हरियाणा में आगामी चुनावों के लिए उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों को आपराधिक मामलों का खुलासा सार्वजनिक रूप से करना अनिवार्य, पारदर्शिता पर जोर।
हरियाणा में आगामी नगर निकाय और पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से राज्य निर्वाचन आयोग ने सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। राज्य निर्वाचन आयुक्त देवेंद्र सिंह कल्याण ने स्पष्ट रूप से कहा है कि चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने वाले प्रत्येक उम्मीदवार के लिए अपने आपराधिक मामलों का पूर्ण और सार्वजनिक खुलासा करना अब अनिवार्य होगा। आयोग का मानना है कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए यह जरूरी है कि मतदाताओं को उम्मीदवारों की पृष्ठभूमि की पूरी जानकारी मिले, जिससे वे सोच-समझकर अपने मताधिकार का उपयोग कर सकें।
निर्देशों के अनुसार, जिन उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले लंबित हैं या जिन्हें पूर्व में किसी अपराध में दोषी ठहराया गया है, उन्हें अपने नामांकन के साथ दी गई जानकारी को केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रखना होगा, बल्कि उसे व्यापक रूप से जनता तक पहुंचाना होगा। इसके लिए उम्मीदवारों को अपने निर्वाचन क्षेत्र में प्रसार वाले कम से कम दो समाचार पत्रों—एक हिंदी और एक अंग्रेज़ी—में तीन अलग-अलग तिथियों पर अपने आपराधिक विवरण प्रकाशित करने होंगे। यह प्रक्रिया नाम वापसी की तिथि से लेकर मतदान से दो दिन पहले तक पूरी करना अनिवार्य होगा।
इसके साथ ही उम्मीदवारों को अपने आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी स्थानीय टीवी चैनलों या केबल नेटवर्क के माध्यम से भी कम से कम तीन बार प्रसारित करनी होगी, और यह प्रसारण मतदान समाप्ति से 48 घंटे पहले तक पूरा किया जाना चाहिए। आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि रिटर्निंग अधिकारी ऐसे उम्मीदवारों को लिखित रूप में स्मरण पत्र जारी करेंगे, ताकि नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित हो सके। उम्मीदवारों को अपने द्वारा प्रकाशित समाचार पत्रों की कटिंग्स और अन्य प्रमाण अंतिम चुनाव व्यय विवरण के साथ उपायुक्त को जमा कराने होंगे।
also read : 🎤 टूटा बचपन, बिखरे रिश्ते और शराब की लत—फिर भी बनीं स्टार: Jasmine Sandlas की दर्दभरी कहानी 💔🔥
यह प्रावधान केवल उम्मीदवारों तक सीमित नहीं है, बल्कि राजनीतिक दलों पर भी समान रूप से लागू किया गया है। यदि कोई पार्टी आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवार को टिकट देती है, तो संबंधित उम्मीदवार के लिए अपने मामलों की जानकारी पार्टी को देना अनिवार्य होगा। वहीं राजनीतिक दलों को भी अपने उम्मीदवारों के आपराधिक विवरण को अपनी आधिकारिक वेबसाइट, स्थानीय टीवी चैनलों और दो प्रमुख समाचार पत्रों में प्रकाशित करना होगा। चुनाव प्रक्रिया समाप्त होने के 30 दिनों के भीतर सभी दलों को प्रकाशित घोषणाओं की कटिंग्स सहित अनुपालन रिपोर्ट उपायुक्त को सौंपनी होगी।
राज्य निर्वाचन आयोग ने जोर देकर कहा है कि पारदर्शिता लोकतंत्र की आधारशिला है और इन नियमों का उद्देश्य मतदाताओं को पूरी जानकारी उपलब्ध कराना है, ताकि वे सही और जागरूक निर्णय ले सकें। आयोग ने सभी मतदाताओं से अपील की है कि वे उम्मीदवारों द्वारा जारी शपथपत्रों और घोषणाओं का गंभीरता से अवलोकन करें और 10 मई को अपने मताधिकार का प्रयोग जिम्मेदारी और समझदारी के साथ करें।

