ईशा कोप्पिकर के ‘अंधभक्त’ बयान का कंगना रनौत ने समर्थन किया। जानें दोनों अभिनेत्रियों ने देशभक्ति और सरकार की नीतियों को लेकर क्या कहा।
बॉलीवुड एक्ट्रेस और बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने अभिनेत्री ईशा कोप्पिकर के उस बयान का समर्थन किया है, जिसमें उन्होंने खुद को गर्व से ‘अंधभक्त’ बताया था। ईशा ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया था कि उनकी ‘भक्ति’ किसी राजनीतिक दल के लिए नहीं, बल्कि देश और उसकी प्रगति के प्रति है। अब कंगना ने ईशा की बात को अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर साझा करते हुए बताया कि वह उनके विचारों से क्यों सहमत हैं।
ईशा कोप्पिकर ने खुद को क्यों बताया ‘अंधभक्त’?
ईशा कोप्पिकर ने मंगलवार को इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया था। इसमें उन्होंने ‘अंधभक्त’ शब्द को लेकर अपनी राय रखी। अभिनेत्री ने कहा कि यदि अपने देश से प्यार करना और उसे आगे बढ़ते देखना भक्ति कहलाता है, तो उन्हें खुद को ‘अंधभक्त’ कहे जाने पर कोई आपत्ति नहीं है।
उन्होंने साफ किया कि उनकी यह सोच किसी राजनीतिक पार्टी या नेता के प्रति अंध समर्थन पर आधारित नहीं है। उनके मुताबिक, उनका जुड़ाव भारत और भारतीय लोगों के प्रति है।
ईशा ने यह भी कहा कि देश से प्यार करने का अर्थ यह नहीं है कि व्यक्ति सरकार के हर फैसले से सहमत हो। वह सरकार की नीतियों पर सवाल उठा सकती हैं, किसी फैसले से असहमति जता सकती हैं और इसके बावजूद अपने देश के प्रति प्रेम बनाए रख सकती हैं।
कंगना रनौत ने ईशा के बयान का किया समर्थन
ईशा के वीडियो को कंगना रनौत ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर शेयर किया। उन्होंने अपने अनुभवों का जिक्र करते हुए बताया कि वह भी कई मुद्दों पर आवाज उठाती रही हैं।
कंगना ने कहा कि उन्होंने स्कूल के दिनों में एक ऐसे शिक्षक का विरोध किया था, जो असेंबली के दौरान बच्चों को डंडे से मारते थे। इसके अलावा उन्होंने 26/11 मुंबई आतंकी हमले और निर्भया कांड जैसी घटनाओं के खिलाफ भी अपनी नाराजगी जताई थी।
कंगना ने अपने परिवार का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने अपनी व्यक्तिगत मुश्किलों के लिए कभी माता-पिता को जिम्मेदार नहीं ठहराया। उन्होंने दावा किया कि अपनी मेहनत से जिस मुकाम तक पहुंचीं, उसी स्तर तक अपने परिवार को भी आगे बढ़ाने की कोशिश की।

ईशा बोलीं- देश सबसे पहले
ईशा कोप्पिकर ने अपने वीडियो में देश को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने कहा कि एक नागरिक सरकार से सवाल कर सकता है और उसकी नीतियों से असहमति भी रख सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह अपने देश से प्यार करना छोड़ दे।
अभिनेत्री ने कहा कि भारत उनका घर है और इसी देश ने उन्हें काम करने और अपनी पहचान बनाने के अवसर दिए हैं। उन्होंने लोगों से भी अपील की कि जिस देश में वे रहते हैं, उसका सम्मान करें और उसके विकास में योगदान देने की कोशिश करें।
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‘भारतीय होने पर मुझे गर्व है’
ईशा ने अपने बयान में देश के प्रति गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि देशभक्ति केवल शब्दों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उनके मुताबिक, असली देशभक्ति ऐसे काम करने में है जिनसे समाज और देश में सकारात्मक बदलाव आए। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने देश पर गर्व करें और उसकी बेहतरी में अपना योगदान दें।
Gen Z को लेकर कंगना पहले भी दे चुकी हैं बयान
कंगना रनौत का ईशा के बयान पर रिएक्शन ऐसे समय आया है, जब वह हाल में Gen Z के विरोध प्रदर्शनों को लेकर भी चर्चा में रही थीं। जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन को लेकर कंगना ने कुछ प्रदर्शनकारियों की भाषा और व्यवहार पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी।
उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रदर्शन से जुड़े कुछ वीडियो देखने के बाद प्रदर्शनकारियों के एक वर्ग को ‘जेनरेशन गटर’ तक कह दिया था। कंगना ने आरोप लगाया था कि कुछ प्रदर्शनकारियों के पास व्यवस्था में योगदान देने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है।
कंगना ने बाद में दी अपने बयान पर सफाई
कंगना के इस बयान की आलोचना होने के बाद उन्होंने सफाई भी दी। समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में उन्होंने कहा कि उनका निशाना सभी Gen Z युवाओं पर नहीं था।
कंगना के मुताबिक, उन्होंने कुछ खास लोगों और कुछ महिलाओं के व्यवहार को लेकर टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा कि उनके बयान को सभी युवाओं पर लागू करना सही नहीं है।
‘मैं सभी युवाओं की बात नहीं कर रही थी’
कंगना ने अपनी सफाई में कहा कि यदि कोई व्यक्ति खुद को अपमानजनक शब्दों से संबोधित करता है, तो उस संदर्भ में की गई उनकी टिप्पणी को सभी युवाओं के लिए सामान्य बयान नहीं माना जाना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य पूरे युवा वर्ग को निशाना बनाना नहीं था, बल्कि वह कुछ विशेष लोगों के व्यवहार और उनके द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा पर प्रतिक्रिया दे रही थीं।
फिलहाल, ईशा कोप्पिकर के ‘अंधभक्त’ वाले बयान और कंगना रनौत के समर्थन ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है। दोनों अभिनेत्रियों ने अपने-अपने बयानों में देशप्रेम और सरकार की नीतियों पर असहमति के बीच अंतर को रेखांकित किया है।

