पंजाब विधानसभा में बेअदबी कानून संशोधन बिल पेश, दोषियों को उम्रकैद और ₹25 लाख जुर्माने का प्रावधान।
पंजाब की राजनीति और धार्मिक संवेदनशीलता से जुड़े एक बड़े कदम के तहत भगवंत मान के नेतृत्व में पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र में ‘जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) बिल, 2026’ पेश किया गया। इस प्रस्तावित कानून का उद्देश्य पवित्र श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी करने वाले दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करना और ऐसी घटनाओं पर पूर्ण रोक लगाना है।
नए संशोधन के तहत सजा के प्रावधानों को काफी सख्त बनाया गया है। प्रस्तावित बिल में दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति को अधिकतम उम्रकैद की सजा देने का प्रावधान रखा गया है। इसके साथ ही आरोपी पर ₹25 लाख तक का भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है। सबसे अहम बदलाव यह है कि इस अपराध को गैर-जमानती श्रेणी में रखने की तैयारी की गई है, जिससे आरोपी को आसानी से जमानत न मिल सके और कानून का डर बना रहे।
विधानसभा सत्र के दौरान इस मुद्दे पर भावुक माहौल देखने को मिला। आम आदमी पार्टी की विधायक बलजिंदर कौर ने अपने संबोधन में कहा कि पंजाब की आत्मा गुरबाणी से जुड़ी हुई है और बेअदबी की घटनाएं समाज को गहरा आघात पहुंचाती हैं। उन्होंने 2015 की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि पिछली सरकारों ने केवल आश्वासन दिए, लेकिन कानून को मजबूत करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए।
वहीं, कैबिनेट मंत्री डॉ. इंद्रबीर सिंह निज्जर ने कहा कि पुराने कानूनों में सख्ती की कमी के कारण आरोपी जल्द जमानत पर बाहर आ जाते थे, जिससे न्याय प्रक्रिया कमजोर पड़ती थी। उन्होंने कहा कि यह नया संशोधन कानून व्यवस्था को मजबूत करेगा और दोषियों को सख्त सजा सुनिश्चित करेगा।
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इस बिल के पारित होने के बाद इसे राज्यपाल के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। चूंकि यह राज्य से संबंधित विषय है, इसलिए सरकार को उम्मीद है कि इसे राष्ट्रपति की मंजूरी की आवश्यकता नहीं होगी और जल्द ही इसे कानून का रूप दे दिया जाएगा। अनुमान है कि अगर कोई कानूनी अड़चन नहीं आती है, तो अप्रैल के अंत या मई की शुरुआत तक यह कानून लागू हो सकता है।
सत्र के दौरान विपक्ष ने भी अपनी मांगें रखीं। प्रताप सिंह बाजवा ने पिछले वर्ष गठित सिलेक्ट कमेटी की रिपोर्ट को सदन में पेश करने की मांग की और चर्चा के लिए सत्र की अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव रखा।
कार्यवाही की शुरुआत में सदन ने हाल ही में हुए हादसों—वृंदावन नाव दुर्घटना, कांगड़ा सड़क हादसे—के पीड़ितों और पूर्व मंत्री लाल सिंह सहित अन्य दिवंगत हस्तियों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
कुल मिलाकर, पंजाब सरकार का यह कदम धार्मिक आस्था की रक्षा और कानून व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है। यह देखना अब महत्वपूर्ण होगा कि यह बिल कितनी जल्दी कानून का रूप लेता है और इसका जमीनी स्तर पर कितना प्रभाव पड़ता है।

