कुरुक्षेत्र में अंबेडकर प्रतिमा अनावरण के दौरान हरविंद्र कल्याण ने पंचतीर्थ निर्माण का जिक्र किया, वहीं कृष्ण बेदी ने 14 अप्रैल को पंचकूला में भव्य कार्यक्रम की घोषणा की।
हरियाणा में अंबेडकर जयंती के अवसर पर सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण के संदेश को मजबूत करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में कुरुक्षेत्र स्थित वाल्मीकि धर्मशाला में भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की भव्य प्रतिमा का अनावरण किया गया। इस अवसर पर हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कृष्ण कुमार बेदी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए हरविंद्र कल्याण ने कहा कि वर्तमान केंद्र और प्रदेश सरकार अंत्योदय की नीति पर चलते हुए समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि आज सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे नागरिकों तक पहुंच रहा है और युवाओं को मेरिट के आधार पर रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार ने बाबा साहेब के सम्मान में देशभर में पंचतीर्थ का निर्माण कराया है, जो उनके जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण स्थलों को दर्शाते हैं। इन तीर्थ स्थलों के माध्यम से नई पीढ़ी को उनके संघर्ष, विचारों और योगदान से प्रेरणा मिल रही है।
उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि वे अपने बच्चों को परिश्रम और शिक्षा के प्रति जागरूक करें, ताकि वे समाज और देश के विकास में सक्रिय भूमिका निभा सकें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में देश वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसमें प्रत्येक नागरिक की भागीदारी आवश्यक है।
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इस दौरान कैबिनेट मंत्री कृष्ण कुमार बेदी ने भी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि 14 अप्रैल को पंचकूला में अंबेडकर जयंती के अवसर पर एक भव्य और विशाल कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा, जिसमें प्रदेशभर से लोग शामिल होंगे। उन्होंने नागरिकों से अधिक से अधिक संख्या में इस आयोजन में भाग लेने की अपील की।
इस कार्यक्रम की विशेष बात यह रही कि अंबेडकर की प्रतिमा का निर्माण विधानसभा सचिव राजीव प्रसाद द्वारा अपने पिता स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद की स्मृति में कराया गया, जो प्रदेश में वाल्मीकि समाज के पहले जज रहे थे। इस पहल को समाज में प्रेरणादायक कदम के रूप में देखा जा रहा है।
समारोह में बड़ी संख्या में गणमान्य व्यक्तियों और स्थानीय नागरिकों ने भाग लेकर बाबा साहेब को श्रद्धांजलि अर्पित की। यह आयोजन न केवल उनके विचारों को सम्मान देने का माध्यम बना, बल्कि समाज में समानता, शिक्षा और जागरूकता के संदेश को भी मजबूती प्रदान करता नजर आया।

