वैभव सूर्यवंशी और यशस्वी जायसवाल से जुड़े विवाद पर संजय मांजरेकर ने ICC और BCCI से सख्त अनुशासनात्मक नियमों की मांग की। जानें पूरा मामला और उनकी प्रतिक्रिया।
वैभव सूर्यवंशी और यशस्वी जायसवाल विवाद: मैदान पर खिलाड़ियों के आक्रामक व्यवहार को लेकर पूर्व भारतीय क्रिकेटर संजय मांजरेकर ने नाराजगी जताई है। यशस्वी जायसवाल और श्रीलंकाई गेंदबाज असिथा फर्नांडो के बीच कोलंबो टेस्ट में हुई तीखी बहस के बाद आईसीसी की कार्रवाई को मांजरेकर ने पर्याप्त नहीं माना। उन्होंने आईसीसी और बीसीसीआई से ऐसे मामलों में सख्त नियम लागू करने की मांग की है।
यशस्वी जायसवाल-असिथा फर्नांडो विवाद क्या था?
कोलंबो टेस्ट में भारत की पहली पारी के दौरान यशस्वी जायसवाल 45 रन बनाकर असिथा फर्नांडो की गेंद पर आउट हुए। इसके बाद पवेलियन लौटते समय दोनों खिलाड़ियों के बीच कहासुनी हो गई। देखते ही देखते मामला काफी गर्म हो गया और दोनों के बीच सिर टकराने जैसी स्थिति भी सामने आई।
घटना के बाद आईसीसी ने यशस्वी जायसवाल और असिथा फर्नांडो पर मैच फीस का 25 प्रतिशत जुर्माना लगाया। दोनों खिलाड़ियों को एक-एक डिमेरिट पॉइंट भी दिया गया।
मामूली सजा से नाराज हैं संजय मांजरेकर
संजय मांजरेकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस मामले पर अपनी राय रखी। उनका कहना है कि मैदान पर खराब व्यवहार करने के बाद केवल मामूली जुर्माना लगाकर छोड़ देना सही संदेश नहीं देता।
मांजरेकर के अनुसार, यदि खिलाड़ियों को ऐसे मामलों में कड़ी सजा नहीं मिलती तो उनके दोबारा ऐसी गलती करने की संभावना बढ़ सकती है। उन्होंने इसे खिलाड़ियों के भविष्य और क्रिकेट की छवि के लिए भी उचित नहीं बताया।
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वैभव सूर्यवंशी के मामले का भी किया जिक्र
मांजरेकर ने 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी से जुड़े विवाद को भी इसी संदर्भ में सामने रखा। जून में श्रीलंका A के खिलाफ ट्राई-सीरीज के दौरान सुपर ओवर में हार के बाद वैभव का श्रीलंकाई खिलाड़ी विशेन हलम्बागे के साथ विवाद हुआ था।
बहस के दौरान वैभव द्वारा विपक्षी खिलाड़ी को धक्का देने की बात सामने आई थी। कम उम्र में इस तरह के व्यवहार को लेकर मांजरेकर ने चिंता जताई है। उनका मानना है कि युवा खिलाड़ियों को शुरुआत से ही अनुशासन और खेल भावना का महत्व समझाना जरूरी है।
ICC और BCCI से सख्त नियमों की मांग
संजय मांजरेकर का मानना है कि क्रिकेट में प्रतिस्पर्धा और आक्रामकता अपनी जगह है, लेकिन खिलाड़ियों को अनुशासन की सीमा पार नहीं करनी चाहिए। खासकर युवा क्रिकेटरों के लिए मैदान पर व्यवहार को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जरूरी हैं।
उन्होंने आईसीसी और बीसीसीआई से ऐसे मामलों में अधिक प्रभावी कार्रवाई करने की जरूरत बताई, ताकि खिलाड़ियों को गलत व्यवहार दोहराने से रोका जा सके।
युवा खिलाड़ियों के लिए सही मार्गदर्शन जरूरी
वैभव सूर्यवंशी जैसे युवा क्रिकेटरों के करियर को देखते हुए मांजरेकर की चिंता और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर के दबाव और प्रतिस्पर्धा का सामना करने वाले खिलाड़ियों को खेल कौशल के साथ-साथ व्यवहार और मानसिक अनुशासन की भी ट्रेनिंग मिलनी चाहिए।
यशस्वी जायसवाल के मामले ने भी क्रिकेट में खिलाड़ियों के आचरण को लेकर बहस को फिर चर्चा में ला दिया है। अब देखना होगा कि आईसीसी और बीसीसीआई भविष्य में ऐसे मामलों से निपटने के लिए नियमों में कोई बदलाव करते हैं या नहीं।

