संगरूर पर बयान को लेकर धालीवाल ने बाजवा पर तीखा हमला बोला, कहा—भूमि और इतिहास का अपमान बर्दाश्त नहीं।
पंजाब की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी को लेकर घमासान तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और विधायक Kuldeep Singh Dhaliwal ने कांग्रेस नेता Pratap Singh Bajwa के संगरूर को लेकर दिए गए बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। अमृतसर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान धालीवाल ने इस बयान को “शर्मनाक” और “घटिया राजनीति” करार देते हुए तीखा हमला बोला।
प्रेस वार्ता के दौरान धालीवाल ने कहा कि संगरूर केवल एक शहर नहीं, बल्कि पंजाब के गौरवशाली इतिहास और संघर्षों की पहचान है। उन्होंने कहा कि इस भूमि ने कई क्रांतिकारी योद्धाओं और समाज सेवा में अग्रणी व्यक्तित्वों को जन्म दिया है, जिन्होंने अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई और प्रदेश को नई दिशा दी। ऐसे में किसी भी नेता द्वारा इस क्षेत्र के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करना वहां के लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने जैसा है।
धालीवाल ने अपने बयान में यह भी कहा कि जब भी पंजाब को बदलाव की जरूरत पड़ी, संगरूर के लोगों ने सबसे आगे बढ़कर नेतृत्व किया है। उन्होंने दावा किया कि राज्य में लंबे समय से चली आ रही भ्रष्टाचार की राजनीति के खिलाफ जो आंदोलन शुरू हुआ, उसकी मजबूत नींव भी संगरूर की धरती से ही पड़ी थी। इसी जनसमर्थन के बल पर आज प्रदेश में आम आदमी पार्टी की सरकार बनी और जनहित के कई फैसले लिए जा रहे हैं।
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कांग्रेस पर निशाना साधते हुए धालीवाल ने कहा कि राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन किसी क्षेत्र की गरिमा और उसके इतिहास का अपमान करना किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने मांग की कि प्रताप सिंह बाजवा अपने बयान के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगें और भविष्य में इस तरह की टिप्पणी करने से बचें।
इस विवाद ने पंजाब की राजनीति में एक बार फिर सियासी तापमान बढ़ा दिया है, जहां सत्ताधारी और विपक्षी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान चुनावी माहौल में और अधिक तीखे हो सकते हैं, जिससे राजनीतिक माहौल और गरमा सकता है।
आम आदमी पार्टी के नेताओं ने भी धालीवाल के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि संगरूर के लोगों का योगदान पंजाब के इतिहास में अहम रहा है और इसे किसी भी कीमत पर कम करके नहीं आंका जा सकता। वहीं कांग्रेस की ओर से इस मुद्दे पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन आने वाले दिनों में इस पर सियासी बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।
कुल मिलाकर, संगरूर को लेकर उठे इस विवाद ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि पंजाब की राजनीति में क्षेत्रीय पहचान और भावनाओं का मुद्दा कितना संवेदनशील है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह राजनीतिक विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है और इसका प्रदेश की राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ता है।

