चंडीगढ़ में योग आधारित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन शुरू, विशेषज्ञों ने बौद्धिक दिव्यांग बच्चों के सशक्तिकरण और समग्र विकास पर जोर दिया।
हरियाणा योग आयोग के सहयोग से गवर्नमेंट रिहैबिलिटेशन इंस्टीट्यूट फॉर इंटेलेक्चुअल डिसएबिलिटीज (GRIID) में “योग द्वारा सशक्तिकरण: बौद्धिक दिव्यांग बच्चों के जीवन को सुदृढ़ बनाना” विषय पर दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का भव्य शुभारंभ हुआ।
विशेषज्ञों ने साझा किए महत्वपूर्ण विचार
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में देशभर के चिकित्सकों, शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं और विशेषज्ञों ने भाग लिया। मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. रवनीत कौर उपस्थित रहीं, जबकि डॉ. सुषमा नैन विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुईं।
योग को बताया प्रभावी माध्यम
हरियाणा योग आयोग के अध्यक्ष डॉ. जयदीप आर्य ने कहा कि योग केवल शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक संतुलन को भी मजबूत करता है। उन्होंने विशेष बच्चों के आत्मविश्वास और जीवन गुणवत्ता को बढ़ाने में योग की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
शुरुआती पहचान और हस्तक्षेप पर जोर
वैज्ञानिक सत्रों में विशेषज्ञों ने बताया कि बौद्धिक और विकासात्मक समस्याओं की पहचान शुरुआती वर्षों में ही संभव है। समय पर हस्तक्षेप से बच्चों के विकास में बड़ा सुधार किया जा सकता है।
also read : PM-RKVY: हरियाणा के लिए 1122 करोड़ की कृषि कार्ययोजना मंजूर, मशीनीकरण और प्राकृतिक खेती पर जोर
व्यवहार और एकाग्रता में सुधार
विशेषज्ञों ने योग के माध्यम से व्यवहार प्रबंधन, भावनात्मक स्थिरता और एकाग्रता बढ़ाने के उपायों पर भी चर्चा की। योग को पुनर्वास प्रक्रिया का अहम हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया।
बच्चों ने पेश की प्रेरणादायक प्रस्तुतियां
कार्यक्रम के दौरान GRIID के बच्चों ने योगासन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, जिसने समावेश और आत्मविश्वास का संदेश दिया।
समावेशी शिक्षा और शोध पर फोकस
सम्मेलन में योग और पुनर्वास के समन्वय, वैज्ञानिक योग मॉड्यूल के विकास, समावेशी शिक्षा और विभागों के बीच बेहतर तालमेल जैसे मुद्दों पर विशेष चर्चा हुई।
निष्कर्ष
यह अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन बौद्धिक दिव्यांग बच्चों के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। योग के माध्यम से उनके समग्र विकास को बढ़ावा देने के लिए ऐसे प्रयास भविष्य में और अधिक प्रभावी साबित हो सकते हैं।

