ईरान-अमेरिका तनाव: ईरान ने होर्मुज हमले के बाद अमेरिका पर पलटवार किया। जॉर्डन-यूएई में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल हमले और MQ-9 ड्रोन गिराने का दावा किया।
ईरान-अमेरिका तनाव: होर्मुज जलडमरूमध्य में लारक द्वीप पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान ने जवाबी हमले का दावा किया है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के अनुसार, जॉर्डन और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को मिसाइल और ड्रोन के जरिए निशाना बनाया गया। इसके साथ ही ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के ऊपर अमेरिकी MQ-9 ड्रोन को मार गिराने का दावा भी किया है। ताजा घटनाक्रम के बाद पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर तेजी से बढ़ता नजर आ रहा है।
अमेरिकी हमले के बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के मुताबिक, अमेरिकी सेना की ओर से लारक द्वीप पर की गई कार्रवाई के जवाब में जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं। ईरान ने दावा किया कि किंग हुसैन और अल-अजराक में मौजूद अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया।
वहीं, जॉर्डन की सेना ने बताया कि उसके वायु रक्षा तंत्र ने देश के हवाई क्षेत्र में दाखिल होने वाली आठ मिसाइलों को रोक दिया। हालांकि, इन हमलों में अमेरिकी ठिकानों को कितना नुकसान पहुंचा और कितने लोग प्रभावित हुए, इसकी पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
यूएई के अमेरिकी सैन्य बेस पर ड्रोन हमले का दावा
ईरान की ओर से संयुक्त अरब अमीरात में अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठान को निशाना बनाए जाने की बात भी कही गई है। रिपोर्टों के अनुसार, यूएई स्थित अल-मिनहाद सैन्य बेस पर ड्रोन के जरिए हमला किया गया।
अल-मिनहाद क्षेत्र में अमेरिकी और सहयोगी देशों की सैन्य गतिविधियां होती रही हैं। हालांकि, ईरानी हमले के बाद बेस को हुए नुकसान या किसी संभावित हताहत की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।
लारक द्वीप पर अमेरिका ने क्यों किया हमला?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता टिम हॉकिन्स के अनुसार, अमेरिकी सेना ने लारक द्वीप पर ईरानी रॉकेट लॉन्चरों को उस समय निशाना बनाया, जब इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के सदस्यों को समुद्री बारूदी सुरंगों के साथ रॉकेट लॉन्च करने की तैयारी करते हुए देखा गया था।
अमेरिकी सेना ने लारक द्वीप पर दो ईरानी लॉन्चरों पर हमला करने की पुष्टि की है। इस कार्रवाई के बाद ईरान की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई और उसने अमेरिका पर जवाबी कार्रवाई शुरू करने का दावा किया।
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लारक द्वीप के आसपास धमाकों की आवाजें
ईरानी मीडिया ने लारक द्वीप के आसपास धमाकों की आवाजें सुने जाने की जानकारी दी है। कुछ स्थानीय रिपोर्टों में अमेरिकी हमले के दौरान लोगों के मारे जाने और घायल होने का भी दावा किया गया है। हालांकि, हताहतों की संख्या और नुकसान की वास्तविक स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो पाई है।
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने अमेरिकी कार्रवाई को गंभीर रणनीतिक गलती बताया है। ईरानी पक्ष का कहना है कि देश की जमीन और नागरिकों पर हुए हमले का जवाब देना उसका अधिकार है।
ईरान ने अमेरिकी MQ-9 ड्रोन गिराने का किया दावा
ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के ऊपर अमेरिकी MQ-9 ड्रोन को मार गिराने का दावा भी किया है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के अनुसार, ड्रोन क्षेत्र में चल रही अमेरिकी सैन्य गतिविधि के दौरान निगरानी या अभियान का हिस्सा था।
हालांकि, ड्रोन को गिराए जाने से जुड़ी जानकारी और इसके मलबे या नुकसान को लेकर स्वतंत्र पुष्टि अभी जरूरी है। सैन्य संघर्ष के दौरान सामने आने वाले ऐसे दावों की पुष्टि में अक्सर समय लगता है।
कई महीनों बाद फिर बढ़ा अमेरिका-ईरान तनाव
अमेरिका की ओर से लारक द्वीप पर की गई कार्रवाई को ईरान के खिलाफ करीब एक महीने के अंतराल के बाद महत्वपूर्ण सैन्य कदम के तौर पर देखा जा रहा है। इसके बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई ने क्षेत्र में पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल है। यहां किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि का असर क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।
आगे क्या करेगा अमेरिका?
ईरान की ओर से जॉर्डन और यूएई में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के दावे के बाद अब सभी की नजर अमेरिका की अगली कार्रवाई पर है। यदि दोनों देशों के बीच हमले और जवाबी हमले जारी रहते हैं, तो पश्चिम एशिया में संघर्ष के और फैलने की आशंका बढ़ सकती है।
फिलहाल ईरान और अमेरिका की ओर से सामने आए दावों के बीच कई घटनाओं की स्वतंत्र पुष्टि बाकी है। ऐसे में स्थिति पर नजर रखना और आधिकारिक स्रोतों से आने वाली जानकारी का इंतजार करना महत्वपूर्ण होगा।

