CM नायब सैनी ने हरियाणा में बढ़े स्वास्थ्य बजट, मेडिकल कॉलेज विस्तार और डिजिटल हेल्थ सेवाओं पर जोर दिया
हरियाणा में स्वास्थ्य क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए राज्य सरकार ने बड़े पैमाने पर निवेश और सुधारों की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। नायब सिंह सैनी ने स्पष्ट किया कि “स्वस्थ हरियाणा ही विकसित हरियाणा की आधारशिला है” और इसी दृष्टिकोण के तहत प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, गुणवत्ता सुधार और डिजिटल परिवर्तन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। चंडीगढ़ में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में उन्होंने बताया कि चालू वित्त वर्ष में स्वास्थ्य बजट को बढ़ाकर लगभग 14 हजार करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 32.89 प्रतिशत अधिक है। वर्ष 2014 में जहां यह बजट 2,646 करोड़ रुपये था, वहीं अब इसमें करीब 298 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो राज्य की प्राथमिकताओं में स्वास्थ्य क्षेत्र के महत्व को दर्शाती है।
सम्मेलन में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा की उपस्थिति में मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य क्षेत्र में हरियाणा की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि सरकार ने ‘केयर कम्पैनियन प्रोग्राम’ के माध्यम से मरीजों के परिजनों को प्रशिक्षित करने की पहल शुरू की है, जिससे अस्पतालों में देखभाल की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। इसके अलावा, डिजिटल हेल्थ सेवाओं को बढ़ावा देते हुए ‘ई-संजीवनी’ प्लेटफॉर्म के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को विशेषज्ञ डॉक्टरों से जोड़ने की सुविधा दी जा रही है, जिससे प्रतिदिन हजारों टेली-परामर्श संभव हो पा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए हर जिले में मेडिकल कॉलेज स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। वर्ष 2014 में जहां केवल 6 मेडिकल कॉलेज थे, अब उनकी संख्या बढ़कर 17 हो चुकी है, और एमबीबीएस सीटें 700 से बढ़कर 2,710 हो गई हैं। इसके साथ ही नर्सिंग, पैरामेडिकल और फिजियोथेरेपी शिक्षा के क्षेत्र में भी तेजी से विस्तार किया जा रहा है, ताकि प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों की कमी को दूर किया जा सके।
उन्होंने कहा कि गुणवत्ता सुधार पर भी विशेष ध्यान दिया गया है, जिसके तहत 1,479 स्वास्थ्य संस्थान राष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के तहत प्रमाणित हो चुके हैं। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी राज्य ने उल्लेखनीय प्रगति की है, जहां संस्थागत प्रसव दर 98.80 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है और पूर्ण टीकाकरण दर 105 प्रतिशत दर्ज की गई है।
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‘निरोगी हरियाणा’ अभियान का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि अब तक लगभग 1 करोड़ लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है और 5.86 करोड़ से अधिक मुफ्त लैब टेस्ट किए गए हैं। इससे बीमारियों का समय रहते पता लगाकर उपचार संभव हुआ है। इसके अलावा, आपातकालीन सेवाओं को मजबूत करने के लिए 550 एम्बुलेंस का नेटवर्क तैयार किया गया है, जो डायल-112 से जुड़ा है और 9-10 मिनट में मौके पर पहुंचने में सक्षम है।
उन्होंने बताया कि राज्य के जिला अस्पतालों में सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी आधुनिक सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, वहीं 22 अस्पतालों में मुफ्त डायलिसिस सेवाएं उपलब्ध हैं। साथ ही, कैथ लैब और कार्डियक केयर यूनिट जैसी उन्नत सेवाओं को भी विस्तार दिया जा रहा है।
गरीब और जरूरतमंद परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करने के लिए आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना के तहत हरियाणा में आयुष्मान-चिरायु योजना लागू की गई है, जिससे राज्य की आधी से अधिक आबादी को सालाना 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिल रहा है। इसके अतिरिक्त, कैंसर मरीजों के लिए डे-केयर सेंटर, मुफ्त इलाज, यात्रा सुविधा और आर्थिक सहायता जैसी सुविधाएं भी प्रदान की जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि स्वास्थ्य सेवाओं का असली उद्देश्य केवल इलाज नहीं, बल्कि बीमारी से बचाव होना चाहिए। इसके लिए राज्य में योग, खेल और जन-जागरूकता अभियानों को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि लोग स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं और बीमारियों से दूर रहें।
कुल मिलाकर, हरियाणा सरकार की ये पहलें राज्य को एक मजबूत, सुलभ और आधुनिक स्वास्थ्य प्रणाली की ओर ले जा रही हैं, जो न केवल नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाएंगी, बल्कि ‘स्वस्थ भारत, सशक्त भारत’ के राष्ट्रीय लक्ष्य को भी साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

