हरियाणा में पराली नहीं जलाने वाले किसानों को ₹1,200 प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि मिलेगी। जानें पराली जलाने पर जुर्माना और प्रबंधन के तरीके।
धान की कटाई का सीजन शुरू होते ही हरियाणा में पराली प्रबंधन को लेकर कृषि विभाग ने जागरूकता अभियान तेज कर दिया है। किसानों को फसल अवशेष जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में बताया जा रहा है। विभाग के अनुसार, पराली जलाने पर खेत के आकार के आधार पर 30,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं, पराली नहीं जलाकर उसका उचित प्रबंधन करने वाले किसानों को अब ₹1,200 प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। इससे पहले यह सहायता ₹1,000 प्रति एकड़ थी।
सरकार का उद्देश्य किसानों को पराली जलाने से रोकना, वायु प्रदूषण कम करना और फसल अवशेषों का वैज्ञानिक तरीके से उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
पराली नहीं जलाने पर किसानों को मिलेगी बढ़ी हुई प्रोत्साहन राशि
फसल अवशेष प्रबंधन के नोडल अधिकारी सचिन कंबोज के अनुसार, पराली जलाने से पर्यावरण प्रदूषित होने के साथ मिट्टी की गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इससे खेत में मौजूद उपयोगी सूक्ष्मजीव प्रभावित हो सकते हैं और मिट्टी की उर्वरता को नुकसान पहुंच सकता है।
कृषि विभाग किसानों को आधुनिक कृषि मशीनों की मदद से पराली का प्रबंधन करने की सलाह दे रहा है। इसके लिए प्रोत्साहन राशि को बढ़ाकर ₹1,200 प्रति एकड़ किया गया है। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार, फसल कटाई के बाद खेत का सत्यापन किया जाता है और पात्र किसानों को सहायता राशि सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाती है।
इस योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को कृषि विभाग के पोर्टल पर अपने खेत से संबंधित जानकारी दर्ज करानी होती है। भुगतान से पहले निर्धारित शर्तों और सत्यापन प्रक्रिया को पूरा करना जरूरी है।
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इन-सीटू और एक्स-सीटू तकनीक से करें पराली का प्रबंधन
हरियाणा में किसानों को पराली निपटाने के लिए मुख्य रूप से दो तरीके अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
1. इन-सीटू पराली प्रबंधन: इस विधि में फसल अवशेषों को खेत में ही मशीनों की सहायता से काटकर या मिट्टी में मिलाकर प्रबंधित किया जाता है। सुपर सीडर, हैप्पी सीडर और रोटावेटर जैसी मशीनें इसमें उपयोगी हो सकती हैं। इससे पराली जलाने की जरूरत कम होती है और खेत में जैविक पदार्थ बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
2. एक्स-सीटू पराली प्रबंधन: इस तरीके में पराली को खेत से बाहर निकालकर उसकी गांठें बनाई जाती हैं। इसके बाद फसल अवशेषों को निर्धारित उपयोग के लिए दूसरी जगह भेजा जा सकता है। इससे खेत अगली फसल की बुवाई के लिए जल्दी तैयार करने में मदद मिलती है।
कृषि विभाग के मुताबिक, जिले के गांवों में किसानों की सुविधा के लिए कृषि मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं। किसान कस्टम हायरिंग सेंटर से मशीनें किराए पर लेकर भी उनका उपयोग कर सकते हैं। हालांकि, मशीनों की उपलब्धता और किराया स्थानीय केंद्रों के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।
हरियाणा में लगातार घटे पराली जलाने के मामले
पराली प्रबंधन के लिए किए जा रहे प्रयासों के बीच राज्य में खेतों में आग लगाने की घटनाओं में पिछले कुछ वर्षों के दौरान कमी दर्ज की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021 में पराली जलाने के लगभग 7,000 मामले सामने आए थे। वर्ष 2022 में यह संख्या करीब 3,500 रह गई।
इसके बाद वर्ष 2023 में मामले घटकर लगभग 2,300 और वर्ष 2024 में करीब 1,400 रह गए। कृषि विभाग अब इस संख्या में और कमी लाने के लिए किसानों को जागरूक करने तथा वैकल्पिक प्रबंधन के साधन उपलब्ध कराने पर जोर दे रहा है।
विभाग का मानना है कि समय पर मशीनें मिलने और आर्थिक सहायता का लाभ पहुंचने से किसानों को पराली के निपटान में सुविधा मिल सकती है।
गेहूं की बुवाई से पहले पराली प्रबंधन क्यों जरूरी?
धान की कटाई के बाद किसानों को अगली फसल, विशेषकर गेहूं की बुवाई के लिए खेत तैयार करना होता है। कम समय में खेत खाली करने की जरूरत के कारण अक्टूबर और नवंबर के दौरान पराली जलाने की घटनाएं बढ़ने की आशंका रहती है।
पराली जलाने से निकलने वाला धुआं आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण बढ़ा सकता है। इसका असर ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ नजदीकी शहरों की हवा की गुणवत्ता पर भी पड़ सकता है।
इसके विपरीत, फसल अवशेषों को खेत में उचित तरीके से मिलाने से मिट्टी में जैविक पदार्थों को बनाए रखने में मदद मिल सकती है। इससे मिट्टी की संरचना और पोषक तत्वों के प्रबंधन को लाभ मिल सकता है। इसलिए कृषि विशेषज्ञ किसानों को पराली के वैज्ञानिक प्रबंधन के विकल्प अपनाने की सलाह देते हैं।
खेत के आकार के अनुसार लग सकता है जुर्माना
कृषि विभाग ने किसानों को चेतावनी दी है कि पराली जलाने पर नियमानुसार आर्थिक दंड लगाया जा सकता है। जुर्माने की राशि खेत के रकबे और लागू नियमों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। बड़े क्षेत्र में पराली जलाने के मामलों में अधिक जुर्माना लगने का प्रावधान हो सकता है।
विभाग का कहना है कि जुर्माने का उद्देश्य किसानों को परेशान करना नहीं, बल्कि उन्हें फसल अवशेषों के सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल प्रबंधन के लिए प्रेरित करना है।
किसानों से अपील की जा रही है कि वे पराली जलाने के बजाय उपलब्ध कृषि मशीनों और सरकारी सहायता का लाभ उठाएं। मशीनों की उपलब्धता, प्रोत्साहन राशि की पात्रता और आवेदन की प्रक्रिया के संबंध में संबंधित कृषि कार्यालय से जानकारी प्राप्त करना उपयोगी रहेगा।
किसानों के लिए क्या है जरूरी सलाह?
- पराली जलाने के बजाय इन-सीटू या एक्स-सीटू प्रबंधन अपनाएं।
- सुपर सीडर, हैप्पी सीडर और रोटावेटर जैसी मशीनों की उपलब्धता पहले से सुनिश्चित करें।
- प्रोत्साहन राशि के लिए कृषि विभाग के पोर्टल पर खेत का विवरण दर्ज कराएं।
- योजना की पात्रता, सत्यापन और भुगतान से जुड़े नियमों की जानकारी लें।
- पराली प्रबंधन के लिए कृषि विभाग और स्थानीय कृषि विशेषज्ञों की सलाह का पालन करें।

