पंचकूला में बैसाखी पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में डॉ. कुलदीप अग्निहोत्री ने भारतीय संस्कृति को समावेशी और प्रगतिशील बताया।
हरियाणा के पंचकूला में बैसाखी के पावन अवसर पर एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें समाज और संस्कृति के विभिन्न पहलुओं पर गहन चर्चा के साथ रंगारंग प्रस्तुतियां भी देखने को मिलीं। यह कार्यक्रम हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी और पंजाबी समाज सभ्याचारिक मंच के संयुक्त तत्वावधान में पीडब्ल्यूडी ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्यकारों, कलाकारों और आमजन ने भाग लिया, जिससे पूरे माहौल में उत्सव और उत्साह का रंग दिखाई दिया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद भारत भूषण भारती ने बैसाखी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व केवल फसल कटाई का उत्सव नहीं, बल्कि साहस, उल्लास और सामाजिक एकता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि बैसाखी का उत्सव हर वर्ष नई ऊर्जा और उमंग के साथ मनाया जाता है और इस तरह के आयोजन समाज में सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करते हैं। उन्होंने पंजाबी भाषा और गुरुमुखी लिपि के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि गुरुमुखी भाषा में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक ज्ञान का अनमोल भंडार निहित है, जिसे विश्वभर में सम्मान मिलता है।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. कुलदीप चंद्र अग्निहोत्री ने अपने संबोधन में भारतीय संस्कृति की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हमारी संस्कृति की सबसे बड़ी खूबी इसकी समावेशी और विकासशील प्रकृति है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति सहअस्तित्व और विविधता में एकता के सिद्धांत पर आधारित है, जो इसे विश्व की अन्य संस्कृतियों से अलग बनाता है। उन्होंने सप्तसिंधु क्षेत्र और खालसा पंथ के ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए बताया कि इस क्षेत्र का इतिहास संघर्ष और आत्मबल से भरा हुआ है, जिसने भारतीय सभ्यता को मजबूत आधार प्रदान किया।
सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रसिद्ध पंजाबी गायक हरभजन सिंह मान ने अपने देशभक्ति और सांस्कृतिक गीतों से दर्शकों का मन मोह लिया। उनके गीतों में भारतीय संस्कृति, परंपरा और सामाजिक मूल्यों की झलक साफ देखने को मिली, जिससे पूरा सभागार भावनात्मक और उत्साहपूर्ण माहौल में डूब गया।
कार्यक्रम के अंत में राजीव मल्होत्रा ने सभी अतिथियों और दर्शकों का आभार व्यक्त किया। मंच संचालन आभा मुकेश साहनी और रेखा साहनी द्वारा किया गया, जिन्होंने पूरे कार्यक्रम को प्रभावी और आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया।
कुल मिलाकर, पंचकूला में आयोजित यह बैसाखी सांस्कृतिक कार्यक्रम न केवल परंपरा और संस्कृति का उत्सव था, बल्कि समाज में एकता, समावेशिता और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का एक सशक्त माध्यम भी साबित हुआ।

