जयपुर के गुप्त वृन्दावन धाम में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राधा-कृष्ण शिलापूजन किया। उन्होंने राजस्थान की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जयपुर स्थित गुप्त वृन्दावन धाम में आयोजित राधा-कृष्ण शिलापूजन कार्यक्रम में हिस्सा लिया। उन्होंने विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर का निरीक्षण भी किया और वहां चल रही व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने गुप्त वृन्दावन धाम के निर्माण और उससे जुड़ी गतिविधियों की जानकारी ली।
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सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत का केंद्र बनेगा धाम
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राजस्थान की पावन भूमि पर आकार ले रहा गुप्त वृन्दावन धाम सनातन संस्कृति, भक्ति परंपरा और देश की आध्यात्मिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उन्होंने कहा कि यह दिव्य धाम आने वाले समय में श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बनने के साथ राजस्थान की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को भी और मजबूत करेगा।
जयपुर स्थित गुप्त वृन्दावन धाम में ‘राधा-कृष्ण शिलापूजन’ में सम्मिलित होकर विधि-विधानपूर्वक पूजा-अर्चना की एवं मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
राजस्थान की पावन धरा पर आकार ले रहा यह दिव्य धाम हमारी सनातन संस्कृति, भक्ति परंपरा और आध्यात्मिक विरासत को नई पीढ़ियों तक… pic.twitter.com/LY0crWr2rF
— Bhajanlal Sharma (@BhajanlalBjp) August 10, 2026
राधा-कृष्ण से प्रदेश की खुशहाली की प्रार्थना
राधा-कृष्ण शिलापूजन के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना की। उन्होंने कामना की कि भगवान राधा-कृष्ण की कृपा राजस्थान के प्रत्येक परिवार पर बनी रहे।
सीएम भजनलाल शर्मा ने राजस्थान के निरंतर विकास और प्रदेशवासियों की खुशहाली की कामना करते हुए कहा कि राज्य विकास और समृद्धि के पथ पर लगातार आगे बढ़ता रहे।
धार्मिक पर्यटन को मिल सकती है नई पहचान
जयपुर में विकसित हो रहा गुप्त वृन्दावन धाम धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। धाम के विकसित होने से श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए एक नया आध्यात्मिक केंद्र तैयार होगा।
मुख्यमंत्री की मौजूदगी में हुए शिलापूजन कार्यक्रम ने धाम के निर्माण कार्य को धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्व प्रदान किया। राजस्थान की समृद्ध धार्मिक परंपराओं और विरासत को संरक्षित करने की दिशा में ऐसे केंद्रों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

