हरियाणा सरकार ने सिटिजन हेल्पडेस्क शुरू कर राजस्व शिकायतों के 48 घंटे में समाधान और पारदर्शी सिस्टम की गारंटी दी।
हरियाणा सरकार ने राजस्व सेवाओं से जुड़ी शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए सिटिजन हेल्पडेस्क की शुरुआत की है। डॉ. सुमिता मिश्रा द्वारा घोषित इस नई व्यवस्था के तहत अब राज्य के नागरिक अपनी समस्याओं का समाधान महज 48 घंटे के भीतर पा सकेंगे। यह पहल मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निर्देशों पर शुरू की गई है, जिसका उद्देश्य प्रशासनिक देरी को खत्म करना, पारदर्शिता बढ़ाना और आम जनता को बेहतर सेवाएं प्रदान करना है।
नई व्यवस्था के तहत यह हेल्पडेस्क एक सिंगल-विंडो प्लेटफॉर्म के रूप में काम करेगा, जहां नागरिक तहसील स्तर पर आने वाली विभिन्न समस्याओं की शिकायत दर्ज करा सकेंगे। इनमें टोकन अनुमोदन में देरी, ऑनलाइन पंजीकरण प्रणाली में तकनीकी खामियां, पेपरलेस रजिस्ट्रेशन से जुड़ी दिक्कतें, भ्रष्टाचार के आरोप, अधिकारियों द्वारा उत्पीड़न और संपत्ति पंजीकरण से संबंधित किसी भी प्रकार की अनियमितता शामिल हैं। सरकार का मानना है कि इन समस्याओं का त्वरित समाधान नागरिकों का भरोसा बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि नागरिक इस हेल्पडेस्क से दो तरीकों से संपर्क कर सकते हैं। पहला, निर्धारित लैंडलाइन नंबर पर कॉल करके और दूसरा, आधिकारिक ईमेल के माध्यम से शिकायत दर्ज कराकर। हेल्पडेस्क कार्यदिवसों में सुबह 9:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक संचालित रहेगा। शिकायत दर्ज होने के बाद संबंधित व्यक्ति को एक यूनिक शिकायत नंबर दिया जाएगा, जिससे वह अपनी शिकायत की स्थिति को रियल-टाइम में ट्रैक कर सकेगा। इससे बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।
इस नई प्रणाली में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट समय-सीमा भी तय की गई है। यदि किसी पंजीकरण टोकन का अनुमोदन पांच दिनों के भीतर नहीं होता है, तो नागरिक सीधे हेल्पडेस्क पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। साथ ही, टोकन अनुमोदित होने के बाद आवेदकों को दस दिनों के भीतर अपॉइंटमेंट बुक करना अनिवार्य होगा, अन्यथा टोकन स्वतः रद्द हो जाएगा। इसी तरह, अपॉइंटमेंट बुक होने के बाद बीस दिनों के भीतर पंजीकरण प्रक्रिया पूरी करनी होगी, अन्यथा सिस्टम द्वारा टोकन रद्द कर दिया जाएगा। इन नियमों का उद्देश्य सिस्टम के दुरुपयोग को रोकना और स्लॉट्स का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करना है।
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सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हेल्पडेस्क पर दर्ज हर शिकायत का निपटारा 48 घंटे के भीतर करना अनिवार्य होगा। यह समय-सीमा प्रशासन की तत्परता और जिम्मेदारी को दर्शाती है। इसके साथ ही, एक केंद्रीकृत मॉनिटरिंग डैशबोर्ड भी बनाया गया है, जिसकी सीधी निगरानी वित्तायुक्त और जिला उपायुक्तों द्वारा की जाएगी। इससे शिकायतों के समाधान की स्थिति पर नजर रखना आसान होगा और जहां भी देरी या अनियमितता होगी, वहां तुरंत हस्तक्षेप किया जा सकेगा।
पेपरलेस पंजीकरण से जुड़ी शिकायतों के लिए नागरिकों को अपना टोकन नंबर देना अनिवार्य होगा, ताकि संबंधित मामले की पहचान तेजी से हो सके और समाधान में देरी न हो। इस पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बनाने पर विशेष जोर दिया गया है।
सरकार का मानना है कि यह पहल केवल शिकायत निवारण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे न केवल भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा, बल्कि सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। डॉ. सुमिता मिश्रा ने स्पष्ट कहा कि अब सार्वजनिक सेवा वितरण में किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इस सिटिजन हेल्पडेस्क के माध्यम से हरियाणा सरकार ने यह संकेत दिया है कि वह नागरिकों की समस्याओं को प्राथमिकता देते हुए एक पारदर्शी, जवाबदेह और तकनीक-आधारित शासन व्यवस्था स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

