हरियाणा में 2026 से 2032 तक ‘वाटर सिक्योर हरियाणा’ कार्यक्रम लागू होगा। ₹5,714.80 करोड़ की परियोजना में विश्व बैंक 70% राशि देगा।
हरियाणा सरकार राज्य में जल सुरक्षा को मजबूत करने और कृषि क्षेत्र में टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के लिए ‘वाटर सिक्योर हरियाणा’ कार्यक्रम लागू करने की तैयारी कर रही है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा के अनुसार, यह परियोजना वर्ष 2026 से 2032 तक छह वर्षों में संचालित करने का प्रस्ताव है।
इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम की कुल अनुमानित लागत ₹5,714.80 करोड़ निर्धारित की गई है। परियोजना का उद्देश्य राज्य में जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करना, पानी की उपलब्धता को सुरक्षित बनाना और किसानों को अधिक टिकाऊ कृषि पद्धतियों की ओर प्रोत्साहित करना है।
विश्व बैंक देगा 70 प्रतिशत वित्तीय सहायता
‘वाटर सिक्योर हरियाणा’ परियोजना के लिए विश्व बैंक की ओर से बड़ी वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। कुल परियोजना लागत का 70 प्रतिशत यानी ₹4,000.36 करोड़ विश्व बैंक द्वारा दिए जाने का प्रस्ताव है।
वहीं, परियोजना की शेष 30 प्रतिशत राशि यानी ₹1,714.44 करोड़ हरियाणा सरकार अपने हिस्से के रूप में वहन करेगी। इससे राज्य में जल प्रबंधन और कृषि से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
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जल सुरक्षा के साथ टिकाऊ कृषि पर जोर
कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने बताया कि कार्यक्रम का मुख्य फोकस जल सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ सस्टेनेबल एग्रीकल्चर को बढ़ावा देना है। बदलते मौसम और जल संसाधनों पर बढ़ते दबाव के बीच पानी का विवेकपूर्ण इस्तेमाल कृषि क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
प्रस्तावित कार्यक्रम के माध्यम से ऐसी कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित किया जाएगा, जिनमें पानी की बचत हो और किसानों की उत्पादकता को बनाए रखते हुए प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर संरक्षण किया जा सके।
प्रदेश में “वाटर सिक्योर हरियाणा” कार्यक्रम को लागू किया जाएगा ताकि जल सुरक्षा को सुदृढ़ तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों को और अधिक बढ़ावा दिया जा सके।
इस कार्यक्रम को वर्ष 2026 से 2032 तक कुल छह वर्षों की अवधि में लागू करने का प्रस्ताव है, जिसकी कुल अनुमानित लागत ₹5,714.80 करोड़ तय…
— DPR Haryana (@DiprHaryana) August 24, 2026
2026 से 2032 तक चलेगा कार्यक्रम
सरकार ने ‘वाटर सिक्योर हरियाणा’ को छह साल की अवधि में लागू करने का प्रस्ताव रखा है। 2026 से 2032 के बीच चलने वाली इस परियोजना के जरिए राज्य में दीर्घकालिक जल सुरक्षा की दिशा में काम किया जाएगा।
परियोजना में विश्व बैंक की वित्तीय भागीदारी से राज्य को जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और कृषि क्षेत्र में आधुनिक एवं टिकाऊ तरीकों को अपनाने में सहायता मिलने की उम्मीद है।
किसानों और जल संसाधनों दोनों को मिलेगा लाभ
हरियाणा में कृषि क्षेत्र बड़ी मात्रा में जल संसाधनों पर निर्भर है। ऐसे में जल संरक्षण और बेहतर सिंचाई प्रबंधन से किसानों को भविष्य में पानी की उपलब्धता से जुड़ी चुनौतियों का सामना करने में मदद मिल सकती है।
सरकार का लक्ष्य जल संसाधनों का संरक्षण करते हुए कृषि को अधिक टिकाऊ और भविष्य के लिए सुरक्षित बनाना है। ‘वाटर सिक्योर हरियाणा’ कार्यक्रम इसी दिशा में एक दीर्घकालिक पहल के रूप में देखा जा रहा है।

