भारत सरकार ने स्वदेशी इमरजेंसी अलर्ट सिस्टम लॉन्च किया, जिससे अब बाढ़, भूकंप और चक्रवात से पहले मोबाइल पर चेतावनी मिलेगी।
भारत ने आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में एक बड़ी तकनीकी छलांग लगाते हुए स्वदेशी इमरजेंसी अलर्ट सिस्टम को देशभर में लागू कर दिया है। इस आधुनिक प्रणाली के जरिए अब देश के नागरिकों को बाढ़, भूकंप, चक्रवात और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से पहले ही मोबाइल फोन पर चेतावनी संदेश प्राप्त होंगे, जिससे समय रहते सुरक्षित कदम उठाना संभव हो सकेगा और जान-माल के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।
इस अत्याधुनिक प्रणाली का औपचारिक शुभारंभ केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah और केंद्रीय संचार मंत्री Jyotiraditya Scindia द्वारा 2 मई 2026 को किया गया। यह प्रोजेक्ट दूरसंचार विभाग और National Disaster Management Authority (NDMA) के संयुक्त प्रयासों से विकसित किया गया है, जिसका उद्देश्य पूरे देश में आपदा चेतावनी प्रणाली को मजबूत बनाना है।
सरकार के अनुसार, यह स्वदेशी इमरजेंसी अलर्ट सिस्टम देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू कर दिया गया है। इसका मतलब है कि अब भारत का हर नागरिक इस तकनीक के दायरे में आएगा और किसी भी संभावित आपदा से पहले समय पर जानकारी प्राप्त कर सकेगा।
यह प्रणाली सेल ब्रॉडकास्ट और एसएमएस तकनीक पर आधारित है, जो इसे बेहद प्रभावी और विश्वसनीय बनाती है। जैसे ही किसी क्षेत्र में खतरे की आशंका होती है, उस इलाके के सभी मोबाइल यूजर्स को तुरंत अलर्ट भेज दिया जाता है। इस तकनीक की सबसे खास बात यह है कि यह बिना इंटरनेट कनेक्शन के भी काम करती है, जिससे दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले लोगों तक भी चेतावनी आसानी से पहुंचाई जा सकती है।
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इस सिस्टम का तकनीकी आधार “सचेत (SACHET)” प्लेटफॉर्म है, जिसे C-DOT और NDMA के सहयोग से विकसित किया गया है। यह प्लेटफॉर्म जियो-टार्गेटेड अलर्ट भेजने में सक्षम है, यानी केवल उन्हीं लोगों को चेतावनी संदेश मिलता है जो संभावित खतरे वाले क्षेत्र में मौजूद होते हैं। इससे अनावश्यक घबराहट से बचा जा सकता है और सूचना की सटीकता बनी रहती है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, यह प्रणाली पहले ही 19 से अधिक भारतीय भाषाओं में 134 अरब से ज्यादा अलर्ट संदेश भेज चुकी है। यह दर्शाता है कि इस तकनीक को देश की भाषाई विविधता को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है, ताकि हर नागरिक अपनी भाषा में चेतावनी समझ सके।
इस पहल के पीछे सरकार का मुख्य उद्देश्य है कि हर व्यक्ति तक समय पर और सटीक जानकारी पहुंचे, जिससे आपदा के समय त्वरित निर्णय लिया जा सके। चाहे समुद्री तूफान हो, अचानक आई बाढ़ हो या भूकंप जैसी स्थिति—यह सिस्टम लोगों को पहले ही सतर्क कर देगा, जिससे वे सुरक्षित स्थानों पर जा सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रणाली भारत को आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में एक नई पहचान दिला सकती है। इससे न केवल आपदा के समय प्रतिक्रिया तेज होगी, बल्कि बचाव और राहत कार्यों को भी बेहतर तरीके से संचालित किया जा सकेगा।
इस तरह स्वदेशी इमरजेंसी अलर्ट सिस्टम देश में तकनीक और सुरक्षा के नए युग की शुरुआत का संकेत देता है। यह पहल भारत को आत्मनिर्भर और आधुनिक बनाने के साथ-साथ नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

