हरियाणा के 53 शहरी निकायों में वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन शुरू, कम्पोस्टिंग और वेस्ट-टू-एनर्जी से पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा।
हरियाणा राज्य ने पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली को जमीनी स्तर पर मजबूत करते हुए एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य के 53 शहरी स्थानीय निकायों (ULB) में अब वैज्ञानिक तरीके से कचरे का प्रसंस्करण शुरू हो चुका है, जिसमें कम्पोस्टिंग तकनीक का उपयोग कर जैविक अपशिष्ट को उपयोगी उत्पादों में बदला जा रहा है। इस प्रक्रिया से तैयार खाद का उपयोग कृषि और बागवानी कार्यों में प्रभावी रूप से किया जा रहा है, जिससे पर्यावरणीय संतुलन को भी मजबूती मिल रही है।
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT) के निर्देशों के अनुपालन को लेकर आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में राज्य की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने विभागों को निर्देश दिए कि डेटा की सटीकता बढ़ाई जाए, रिपोर्टिंग प्रणाली को मजबूत किया जाए और ठोस व तरल अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़ी परियोजनाओं को तेज गति से पूरा किया जाए। उन्होंने यह भी दोहराया कि हरियाणा सरकार पर्यावरण संरक्षण के लिए एक सुव्यवस्थित और परिणामोन्मुखी रणनीति के साथ कार्य कर रही है।
बैठक में यह भी सामने आया कि राज्य में पुराने कचरे यानी लीगेसी वेस्ट के निस्तारण कार्य में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। अधिकांश चिन्हित स्थलों पर कचरे का निपटान किया जा चुका है, जबकि शेष कार्यों के लिए निर्धारित समय-सीमा तय की गई है। यह पहल दीर्घकालिक पर्यावरणीय स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
सोनीपत में स्थापित वेस्ट-टू-एनर्जी संयंत्र इस दिशा में एक प्रमुख उदाहरण बनकर उभरा है, जहां कचरे से ऊर्जा का उत्पादन किया जा रहा है। इसके अलावा अन्य क्षेत्रों में भी इस तरह की प्रसंस्करण सुविधाओं का विस्तार तेजी से किया जा रहा है।
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राज्य सरकार ने लगभग 98 प्रतिशत वार्डों में घर-घर कचरा संग्रहण सुनिश्चित कर लिया है, जो स्वच्छता अभियान की बड़ी सफलता मानी जा रही है। इसके साथ ही स्रोत स्तर पर कचरे को अलग-अलग करने की प्रक्रिया में भी सुधार हुआ है, जिससे रीसाइक्लिंग और प्रसंस्करण को आसान बनाया जा रहा है।
बेहतर समन्वय और निगरानी के लिए जिला स्तर पर उपायुक्तों की अध्यक्षता में टास्क फोर्स का गठन किया गया है, जिसमें विभिन्न विभागों को शामिल किया गया है। इसके अलावा शहरी निकाय स्तर पर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति कर जवाबदेही सुनिश्चित की गई है, ताकि सभी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन हो सके।
शहरी स्थानीय निकाय विभाग के आयुक्त एवं सचिव अशोक कुमार मीणा ने बताया कि तकनीक-आधारित निगरानी और मजबूत संस्थागत ढांचे के कारण हरियाणा अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में तेजी से एक मॉडल राज्य के रूप में उभर रहा है।
सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2026 के अंत तक पूरे राज्य में अपशिष्ट प्रसंस्करण क्षमता का पूर्ण कवरेज हासिल कर लिया जाए। इस दिशा में जारी प्रयास न केवल स्वच्छता को बढ़ावा देंगे, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के लक्ष्यों को भी मजबूती प्रदान करेंगे।

