मान सरकार ने बच्चों की सुरक्षा के लिए सेफ स्कूल व्हीकल पॉलिसी के तहत स्कूल बसों की जांच तेज कर दी है। अब तक 1,842 बसों की जांच, 526 चालान और 3 बसें जब्त की गईं।
पंजाब में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार ने सख्त कार्रवाई तेज कर दी है। राज्य सरकार की ओर से सेफ स्कूल व्हीकल पॉलिसी के तहत स्कूल बसों की लगातार जांच की जा रही है, ताकि बच्चों के सुरक्षित सफर को सुनिश्चित किया जा सके।
कैबिनेट मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने जानकारी देते हुए बताया कि राज्यभर में स्कूल बसों की नियमित जांच अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर कार्रवाई करना और बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना है।
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1,842 स्कूल बसों की हुई जांच
डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि अब तक पूरे पंजाब में 1,842 स्कूल बसों का निरीक्षण पूरा किया जा चुका है। जांच के दौरान नियमों का पालन नहीं करने वाली बसों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
उन्होंने कहा कि इस अभियान के तहत अब तक 526 स्कूल बसों के चालान किए गए हैं, जबकि नियमों का गंभीर उल्लंघन करने वाली 3 बसों को जब्त (इंपाउंड) किया गया है।
ਸਕੂਲੀ ਬੱਚਿਆਂ ਦੀ ਸੁਰੱਖਿਆ ਲਈ ਮਾਨ ਸਰਕਾਰ ਵੱਲੋਂ ਸਖ਼ਤਾਈ!
ਕੈਬਿਨੇਟ ਮੰਤਰੀ @DrBaljitAAP ਨੇ ਦਿੱਤੀ ਜਾਣਕਾਰੀ
👉🏻 ਸੇਫ਼ ਸਕੂਲ ਵਾਹਨ ਪਾਲਿਸੀ ਅਧੀਨ ਸੂਬੇ ਭਰ ਦੀਆਂ ਸਕੂਲ ਬੱਸਾਂ ਦੀ ਲਗਾਤਾਰ ਜਾਂਚ
👉🏻 ਹੁਣ ਤੱਕ 1,842 ਬੱਸਾਂ ਦੀ ਜਾਂਚ ਮੁਕੰਮਲ, 526 ਦੇਕੀਤੇ ਚਲਾਨ ਅਤੇ 3 ਬੱਸਾਂ ਕੀਤੀਆਂ ਜ਼ਬਤ pic.twitter.com/oHeR2hmrc5— AAP Punjab (@AAPPunjab) July 7, 2026
बच्चों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता
पंजाब सरकार का कहना है कि स्कूल जाने वाले बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि सभी स्कूल वाहन निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करें और बच्चों को सुरक्षित परिवहन सुविधा मिले।
डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि सेफ स्कूल व्हीकल पॉलिसी को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए विभागों को लगातार निगरानी और कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
नियम तोड़ने वालों पर जारी रहेगी कार्रवाई
सरकार ने स्पष्ट किया है कि स्कूल बसों में सुरक्षा नियमों की अनदेखी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी। आने वाले समय में भी राज्यभर में स्कूल वाहनों की जांच जारी रहेगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
पंजाब सरकार के अनुसार, यह अभियान बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और अभिभावकों का भरोसा मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

