मनोज प्रभाकर के शानदार क्रिकेट करियर, कपिल देव पर लगाए आरोप और BCCI के 5 साल के बैन की पूरी कहानी यहां पढ़ें।
भारतीय क्रिकेट में कई ऐसे ऑलराउंडर रहे हैं जिन्होंने बल्ले और गेंद दोनों से टीम के लिए अहम योगदान दिया। दिल्ली के मनोज प्रभाकर भी इसी सूची में शामिल रहे। एक समय वह भारतीय टीम के भरोसेमंद स्विंग गेंदबाज और उपयोगी बल्लेबाज माने जाते थे। हालांकि, उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का अंत बेहद विवादित परिस्थितियों में हुआ।
प्रभाकर का नाम बाद में भारतीय क्रिकेट के चर्चित भ्रष्टाचार प्रकरण से जुड़ा। उन्होंने एक साथी क्रिकेटर पर खराब प्रदर्शन के बदले पैसे की पेशकश करने का आरोप लगाया और बाद में इस मामले में कपिल देव का नाम लिया। कपिल देव ने आरोपों से इनकार किया था। जांच के बाद प्रभाकर पर भी कार्रवाई हुई और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने उन्हें पांच साल के लिए निलंबित कर दिया।
डेब्यू के बाद पांच साल तक टीम से बाहर रहे
मनोज प्रभाकर ने 1984 में इंग्लैंड के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया। हालांकि डेब्यू के बाद उन्हें भारतीय टीम में लगातार खेलने का मौका नहीं मिला और करीब पांच साल तक वह अंतरराष्ट्रीय स्तर से दूर रहे।
इस दौरान प्रभाकर ने घरेलू क्रिकेट में अपना प्रदर्शन जारी रखा। उनकी मेहनत का परिणाम 1989 में मिला, जब पाकिस्तान दौरे के लिए उन्हें भारतीय टीम में दोबारा शामिल किया गया। इसी दौरे पर सचिन तेंदुलकर ने भी टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया था।
पाकिस्तान दौरे पर शानदार वापसी
प्रभाकर ने वापसी के बाद अपनी गेंदबाजी से तुरंत प्रभाव छोड़ा। कराची टेस्ट में उन्होंने पांच विकेट लिए, जबकि फैसलाबाद टेस्ट में छह विकेट हासिल किए। इस प्रदर्शन के बाद वह भारतीय टीम में अपनी जगह मजबूत करने में सफल रहे।
धीरे-धीरे वह भारत के प्रमुख नई गेंद के गेंदबाजों में शामिल हो गए। खास बात यह थी कि जरूरत पड़ने पर वह बल्लेबाजी में भी योगदान दे सकते थे। उन्हें टीम में ओपनिंग बल्लेबाज के तौर पर भी आजमाया गया।
आंकड़ों में दिखती है ऑलराउंड क्षमता
मनोज प्रभाकर का अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड बताता है कि वह सिर्फ गेंदबाजी तक सीमित खिलाड़ी नहीं थे। टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने 1,600 रन और 96 विकेट हासिल किए। वहीं वनडे में उनके नाम 1,858 रन और 157 विकेट दर्ज रहे।
घरेलू प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उनका प्रदर्शन और भी प्रभावशाली रहा। उन्होंने 41.49 की बल्लेबाजी औसत से 7,469 रन बनाए और गेंदबाजी में 385 विकेट अपने नाम किए।
1994 के वेस्टइंडीज मैच ने बढ़ाई मुश्किलें
प्रभाकर के करियर में 1994 का साल बेहद महत्वपूर्ण रहा। कानपुर में वेस्टइंडीज के खिलाफ मुकाबले में भारत को 258 रन का लक्ष्य मिला था। प्रभाकर ने 154 गेंदों पर नाबाद 102 रन बनाए, लेकिन भारत निर्धारित लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाया और 211/5 के स्कोर पर रुक गया।
भारत यह मुकाबला 46 रन से हार गया। उनके खेलने के तरीके को लेकर सवाल उठे और बाद के वर्षों में भारतीय क्रिकेट में भ्रष्टाचार से जुड़ी जांच के दौरान उनका नाम भी चर्चा में आया।
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1996 वर्ल्ड कप बना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला
मनोज प्रभाकर के अंतरराष्ट्रीय करियर का आखिरी मैच 1996 विश्व कप में श्रीलंका के खिलाफ दिल्ली में हुआ। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए सचिन तेंदुलकर के शानदार 137 रनों की मदद से 271/3 का स्कोर बनाया।
हालांकि प्रभाकर बतौर ओपनर 36 गेंदों पर सिर्फ सात रन बना सके। गेंदबाजी में भी उनका प्रदर्शन प्रभावी नहीं रहा। उनके शुरुआती चार ओवर में श्रीलंका ने 47 रन बना लिए थे।
बाद में प्रभाकर को गेंदबाजी के लिए दोबारा लाया गया और उन्होंने तेज गेंदबाजी की जगह ऑफ स्पिन का सहारा लिया। श्रीलंका ने लक्ष्य हासिल कर लिया और यह मुकाबला प्रभाकर के अंतरराष्ट्रीय करियर का अंतिम मैच साबित हुआ।
कपिल देव पर लगाया था गंभीर आरोप
1996 विश्व कप के बाद इंग्लैंड दौरे के लिए टीम में जगह नहीं मिलने पर प्रभाकर ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया। इसके बाद भारतीय क्रिकेट में भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में उन्होंने एक बड़ा आरोप लगाया।
प्रभाकर ने दावा किया कि 1994 के सिंगर कप के दौरान उन्हें जानबूझकर खराब प्रदर्शन करने के लिए 25 लाख रुपये की पेशकश की गई थी। बाद में उन्होंने इस मामले में कपिल देव का नाम लिया।
कपिल देव ने आरोपों को खारिज कर दिया था। मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) तक पहुंची, लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार जांच एजेंसी को कपिल देव के खिलाफ प्रभाकर के आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त विश्वसनीय सबूत नहीं मिले।
जांच के बाद प्रभाकर पर भी हुई कार्रवाई
मामले की जांच के दौरान प्रभाकर के कथित तौर पर सट्टेबाजों से संबंधों को लेकर भी सवाल उठे। इसके बाद भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने उनके खिलाफ कार्रवाई की।
साल 2000 में BCCI ने मनोज प्रभाकर को पांच साल के लिए निलंबित कर दिया। इस कार्रवाई ने उनके क्रिकेट करियर के विवादित अध्याय को और गहरा कर दिया।
शानदार ऑलराउंडर से विवादित क्रिकेट करियर तक
मनोज प्रभाकर की कहानी भारतीय क्रिकेट की उन कहानियों में शामिल है, जिसमें एक खिलाड़ी ने लंबे समय तक बल्ले और गेंद दोनों से टीम को योगदान दिया, लेकिन करियर के अंतिम वर्षों में विवादों ने उनकी उपलब्धियों को पीछे छोड़ दिया।
आज भी उनके प्रथम श्रेणी और अंतरराष्ट्रीय आंकड़े उनकी क्रिकेट प्रतिभा की गवाही देते हैं। हालांकि मैच फिक्सिंग के आरोपों और बाद में हुई कार्रवाई के कारण उनका नाम भारतीय क्रिकेट के सबसे विवादित दौर की चर्चाओं में शामिल रहा।

