किशाऊ परियोजना पर 6 राज्यों ने MoU किया। जानें किशाऊ बांध की खासियत, 90% केंद्रीय फंडिंग, सिंचाई, बिजली उत्पादन और यमुना पुनरुद्धार की पूरी जानकारी।
ऊपरी यमुना बेसिन में जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और यमुना नदी के पुनरुद्धार की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों ने किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना के निर्माण और क्रियान्वयन को लेकर समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए।
इस समझौते को वर्षों से लंबित किशाऊ परियोजना को आगे बढ़ाने की दिशा में अहम उपलब्धि माना जा रहा है। बैठक में केंद्र और छह राज्यों के बीच करीब 28 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इससे पहले रेणुका जी और लखवार बहुउद्देशीय परियोजनाओं से जुड़े अलग-अलग समझौते किए जा चुके हैं और दोनों परियोजनाओं पर निर्माण कार्य चल रहा है।
किशाऊ परियोजना क्यों है महत्वपूर्ण?
किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना टोंस नदी पर प्रस्तावित है। टोंस यमुना नदी की प्रमुख सहायक नदियों में शामिल है। यह परियोजना उत्तराखंड के देहरादून जिले और हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले से संबंधित है।
परियोजना के तहत करीब 232.6 मीटर ऊंचे कंक्रीट ग्रेविटी डैम का निर्माण प्रस्तावित है। जलाशय की उपयोगी भंडारण क्षमता लगभग 1,562 मिलियन घन मीटर (MCM) होगी।
परियोजना के पूरा होने पर इसके कई क्षेत्रों में लाभ मिलने की उम्मीद है। इनमें सिंचाई, जलविद्युत उत्पादन और पेयजल आपूर्ति प्रमुख हैं।
परियोजना की प्रमुख विशेषताएं
बांध की प्रस्तावित ऊंचाई: 232.6 मीटर
उपयोगी जल भंडारण क्षमता: 1,562 MCM
अनुमानित सिंचाई लाभ: करीब 0.97 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि
अनुमानित वार्षिक बिजली उत्पादन: करीब 1,476 मिलियन यूनिट
परियोजना का कार्यान्वयन: किशाऊ कॉर्पोरेशन लिमिटेड
भागीदार राज्य: 6
राजस्थान और दिल्ली को मिलेगा जल लाभ
किशाऊ जलाशय में संग्रहित पानी का उपयोग विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। इससे खासतौर पर दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और राजस्थान की पेयजल एवं औद्योगिक जल जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
इसके साथ ही परियोजना से सिंचाई सुविधाओं को मजबूत करने और क्षेत्र की जल उपलब्धता में सुधार होने की संभावना है। जलाशय में पर्याप्त पानी का भंडारण यमुना में आवश्यक जल प्रवाह बनाए रखने में भी सहायक हो सकता है।
हिमाचल प्रदेश के जल हिस्से को लेकर बनी सहमति
बैठक में हिमाचल प्रदेश के हिस्से के पानी को दिल्ली और राजस्थान के लिए आवंटित करने पर भी सहमति बनी। इसके बदले हिमाचल प्रदेश को मिलने वाले बिजली उत्पादन के हिस्से से संबंधित लागत को दिल्ली और राजस्थान द्वारा साझा किए जाने का प्रावधान तय किया गया। इस व्यवस्था को राज्यों के बीच जल और ऊर्जा संसाधनों के संतुलित उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
केंद्र सरकार देगी 90 फीसदी वित्तीय सहायता
किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना के जल घटक की लागत में केंद्र सरकार बड़ी हिस्सेदारी निभाएगी। बैठक में तय किया गया कि इस लागत का 90 प्रतिशत हिस्सा केंद्रीय सहायता के रूप में केंद्र सरकार वहन करेगी।
बाकी 10 प्रतिशत लागत छह भागीदार राज्यों के बीच साझा की जाएगी। इस वित्तीय व्यवस्था से परियोजना को आगे बढ़ाने में राज्यों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ कम होने की उम्मीद है।
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किशाऊ कॉर्पोरेशन लिमिटेड करेगा परियोजना का निर्माण
परियोजना को लागू करने की जिम्मेदारी किशाऊ कॉर्पोरेशन लिमिटेड को दी गई है। यह हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड सरकारों का संयुक्त उपक्रम है।
MoU पर हस्ताक्षर होने के बाद अब परियोजना को आवश्यक मंजूरी के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद परियोजना के क्रियान्वयन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकेगा।
1994 के समझौते से जुड़ी है परियोजना
किशाऊ परियोजना की पृष्ठभूमि कई दशक पुरानी है। 12 मई 1994 को ऊपरी यमुना बेसिन से जुड़े राज्यों ने ओखला बैराज तक यमुना के उपयोग योग्य सतही जल के बंटवारे को लेकर समझौता किया था।
उस समझौते में यमुना के जल संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने के लिए ऊपरी यमुना बेसिन में विभिन्न भंडारण परियोजनाओं के विकास की आवश्यकता को स्वीकार किया गया था।
1994 के समझौते के पैरा 7(iii) के तहत चिन्हित प्रत्येक जल भंडारण परियोजना के लिए संबंधित राज्यों के बीच अलग समझौता किए जाने की व्यवस्था थी। किशाऊ परियोजना के लिए हालिया MoU इसी प्रक्रिया की महत्वपूर्ण कड़ी है।
16 जून की बैठक के बाद बनी सहमति
किशाऊ परियोजना को लेकर केंद्र और संबंधित राज्यों के बीच सहमति बनाने की प्रक्रिया को गति 16 जून को गृह मंत्रालय में हुई बैठक के बाद मिली थी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई उस बैठक में यमुना के पुनरुद्धार और किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को आगे बढ़ाने पर राज्यों के बीच सहमति बनी थी।
इसके बाद हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान ने परियोजना के क्रियान्वयन से संबंधित MoU पर हस्ताक्षर करने पर सहमति जताई थी।
यमुना पुनरुद्धार में अहम भूमिका की उम्मीद
किशाऊ परियोजना को केवल जल भंडारण और बिजली उत्पादन की योजना के रूप में नहीं देखा जा रहा है। इससे यमुना बेसिन में जल उपलब्धता को बेहतर बनाने और नदी में स्वच्छ जल के प्रवाह को बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
परियोजना से सिंचाई, पेयजल, औद्योगिक जल और ऊर्जा उत्पादन जैसे कई क्षेत्रों को एक साथ लाभ पहुंचाने का लक्ष्य है। यही वजह है कि इसे ऊपरी यमुना बेसिन में जल सुरक्षा और अंतरराज्यीय सहयोग की महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है।

