Chumbak Review: नीना गुप्ता और देवेन भोजानी की शानदार एक्टिंग से सजी Netflix सीरीज ‘चुंबक’ कैसी है? जानें कहानी, स्टारकास्ट, कॉमेडी और पूरा रिव्यू।
Chumbak Review: पड़ोसी कैसे हों, यह हमारे हाथ में नहीं होता, लेकिन उनके साथ रहना रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा जरूर है। इसी आम अनुभव को कॉमेडी और ड्रामा के रंग में पेश करती है नई वेब सीरीज ‘चुंबक’। सीरीज में नीना गुप्ता, देवेन भोजानी, अर्जुन बिजलानी, अमायरा दस्तूर, सुमित व्यास और हेली शाह समेत कई चर्चित कलाकार नजर आते हैं।
आतिश कपाड़िया के निर्देशन में बनी यह सीरीज एक ऐसे रो-हाउस की कहानी दिखाती है, जहां पांच परिवार एक-दूसरे के बेहद करीब रहते हैं। यहां दीवारें भले अलग-अलग घरों को बांटती हों, लेकिन पड़ोसियों की जिज्ञासा और दखलअंदाजी निजी जिंदगी तक आसानी से पहुंच जाती है।
सीरीज Netflix पर रिलीज हो चुकी है। अगर आपको रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े हल्के-फुल्के हास्य और पारिवारिक ड्रामा वाली कहानियां पसंद हैं, तो ‘चुंबक’ आपके लिए एक विकल्प हो सकती है।
क्या है ‘चुंबक’ की कहानी?
कहानी का मुख्य फोकस रजनी और कुकू मर्चेंट पर है। इन किरदारों को नीना गुप्ता और देवेन भोजानी ने निभाया है। दोनों की शादीशुदा जिंदगी में काफी समय से तनाव चल रहा है और रजनी अलग होने के बारे में विचार कर रही हैं।
लेकिन पति-पत्नी के बीच चल रही निजी परेशानी जल्द ही पूरे पड़ोस का विषय बन जाती है। कॉलोनी में रहने वाले लोग अपनी-अपनी राय देने लगते हैं और बिना मांगी सलाह का सिलसिला शुरू हो जाता है। यहीं से कहानी में गलतफहमियां, बहस और हास्यपूर्ण परिस्थितियां पैदा होती हैं।
कहानी में कई दूसरे परिवार भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मिकी और ट्विंकल ओबेरॉय के किरदारों में अर्जुन बिजलानी और हेली शाह एक युवा कपल की भूमिका में हैं, जो अपनी जिंदगी में थोड़ी निजता चाहते हैं। वहीं आदित्य और प्रियंका खन्ना के किरदारों में सुमित व्यास और मानसी पारेख नजर आते हैं।
इसके अलावा तारापोरवाला परिवार और धर्मेंद्र-किरण केजरीवाल की कहानी भी कॉलोनी के माहौल को अलग-अलग रंग देती है।
पड़ोस की दखलअंदाजी को बनाया कॉमेडी का आधार
‘चुंबक’ की सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसका हास्य किसी बड़े या असाधारण घटनाक्रम से नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी की छोटी-छोटी परेशानियों से निकलता है।
किसी परिवार की बहस में पड़ोसी शामिल हो जाएं, किसी के रिश्ते पर बिना पूछे राय दी जाए या किसी निजी मामले को पूरी सोसायटी की चर्चा बना दिया जाए—सीरीज इन स्थितियों को मजाकिया अंदाज में पेश करती है।
आतिश कपाड़िया ने पड़ोस की इस संस्कृति को एक अलग किरदार की तरह इस्तेमाल किया है। मुंबई के शहरी माहौल में रहने वाले लोगों के लिए इसमें कई स्थितियां जानी-पहचानी लग सकती हैं।
नीना गुप्ता बनीं सीरीज की सबसे बड़ी ताकत
‘चुंबक’ की कास्ट इसकी सबसे मजबूत कड़ी है और इसमें नीना गुप्ता का प्रदर्शन खास तौर पर प्रभावित करता है।
रजनी के किरदार में नीना गुप्ता ने शादीशुदा जिंदगी की उलझन, नाराजगी और हास्य को सहज तरीके से पेश किया है। उनकी कॉमिक टाइमिंग कई जगह बिना किसी अतिरिक्त प्रयास के असर छोड़ती है। उनके चेहरे के भाव, छोटे-छोटे रिएक्शन और संवाद बोलने का अंदाज कई बार सीधे पंचलाइन से ज्यादा मजेदार नजर आता है।
देवेन भोजानी ने दिया मजबूत साथ
कुकू के किरदार में देवेन भोजानी भी प्रभावी नजर आते हैं। उनकी फिजिकल कॉमेडी और टाइमिंग नीना गुप्ता के संयमित अभिनय के साथ अच्छी तरह मेल खाती है।
दोनों कलाकारों की केमिस्ट्री केवल कॉमेडी तक सीमित नहीं रहती। उनके बीच का रिश्ता कहानी को भावनात्मक आधार भी देता है, जिससे सीरीज सिर्फ पड़ोस की नोकझोंक तक सीमित नहीं रहती।
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अर्जुन बिजलानी और हेली शाह की जोड़ी भी अच्छी
अर्जुन बिजलानी ने मिकी के किरदार में सहज अंदाज दिखाया है। वहीं हेली शाह ने ट्विंकल के किरदार को अपनी अलग पहचान दी है।
दोनों की कहानी ऐसे युवा कपल की परेशानी को सामने लाती है, जो अपने रिश्ते में निजी स्पेस चाहता है लेकिन आसपास के लोग उनकी जिंदगी में लगातार अपनी राय देने से पीछे नहीं हटते।
सुमित व्यास और मानसी पारेख की जोड़ी भी कॉमिक परिस्थितियों में अच्छी नजर आती है। दूसरी तरफ सुमित राघवन, संदीपा धर, डेलनाज ईरानी, अनंत वी. जोशी और अमायरा दस्तूर ने भी अपने किरदारों को प्रभावी तरीके से निभाया है।
कहां थोड़ी कमजोर पड़ती है सीरीज?
‘चुंबक’ की कहानी कई जगह मजेदार है, लेकिन हर एपिसोड में कॉमेडी का स्तर एक जैसा नहीं रहता। कुछ मजाक ऐसे हैं जिनका अंदाजा दर्शक पहले ही लगा सकता है।
कुछ किरदारों की आदतों और व्यवहार को बार-बार दोहराने की वजह से कुछ हिस्से लंबे महसूस हो सकते हैं। कई सीन में सभी किरदार एक साथ जोर-जोर से बातचीत करते दिखाई देते हैं, जिससे कॉमेडी की जगह कुछ समय के लिए अफरातफरी जैसा माहौल बन जाता है। अगर कुछ हिस्सों की एडिटिंग थोड़ी ज्यादा चुस्त होती, तो सीरीज का हास्य और प्रभावी हो सकता था।
तकनीकी पक्ष कैसा है?
सीरीज का प्रोडक्शन डिजाइन इसके माहौल को विश्वसनीय बनाता है। कॉलोनी को इस तरह तैयार किया गया है कि वह एक वास्तविक रिहायशी इलाके जैसी लगती है।
कैमरा वर्क कलाकारों के बीच की केमिस्ट्री और कॉमेडी सीन को अच्छी तरह कैप्चर करता है। कुछ लंबे दृश्यों में एडिटिंग थोड़ी धीमी महसूस होती है, लेकिन कुल मिलाकर कहानी समझने में मुश्किल नहीं होती। बैकग्राउंड म्यूजिक भी कहानी के हल्के-फुल्के मूड के साथ चलता है और अनावश्यक रूप से हावी नहीं होता।
‘चुंबक’ देखें या नहीं?
अगर आपको फैमिली कॉमेडी, पड़ोस की नोकझोंक और रिश्तों पर आधारित वेब सीरीज पसंद हैं, तो ‘चुंबक’ एक बार देखी जा सकती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत मजबूत कास्ट और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े हास्यपूर्ण हालात हैं।
हालांकि, हर जगह कॉमेडी समान रूप से असरदार नहीं है और कुछ दृश्यों में कहानी थोड़ी खिंची हुई महसूस हो सकती है। इसके बावजूद नीना गुप्ता और देवेन भोजानी का अभिनय सीरीज को संभालता है।
कुल मिलाकर: ‘चुंबक’ हल्के-फुल्के मनोरंजन के लिए ठीक विकल्प है, खासकर तब जब आप पड़ोस, परिवार और रिश्तों से जुड़ी देसी कॉमेडी देखना चाहते हैं।

