परिसीमन को लेकर तमिलनाडु की सियासत गरमाई। अमित शाह से मुलाकात के बाद DMK ने सीएम विजय पर रुख बदलने और ‘एक हफ्ते में यू-टर्न’ लेने का आरोप लगाया।
तमिलनाडु में लोकसभा सीटों के संभावित परिसीमन को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (DMK) ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय पर इस मुद्दे पर अपना रुख बदलने का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि मुख्यमंत्री ने महज एक सप्ताह के भीतर परिसीमन को लेकर अपनी स्थिति में बदलाव किया है। यह बयान विजय की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ मुलाकात के बाद सामने आया।
अमित शाह से मुलाकात के बाद क्यों उठा विवाद?
विजय ने गुरुवार को तमिलनाडु के महाबलीपुरम के पास कोवलम में हुई दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक में हिस्सा लिया। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने की। इसी दौरान परिसीमन का मुद्दा भी चर्चा के प्रमुख विषयों में रहा।
DMK ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मुख्यमंत्री विजय पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने पहले लोकसभा सीटों की मौजूदा संख्या 543 पर रोक लगाने की मांग की थी, लेकिन अब उनका रुख अधिक नरम नजर आ रहा है।
DMK ने लगाया ‘यू-टर्न’ का आरोप
DMK की आईटी विंग ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि विजय ने कुछ दिन पहले परिसीमन के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया था। पार्टी के मुताबिक तमिलनाडु विधानसभा ने भी लोकसभा में मौजूदा 543 सीटों की संख्या को स्थायी रूप से बरकरार रखने की मांग वाला प्रस्ताव पारित किया था।
अब विजय ने केंद्र से यह सुनिश्चित करने की मांग की है कि जनसंख्या स्थिरीकरण में बेहतर प्रदर्शन करने के कारण किसी भी राज्य के संसदीय प्रतिनिधित्व में कमी न आए। इसी बदलाव को लेकर DMK ने मुख्यमंत्री पर ‘एक हफ्ते में यू-टर्न’ लेने का आरोप लगाया है।
विजय ने परिसीमन पर क्या कहा?
दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में मुख्यमंत्री विजय ने केंद्र से स्पष्ट कानूनी आश्वासन देने की मांग की कि जनसंख्या नियंत्रण में सफल रहने वाले राज्यों को परिसीमन के कारण संसद में अपने मौजूदा प्रतिनिधित्व का नुकसान न उठाना पड़े।
रिपोर्टों के मुताबिक, यह मांग पहले की उस स्थिति से कुछ अलग थी जिसमें विजय ने मौजूदा लोकसभा सीटों की संख्या को 543 पर स्थायी रूप से फ्रीज करने की बात कही थी।
इससे पहले 14 अगस्त को विजय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या को स्थायी रूप से बनाए रखने और राज्यों के वर्तमान सीट वितरण की रक्षा करने की मांग की थी।
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DMK ने TVK के सहयोगियों पर भी साधा निशाना
मुख्यमंत्री के रुख में बदलाव का आरोप लगाते हुए DMK ने टीवीके (TVK) के राजनीतिक सहयोगियों पर भी सवाल उठाए। पार्टी ने तंज कसते हुए पूछा कि क्या गठबंधन में शामिल दल इस कथित बदलाव पर सवाल उठाएंगे या फिर इसे स्वीकार कर लेंगे।
DMK का यह हमला ऐसे समय हुआ है जब तमिलनाडु की राजनीति में परिसीमन को लेकर पहले से ही तीखी बहस चल रही है। इससे पहले DMK और AIADMK ने विजय द्वारा बुलाई गई तमिलनाडु के सांसदों की बैठक से दूरी बनाई थी।
दक्षिणी राज्यों के लिए क्यों अहम है परिसीमन?
परिसीमन के तहत जनसंख्या के आधार पर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं और सीटों के पुनर्गठन की संभावना है। दक्षिणी राज्यों की चिंता यह है कि जिन राज्यों ने जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने में सफलता हासिल की है, उन्हें भविष्य में संसद में राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिहाज से नुकसान न हो।
दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में भी इस विषय पर व्यापक चर्चा हुई। रिपोर्टों के अनुसार, दक्षिणी राज्यों ने लोकसभा में सीटों के मौजूदा वितरण को बनाए रखने और 1971 की जनगणना को आधार बनाए रखने की मांग पर जोर दिया।
अमित शाह की अध्यक्षता में हुई दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक
दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक तमिलनाडु के चेंगलपट्टू जिले में आयोजित हुई। इसमें दक्षिण भारत के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय के अलावा कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू समेत कई प्रमुख नेता और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। परिसीमन के अलावा बैठक में राज्यों के बीच जल विवाद और केंद्र-राज्य समन्वय जैसे विषय भी उठाए गए।
आगे क्या होगा?
परिसीमन को लेकर तमिलनाडु में राजनीतिक टकराव आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है। एक तरफ विजय केंद्र से दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व को सुरक्षित रखने की कानूनी गारंटी मांग रहे हैं, वहीं DMK उनके बदले हुए रुख को राजनीतिक मुद्दा बना रही है।
ऐसे में आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि मुख्यमंत्री विजय परिसीमन पर अपने रुख को किस तरह स्पष्ट करते हैं और तमिलनाडु की प्रमुख राजनीतिक पार्टियां इस मुद्दे पर किस रणनीति के साथ आगे बढ़ती हैं।

