हरियाणा राइट टू सर्विस आयोग ने MSME पोर्टल की खामियों पर सख्ती दिखाते हुए 2 साल की देरी पर ₹10,000 मुआवजा देने के निर्देश दिए।
हरियाणा राइट टू सर्विस आयोग ने एमएसएमई निदेशालय के ऑनलाइन पोर्टल की कार्यप्रणाली में गंभीर खामियों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने विभाग को तत्काल सुधार के निर्देश देते हुए दो साल की देरी पर शिकायतकर्ता को ₹10,000 मुआवजा देने का आदेश दिया है।
पोर्टल की खामियों पर नाराजगी
आयोग ने कहा कि MSME से जुड़े मामलों के निपटारे के लिए बनाए गए पोर्टल में तकनीकी समस्याएं लगातार सामने आ रही हैं। लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद:
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आवेदन अधिकारियों के लॉगिन में दिखाई नहीं देते
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भुगतान प्रक्रिया प्रभावित होती है
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आवेदकों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं
45 दिन की जगह 2 साल की देरी
आयोग ने स्पष्ट किया कि अधिसूचित सेवाओं का निपटारा 45 दिनों में होना चाहिए, लेकिन संबंधित मामले में शिकायतकर्ता को लाभ मिलने में दो साल से अधिक का समय लग गया, जो कानून की भावना के विपरीत है।
तकनीकी बहाने स्वीकार नहीं
आयोग ने पोर्टल माइग्रेशन और तकनीकी दिक्कतों को उचित कारण मानने से इनकार करते हुए कहा कि विभाग की जिम्मेदारी है कि ऐसी समस्याएं आवेदकों को प्रभावित न करें।
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मुआवजे के आदेश
आयोग ने धारा 17(1)(ह) के तहत आदेश देते हुए:
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शिकायतकर्ता को ₹5,000 + ₹5,000 = ₹10,000 मुआवजा देने को कहा
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संबंधित अधिकारी से राशि वसूलने की अनुमति भी दी
सुधार के लिए सख्त निर्देश
आयोग ने MSME महानिदेशक को निर्देश दिए कि:
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पोर्टल में तत्काल तकनीकी सुधार किए जाएं
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निगरानी व्यवस्था मजबूत की जाए
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कोई भी आवेदन लंबित न रहे
साथ ही, 15 अप्रैल 2026 तक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए गए हैं।
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर असर
आयोग ने कहा कि इस तरह की लापरवाही न केवल आवेदकों को परेशानी में डालती है, बल्कि राज्य के Ease of Doing Business माहौल को भी नुकसान पहुंचाती है।
निष्कर्ष
आयोग के इस फैसले से स्पष्ट संदेश गया है कि सेवा में देरी और तकनीकी खामियों को अब नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।

