हरियाणा में गन्ना किसानों को नई तकनीक और कृषि यंत्रों पर सब्सिडी का मौका। शरदकालीन बिजाई के लिए 31 दिसंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन करें।
हरियाणा सरकार ने गन्ना किसानों को आधुनिक खेती की तकनीक और कृषि यंत्र अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने की पहल की है। राज्य के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने ‘गन्ना तकनीकी उद्देश्य परियोजना 2026-27’ के अंतर्गत नई बिजाई विधियों और आधुनिक मशीनों पर अनुदान देने की घोषणा की है। इस योजना का उद्देश्य गन्ने की उत्पादकता बढ़ाने के साथ खेती में लगने वाली लागत, पानी और श्रम की बचत करना है।
विभाग के अनुसार, अक्टूबर और नवंबर में शरदकालीन गन्ना बिजाई करने वाले पात्र किसान 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। वहीं, वसंत और ग्रीष्मकालीन बिजाई के लिए आवेदन की अंतिम तारीख 30 सितंबर 2026 निर्धारित थी, जो अब समाप्त हो चुकी है। इसलिए वर्तमान आवेदन अवधि में शरदकालीन बिजाई करने वाले किसानों को प्राथमिकता के अनुसार योजना की पात्रता और शर्तों की जानकारी लेनी चाहिए।
गन्ना किसानों को किन तकनीकों पर मिलेगा अनुदान?
हरियाणा की इस परियोजना के तहत गन्ने की खेती में आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसमें 4 फीट की कतार दूरी पर ट्रेंच विधि से बिजाई, सिंगल-बड तकनीक, बड-चिप विधि, फाउंडेशन सीड नर्सरी तैयार करना, बीज उपचार और पेड़ी प्रबंधन जैसे कार्य शामिल हैं।
इन तकनीकों का उद्देश्य गन्ने के बीज की खपत कम करना, पौधों का बेहतर अंकुरण सुनिश्चित करना और फसल की देखभाल को आसान बनाना है। सही तरीके से अपनाने पर किसान खेती के कुछ कार्यों में श्रम और समय की बचत भी कर सकते हैं।
इन कृषि यंत्रों पर भी मिल सकती है सब्सिडी
गन्ने की खेती में मशीनीकरण को बढ़ावा देने के लिए विभाग ने कई प्रकार के कृषि उपकरणों को योजना में शामिल किया है। इनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित यंत्र बताए गए हैं:
- गन्ना सेट ट्रीटमेंट डिवाइस
- पावर वीडर
- रटून मैनेजर
- रोटावेटर
- सब-सोइलर
- ट्रैक्टर चालित स्प्रेयर
- गन्ना कटर
- गन्ना स्ट्रिपर
- गन्ना प्लांटर
- मिनी ट्रैक्टर
इन मशीनों की मदद से खेत की तैयारी, खरपतवार नियंत्रण, बीज उपचार और फसल प्रबंधन जैसे कार्यों को अधिक सुविधाजनक बनाया जा सकता है।
हालांकि, प्रत्येक यंत्र पर मिलने वाली सब्सिडी की राशि या प्रतिशत की विस्तृत जानकारी उपलब्ध विवरण में नहीं दी गई है। इसलिए किसानों को आवेदन करने से पहले संबंधित कृषि अधिकारी या आधिकारिक पोर्टल से यंत्रवार अनुदान, पात्रता और आवश्यक दस्तावेजों की पुष्टि करनी चाहिए।
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गन्ना सब्सिडी योजना 2026-27 में आवेदन कैसे करें?
हरियाणा के पात्र किसान कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
आवेदन की प्रक्रिया:
- सबसे पहले हरियाणा कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट https://agriharyana.gov.in/ पर जाएं।
- गन्ना तकनीकी उद्देश्य परियोजना 2026-27 से संबंधित योजना और दिशा-निर्देश खोजें।
- अपनी पात्रता, उपलब्ध कृषि यंत्रों और आवेदन की शर्तों की जांच करें।
- पोर्टल पर मांगी गई जानकारी भरें और आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें।
- आवेदन जमा करने के बाद उसकी रसीद या संदर्भ संख्या सुरक्षित रखें।
आवेदन प्रक्रिया से जुड़ी किसी भी परेशानी के लिए किसान अपने क्षेत्र के कृषि विकास अधिकारी या उप कृषि निदेशक कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।
31 दिसंबर 2026 है आवेदन की अंतिम तारीख
शरदकालीन गन्ना बिजाई के लिए योजना में आवेदन की अवधि 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक रखी गई है। ऐसे में पात्र किसानों को अंतिम समय का इंतजार करने के बजाय समय रहते आवेदन करना चाहिए।
उप कृषि निदेशक जसविंद्र सिंह के अनुसार, इस परियोजना का उद्देश्य गन्ने की पैदावार बढ़ाने के साथ पानी और श्रम की खपत कम करना है। विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे योजना का लाभ लेने के लिए निर्धारित समयसीमा के भीतर आवेदन करें।
किसानों को यह भी सलाह दी गई है कि आवेदन से पहले संबंधित अधिकारी से कृषि यंत्रों पर उपलब्ध अनुदान और योजना की मौजूदा शर्तों की जानकारी जरूर प्राप्त कर लें।
बड-चिप और ट्रेंच तकनीक से क्या होगा फायदा?
पारंपरिक गन्ना बिजाई में सामान्यतः गन्ने के टुकड़ों का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे बीज सामग्री की जरूरत अधिक हो सकती है। इसके विपरीत, बड-चिप तकनीक में गन्ने की एक आंख वाले छोटे टुकड़े से पौध तैयार की जाती है। इससे बीज सामग्री की खपत कम करने और पौधों को व्यवस्थित ढंग से खेत में लगाने में मदद मिल सकती है।
ट्रेंच विधि में निर्धारित दूरी पर नालियां बनाकर गन्ने की बिजाई की जाती है। इससे फसल प्रबंधन, सिंचाई और मशीनों से निराई-गुड़ाई करने में सुविधा मिल सकती है। हालांकि, इन तकनीकों का परिणाम मिट्टी, मौसम, किस्म और उचित प्रबंधन पर भी निर्भर करता है।
पेड़ी प्रबंधन से कम हो सकती है खेती की लागत
गन्ने की कटाई के बाद उसी पौधे की जड़ों से दोबारा निकलने वाली फसल को पेड़ी कहा जाता है। उचित पेड़ी प्रबंधन से किसान हर बार नई बिजाई किए बिना अगली फसल प्राप्त कर सकते हैं।
इस प्रक्रिया में खेत की सफाई, पौधों की उचित देखभाल, खाद प्रबंधन और जरूरत के अनुसार सिंचाई महत्वपूर्ण होती है। सही प्रबंधन से बीज और दोबारा बिजाई पर होने वाला खर्च कम करने में मदद मिल सकती है।
हरियाणा में गन्ना उत्पादन को बढ़ावा देने की पहल
हरियाणा के यमुनानगर, करनाल, कुरुक्षेत्र, अंबाला और पानीपत सहित कई जिलों में गन्ने की खेती किसानों की आय का महत्वपूर्ण स्रोत है। राज्य में गन्ना उत्पादन से चीनी मिलों की आपूर्ति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी जुड़ी हुई है।
आधुनिक कृषि यंत्रों और उन्नत बिजाई तकनीकों को बढ़ावा देने से किसानों को श्रम की उपलब्धता से जुड़ी समस्याओं का सामना करने में राहत मिल सकती है। साथ ही, बेहतर फसल प्रबंधन से उत्पादन क्षमता में सुधार की संभावना रहती है।

