कॉकरोच जनता पार्टी से अलग हुए गुट ने नई पार्टी CJP-D लॉन्च की। प्रेस कॉन्फ्रेंस में केजरीवाल पर आंदोलन को हाईजैक करने के आरोप लगाए।
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ यानी CJP से अलग हुए एक गुट ने अब CJP-Democratic (CJP-D) नाम से नया संगठन बनाने का ऐलान किया है। नए गुट का दावा है कि इसमें CJP से असहमति रखने वाले कई सदस्य शामिल हैं। संगठन की ओर से नए वॉलंटियर्स को भी जोड़ने की प्रक्रिया शुरू किए जाने की बात कही गई है।
CJP-D ने 3 सितंबर को अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान संगठन से जुड़े मनीष ब्रह्मभट्ट ने कहा कि नया गुट मूल CJP आंदोलन से ही निकला है और जल्द ही अपनी ताकत दिखाने के लिए वॉलंटियर रैली आयोजित करेगा।
CJP-D ने लगाए आंदोलन को ‘हैक’ करने के आरोप
नई पार्टी ने आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल पर CJP आंदोलन में दखल देने और उसे अपने प्रभाव में लेने का आरोप लगाया है। CJP-D का दावा है कि आंदोलन के बाद वॉलंटियर्स और प्रदर्शनकारियों से पर्याप्त विचार-विमर्श नहीं किया गया।
संगठन ने आरोप लगाया कि CJP की मौजूदा कमेटी में ऐसे लोग शामिल हैं, जिनके AAP से कथित संबंध हैं। CJP-D ने इसी आधार पर आंदोलन की दिशा और नेतृत्व को लेकर सवाल उठाए हैं।
हालांकि, ये सभी आरोप CJP-D की ओर से लगाए गए हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि का उल्लेख नहीं किया गया है।
‘केजरीवाल का आइडिया’ होने का दावा
CJP-D के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि आंदोलन में अरविंद केजरीवाल का प्रभाव रहा है। नए गुट ने यह भी दावा किया कि केजरीवाल पहले भी अलग-अलग जन आंदोलनों को समर्थन देने के बाद उन्हें राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करते रहे हैं।
संगठन ने अपने बयान में यह भी आरोप लगाया कि विभिन्न समुदायों और वोट बैंक की राजनीति के जरिए राजनीतिक समर्थन हासिल करने की कोशिश की गई।
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कैसे चर्चा में आया ‘कॉकरोच जनता पार्टी’?
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की शुरुआत कथित तौर पर एक ऑनलाइन अभियान के रूप में हुई थी। शुरुआत में इसे एक व्यंग्यात्मक और विरोध के प्रतीक के तौर पर सोशल मीडिया पर चलाया गया, लेकिन बाद में अभियान ने बड़ा रूप ले लिया।
अभियान से बड़ी संख्या में युवा और छात्र जुड़ने लगे। शिक्षा, रोजगार और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार से सवाल उठाए जाने लगे। इसके बाद यह ऑनलाइन गतिविधि धीरे-धीरे सड़क पर होने वाले विरोध-प्रदर्शनों में बदल गई।
CJP की शुरुआत के पीछे क्या था मामला?
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, CJP अभियान की शुरुआत मई में अभिजीत दिपके नाम के व्यक्ति से जुड़ी बताई गई। इसकी पृष्ठभूमि सुप्रीम कोर्ट में हुई एक टिप्पणी से जोड़ी गई, जिसे लेकर बेरोजगार युवाओं के बीच नाराजगी की बात सामने आई थी।
इसी विरोध को आगे बढ़ाते हुए ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम से सोशल मीडिया हैंडल और अभियान शुरू किया गया। बाद में इसमें छात्रों और युवाओं की भागीदारी बढ़ती गई।
शिक्षा और रोजगार के मुद्दे बने आंदोलन का आधार
CJP आंदोलन से जुड़े लोगों ने शिक्षा व्यवस्था और रोजगार से संबंधित मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। आंदोलन के बढ़ने के साथ बड़ी संख्या में छात्रों और युवाओं के इससे जुड़ने का दावा किया गया।
इसी दौरान आंदोलन और सरकार के बीच टकराव की खबरें भी चर्चा में रहीं। हालांकि, आंदोलन से जुड़े दावों और उसके प्रभाव को लेकर अलग-अलग पक्षों के बयान सामने आते रहे हैं।
अब CJP-D के सामने बड़ी चुनौती
CJP से अलग होकर CJP-D के गठन के बाद अब इस आंदोलन के भीतर नेतृत्व और दिशा को लेकर नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। नया गुट खुद को CJP से अलग विचार रखने वाले सदस्यों का मंच बता रहा है।
CJP-D ने आने वाले दिनों में वॉलंटियर रैली आयोजित करने की घोषणा की है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि नया संगठन कितने लोगों को अपने साथ जोड़ पाता है और मूल CJP आंदोलन पर इसका कितना असर पड़ता है।

