हरियाणा विधानसभा की कार्यशाला में विधायकों को संसदीय प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण और मार्गदर्शन पुस्तिका जारी
हरियाणा में लोकतांत्रिक संस्थाओं को और अधिक सशक्त और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए हरियाणा विधान सभा द्वारा चंडीगढ़ स्थित हरियाणा निवास में विधायकों के लिए एक विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य जनप्रतिनिधियों को संसदीय प्रक्रियाओं, समितियों की भूमिका, विधायी कार्यों और प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बारे में गहन जानकारी प्रदान करना था, ताकि वे अपने दायित्वों को अधिक दक्षता और प्रभावशीलता के साथ निभा सकें। कार्यक्रम के दौरान विधायकों को सहयोग देने और उनकी कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए एक विशेष ‘मार्गदर्शन पुस्तिका’ भी जारी की गई, जिसमें विधायी कार्यप्रणाली, निर्णय लेने के तरीके और जमीनी स्तर की चुनौतियों से निपटने के व्यावहारिक सुझाव शामिल हैं।
इस अवसर पर हरविन्द्र कल्याण ने अपने संबोधन में कहा कि लोकतंत्र की मजबूती केवल संस्थागत ढांचे से नहीं, बल्कि उसमें कार्य करने वाले जनप्रतिनिधियों की दक्षता और जागरूकता से सुनिश्चित होती है। उन्होंने कहा कि “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प को साकार करने के लिए लोकतांत्रिक संस्थाओं का मजबूत होना अनिवार्य है।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विधायकों को केवल राजनीतिक अनुभव तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें तकनीकी ज्ञान, नियमों और प्रक्रियाओं की गहरी समझ भी विकसित करनी चाहिए, ताकि वे सदन और समितियों में जनहित के मुद्दों को अधिक प्रभावी ढंग से उठा सकें।
विधानसभा अध्यक्ष ने यह भी कहा कि सदन में समय की सीमाएं होती हैं, जिसके कारण हर विषय पर विस्तार से चर्चा संभव नहीं होती, ऐसे में संसदीय समितियां एक सशक्त मंच के रूप में सामने आती हैं, जहां गहन अध्ययन और विश्लेषण के आधार पर निर्णय लिए जा सकते हैं। उन्होंने विधायकों को प्रेरित करते हुए कहा कि उन्हें हमेशा सीखने की प्रवृत्ति बनाए रखनी चाहिए और अपने पूरे कार्यकाल के दौरान स्वयं को एक छात्र के रूप में देखना चाहिए, ताकि वे समय के साथ अपने ज्ञान और कौशल को लगातार बेहतर बना सकें।
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इस प्रशिक्षण कार्यशाला में विभिन्न विषय विशेषज्ञों ने भी विधायकों को संसदीय कार्यप्रणाली, प्रशासनिक जवाबदेही और नीति निर्माण की प्रक्रिया पर विस्तृत जानकारी दी। विशेषज्ञों ने बताया कि संसदीय समितियां सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम हैं और इनके माध्यम से नीतियों की समीक्षा और सुधार संभव होता है। इस तरह की कार्यशालाएं विधायकों को न केवल उनके अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक बनाती हैं, बल्कि उन्हें बेहतर निर्णय लेने के लिए भी तैयार करती हैं।
कार्यक्रम में यह भी रेखांकित किया गया कि आज के बदलते दौर में तकनीकी ज्ञान और डेटा आधारित निर्णय लेने की क्षमता अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। यदि विधायक इन पहलुओं को समझकर अपने कार्य में शामिल करते हैं, तो वे न केवल अपने क्षेत्र के विकास में योगदान दे सकते हैं, बल्कि राज्य और देश की प्रगति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
कुल मिलाकर, यह कार्यशाला हरियाणा में सुशासन, पारदर्शिता और प्रभावी विधायी कार्यप्रणाली को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रही है। ‘मार्गदर्शन पुस्तिका’ और प्रशिक्षण के माध्यम से विधायकों को सशक्त बनाकर राज्य सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों को और अधिक मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है, जिससे भविष्य में बेहतर नीति निर्माण और जनहितकारी निर्णयों की उम्मीद की जा सकती है।

