पंजाब विधानसभा में हरपाल सिंह चीमा का अकाली दल पर हमला, सत्कार बिल को बताया न्याय दिलाने वाला ऐतिहासिक कदम।
पंजाब विधानसभा का हालिया सत्र ‘जगत ज्योति श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार बिल’ को लेकर बेहद अहम और गर्मागर्म बहस का गवाह बना। इस दौरान राज्य के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने शिरोमणि अकाली दल पर तीखा हमला बोलते हुए बेअदबी की ऐतिहासिक घटनाओं को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि अकाली सरकारों के कार्यकाल में हुई घटनाएं पंजाब के इतिहास पर दाग के रूप में दर्ज हैं, जबकि वर्तमान भगवंत मान सरकार न्याय सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
सदन को संबोधित करते हुए चीमा ने 4 फरवरी 1986 को हुए साका नकोदर का उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय की सरकार के दौरान श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पवित्र अंगों की बेअदबी हुई और शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही संगत पर लाठीचार्ज किया गया। इस घटना में कई लोगों की शहादत हुई, जिसे उन्होंने अकाली दल के दमनकारी इतिहास का हिस्सा बताया।
इसके साथ ही उन्होंने वर्ष 2015 की बरगाड़ी कांड और बहबल कलां घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि अकाली दल ने पिछली गलतियों से सबक नहीं लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन घटनाओं में सिख समुदाय की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची, लेकिन उस समय की सरकार ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के बजाय उन्हें बचाने का प्रयास किया।
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हरपाल सिंह चीमा ने जोर देकर कहा कि वर्तमान सरकार द्वारा लाया गया ‘सत्कार बिल’ इन सभी घटनाओं के पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। उन्होंने कहा कि इस कानून के लागू होने के बाद कोई भी व्यक्ति पवित्र ग्रंथ की बेअदबी करने की हिम्मत नहीं कर सकेगा, क्योंकि दोषियों को कड़ी सजा सुनिश्चित की जाएगी।
वित्त मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में सरकार का उद्देश्य केवल कानून बनाना नहीं, बल्कि उसे प्रभावी ढंग से लागू करना है। उन्होंने कहा कि यह बिल धार्मिक आस्था की रक्षा के साथ-साथ कानून व्यवस्था को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
सदन में इस मुद्दे पर पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली, जिससे यह साफ है कि यह कानून केवल कानूनी ही नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से भी बेहद संवेदनशील है।
कुल मिलाकर, पंजाब विधानसभा में सत्कार बिल को लेकर हुई यह बहस राज्य की राजनीति में एक नया मोड़ ला सकती है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि यह बिल किस रूप में पारित होता है और इससे बेअदबी के मामलों में न्याय प्रक्रिया कितनी मजबूत होती है।

