AAP सांसद संजय सिंह ने 20 तारीख की घटना को लेकर गृह मंत्री से सवाल किया कि 15 दिन बाद सदन में क्यों आए और बच्चों पर लाठी व पैलेट गन किसने चलाई।
आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने गृह मंत्री को लेकर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि सदन का केवल एक दिन शेष रहने के बाद गृह मंत्री के सामने आने पर सवाल उठना स्वाभाविक है। संजय सिंह ने कथित घटना को लेकर सरकार से जवाबदेही की मांग की।
संजय सिंह ने कहा कि जिस घटना का जिक्र किया जा रहा है, वह 20 तारीख की है। उनके मुताबिक, घटना के बाद करीब 15 दिनों तक गृह मंत्री की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं आया और अब सदन का कार्यकाल समाप्त होने से ठीक पहले इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी जा रही है।
’15 दिनों तक कहां थे गृह मंत्री?’
AAP सांसद ने सवाल उठाया कि यदि घटना इतनी गंभीर थी, तो गृह मंत्री ने इतने दिनों तक इस पर सदन में जवाब क्यों नहीं दिया। उन्होंने कहा कि सरकार को घटना से जुड़े सवालों पर स्पष्ट जानकारी सदन के सामने रखनी चाहिए।
संजय सिंह ने कहा कि जनता और जनप्रतिनिधि यह जानना चाहते हैं कि घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ और जिम्मेदारी किसकी थी।
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बच्चों पर कार्रवाई को लेकर उठाए सवाल
संजय सिंह ने आरोप लगाया कि घटना के दौरान बच्चों पर कील लगी लाठियों और पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने गृह मंत्री से सीधे सवाल करते हुए पूछा कि इस कार्रवाई के लिए कौन जिम्मेदार था।
AAP सांसद ने कहा कि बच्चों के खिलाफ कथित तौर पर ऐसी कार्रवाई बेहद गंभीर विषय है और इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि सरकार इस मामले में सदन के भीतर स्पष्ट जवाब दे।
गृह मंत्री से जवाब देने की मांग
संजय सिंह ने कहा कि गृह मंत्री को घटना से जुड़े सभी सवालों का जवाब देना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से कथित लाठी और पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
AAP सांसद के बयान के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। संजय सिंह ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि वह घटना से जुड़े तथ्यों को सदन के सामने रखे और लोगों को पूरी जानकारी दे।
सदन में जवाबदेही को लेकर सियासत तेज
संजय सिंह के बयान ने एक बार फिर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव को सामने ला दिया है। AAP सांसद लगातार इस मामले को लेकर सरकार से जवाब मांग रहे हैं और घटना की जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहे हैं।
उन्होंने दोहराया कि गृह मंत्री को सदन में आकर यह स्पष्ट करना चाहिए कि कथित कार्रवाई किसके आदेश पर हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

