य की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को भी मजबूत करेगी।
कबिनेट मंत्री Sanjeev Arora ने इस योजना की जानकारी देते हुए कहा कि पंजाब में सोलर पावर का विस्तार व्यापक स्तर पर किया जाएगा और इसे आधुनिक बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) के साथ जोड़ा जाएगा। उन्होंने बताया कि अक्षय ऊर्जा स्रोतों में अक्सर उत्पादन में उतार-चढ़ाव होता है, लेकिन BESS तकनीक के जरिए इस समस्या का समाधान किया जाएगा, जिससे बिजली की निरंतर और विश्वसनीय आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी।
सरकार की इस नीति से उद्योगों को भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। नई व्यवस्था के तहत अब उद्योग अपने अनुमोदित लोड से 25 प्रतिशत अधिक क्षमता के सोलर पावर प्लांट स्थापित कर सकेंगे। इससे उद्योगों को ऊर्जा लागत में कमी आएगी और वे अधिक आत्मनिर्भर बन पाएंगे। साथ ही, इससे राज्य में हरित ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा और औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी।
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इस महत्वाकांक्षी योजना को साकार करने के लिए ‘रोशन पंजाब’ मिशन के तहत करीब ₹5000 करोड़ का निवेश किया जा रहा है। इस निवेश का मुख्य उद्देश्य राज्य के ट्रांसमिशन और वितरण नेटवर्क को आधुनिक बनाना है। इसके अंतर्गत लगभग 25,000 किलोमीटर नई बिजली केबल बिछाई जाएंगी, 8,000 नए ट्रांसफार्मर लगाए जाएंगे और 77 नए सबस्टेशन स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा SCADA सिस्टम के माध्यम से बिजली आपूर्ति की केंद्रीकृत निगरानी की जाएगी, जिससे बिजली कटौती की समस्या को काफी हद तक खत्म किया जा सकेगा।
संजय अरोड़ा ने यह भी बताया कि पंजाब तेजी से निवेश का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। चालू वित्तीय वर्ष में राज्य को 60,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनमें हरित ऊर्जा परियोजनाओं की हिस्सेदारी भी काफी महत्वपूर्ण है। सरकार द्वारा उद्योगों के लिए सरल और पारदर्शी नीतियां लागू किए जाने से निवेशकों का विश्वास लगातार बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना सफलतापूर्वक लागू होती है, तो पंजाब देश के उन अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है, जहां अक्षय ऊर्जा का उपयोग सबसे अधिक होगा। इससे न केवल पर्यावरण को लाभ मिलेगा, बल्कि बिजली उत्पादन की लागत में भी कमी आएगी और राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
कुल मिलाकर, पंजाब सरकार की यह पहल हरित ऊर्जा की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित हो सकती है, जो आने वाले वर्षों में राज्य को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर और पर्यावरण के अनुकूल बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।

